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कुश्ती: सुशील ने 8 साल बाद हासिल किया विश्व चैंपियनशिप का टिकट

विश्व कुश्ती चैंपियनशिप 14 सितंबर से कजाकिस्तान के नूर-सुल्तान में होनी है. सुशील ने कहा- कुश्ती से प्रेम के कारण अब तक खेल रहा हूं.  

कुश्ती: सुशील ने 8 साल बाद हासिल किया विश्व चैंपियनशिप का टिकट
सुशील कुमार 2010 में विश्व चैंपियनशिप के 66 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: ओलंपिक में दो मेडल जीत चुके सुशील कुमार (Sushil Kumar) ने सीनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप  के लिए भारतीय टीम में जगह पक्की कर ली है. सुशील ने मंगलवार को यहां केडी जाधव कुश्ती स्टेडियम में पुरुषों के 74 किग्रा वर्ग के ट्रायल्स में जितेंदर को 4-2 से हराकर इस वर्ग के लिए टीम में जगह बनाई. विश्व कुश्ती चैंपियनशिप (World Wrestling Championships) 14 सितंबर से कजाकिस्तान के नूर-सुल्तान में होनी है. सुशील 2010 में विश्व चैंपियनशिप के 66 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं. 

ट्रायल्स में सुशील ने जितेंदर के खिलाफ मुकाबले के पहले राउंड में 4-0 की बढ़त हासिल कर रखी थी और दूसरे राउंड में उन्होंने मुकाबला अपने नाम कर लिया. जितेंदर के पास अभी भी भारतीय टीम में जगह बनाने का मौका है अगर वह 23 अगस्त को 79 किग्रा में वीरदेव गुलिया को हरा देते हैं.  

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ट्रायल्स में सुशील के अलावा राहुल अवारे (61 किग्रा), किरण मोर (70 किग्रा) और प्रवीन (92 किग्रा) भी विश्व चैंपियनशिप के लिए भारतीय टीम में जगह बनाने में सफल रहे. सुशील अब रवि दहिया (57 किग्रा), बजरंग पुनिया (65 किग्रा), दीपक पुनिया (86 किग्रा), मौसम खत्री (97 किग्रा) और सुमित मलिक (125 किग्रा) के साथ भारतीय टीम में शामिल हो गए हैं. ये पहलवान अब सीनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में भाग लेंगे. यह चैंपियनशिप टोक्यो ओलम्पिक के लिए पहला क्वालीफिकेशन टूर्नामेंट भी है.

36 साल के सुशील कुमार छठी बार विश्व कुश्ती चैम्पियनशिप में हिस्सा लेंगे. उन्होंने ट्रायल्स के बाद कहा, ‘एक पहलवान के लिए लंबे समय बाद मैट पर वापसी करना आसान नहीं होता है. जब मैं रूस में अभ्यास कर रहा था तब लोग मुझसे पूछते थे कि मैं वापसी क्यों कर रहा हूं. मैं उनसे कहता था कि मैं कुश्ती से प्यार करता हूं और इसलिए मैं यह कर रहा हूं.’ 

जितेंद्र के बारे में इस खिलाड़ी ने कहा, ‘जितेंद्र मेरे छोटे भाई की तरह है और मैं उसे भविष्य के टूर्नामेंट के लिए शुभकामनाएं देता हूं. अगर मुकाबले इसी तरह के कड़े रहते हैं तो यह देश के लिए अच्छा होगा.’