Mirabai Chanu के शानदार प्रदर्शन के बीच Saurabh Chaudhary पदक से चूके, लेकिन सबका दिल जीता

टोक्यो ओलंपिक में भारत के स्टार शूटर सौरभ (Saurabh Chaudhary) 10 मीटर एयर पिस्टल में सातवें स्थान पर आए. हालांकि उनके परिवार का कहना है कि लक्ष्य बरकरार है और एक दिन वो देश का नाम रोशन करेगा.

Mirabai Chanu के शानदार प्रदर्शन के बीच Saurabh Chaudhary पदक से चूके, लेकिन सबका दिल जीता
(FILE PHOTO)

मेरठ: टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics) में क्वालीफाइंग राउंड में 586 पॉइंट्स के साथ पहले पायदान पर आने के बाद परिवार को लग रहा था कि अब वो घड़ी आने वाली है जिसका इंतजार पूरा देश कर रहा था. पूरे देश को 10 मीटर एयर पिस्टल में पदक मिलने की उम्मीद जागी थी. लेकिन सौरभ का सपना फाइनल राउंड में चूर-चूर हो गया, उनको सातवें स्थान पर ही संतुष्ट होने पड़ा.

सौरभ का सपना टूटा

सौरभ (Saurabh Chaudhary) के पहले स्थान से सातवें स्थान पर आने के बाद भी सौरभ के परिवार वाले संतुष्ट है. जी न्यूज़ से बात करते हुए सौरभ के पिता जगमोहन ने कहा, 'सौरभ ने काफी तैयारी की थी लेकिन खेल में हार जीत तो लगी रहती है. उनका बेटा अपने इस गांव से ओलंपिक खेलने गया उनके लिए भी काफी है, अभी उसके सामने बहुत खेल बाकी हैं एक दिन वो ज़रूर देश को ओलंपिक में पदक दिलाएगा'.

वहीं सौरभ के बड़े भाई नितिन का कहना था कि उन्हें खुशी है कि 'गुलेल से शुरू हुआ सौरभ का शूटिंग के शौक ओलंपिक तक पहुंच गया, आज उसका दिन नहीं था इस लिए वो पदक नहीं ला पाया, दस में से सिर्फ तीन खिलाड़ियों को ही पदक मिलता है उन्हें अफसोस है कि सौरभ शुरू के तीन स्थान में अपनी जगह नहीं बना पाया लेकिन वो ओलंपिक में खेला ये तजुर्बा भी उसके बहुत काम आएगा'.

जबर्दस्त खिलाड़ी हैं सौरभ

टोक्यो ओलंपिक से पहले सौरभ चौधरी (Saurabh Chaudhary) इंटरनेशनल इवेंट्स में कुल मिलाकर 14 गोल्ड और छह सिल्वर मेडल जीत चुके हैं, इसमें आईएसएसएफ़ विश्व चैम्पियनशिप, विश्व कप, यूथ ओलंपिक गेम्स, एशियन एयरगन चैम्पियनशिप और एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक शामिल हैं.

19 वर्षीय सौरभ (Saurabh Chaudhary) अगर मेडल जीतने में कामयाब होते तो वो ओलंपिक में पदक जीतने वाले पांचवें भारतीय निशानेबाज होते. इससे पहले राज्यवर्धन सिंह राठौर, अभिनव बिंद्रा, गगन नारंग और विजय कुमार ओलंपिक में पदक ला चुके हैं.

 बता दें कि किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले सौरभ के परिवार में आज तक कोई भी खेलो में नहीं गया. सौरव उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के कलिंगा गांव के रहने वाले हैं. सौरभ के भाई बताते है कि बचपन से गुलेल से खेलने वाले सौरभ की शूटिंग के प्रति लगाव को देखकर ही उसके पिता जगमोहन सिंह ने उनको आगे बढ़ाया और मेरठ की ही वीर सहमल राइफल क्लब में 13 साल की उम्र में भेजने लगे, जहां से शूटिंग के गुर सीखने के बाद सौरभ ने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिताब जीते और अर्जुन अवार्ड तक से सम्मानित हुए.

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