close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

ZEE Jankari: बार-बार फाइनल हारने वाली पीवी सिंधु ने आलोचकों को ऐसे दिया जवाब

PV Sindhu लगातार तीसरी बार World Championships का Final खेल रही थीं. इससे पहले वो 2017 और 2018 में भी इस Tournament के Final में पहुंची थीं. लेकिन दोनों ही मौकों पर उन्हें हार मिली.

ZEE Jankari: बार-बार फाइनल हारने वाली पीवी सिंधु ने आलोचकों को ऐसे दिया जवाब

आज विश्लेषण की शुरुआत हमने तिरंगे की शान में चार-चांद लगाने वाली तस्वीरों से की थी. जम्मू-कश्मीर से लेकर Switzerland तक, आज सिर्फ और सिर्फ भारत की बात हो रही है और लोग भारत के तिरंगे को लहराते हुए देख रहे हैं. इसलिए अब हम देश को ऊर्जा और प्रेरणा देने वाली 24 वर्ष की बैडमिंटन खिलाड़ी P. V. Sindhu की बात करेंगे.

भारतीय बैडमिंटन के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है, जब किसी खिलाड़ी ने बैडमिंटन की World Championships जीती है. वो भी सिर्फ 37 मिनटों में. ये एक बहुत बड़ी उपलब्धि है. जिसमें कई चीज़ों का मिश्रण है. इसमें कड़ी मेहनत है. लगातार परिश्रम करने की ललक है. ये जीत गुरु-शिष्य परंपरा का उत्कृष्ट उदाहरण है. इस जीत में मानसिक दृढ़ता है और इसमें नए भारत का भरोसा है, कि हां, मैं भी कर सकता हूं. या मैं भी कर सकती हूं. इसी दृष्टिकोण से आज P. V. Sindhu की इच्छाशक्ति और उनके खेल को समझने की ज़रुरत है. ताकि आप को ये पता चल सके, कि 24 वर्ष की एक लड़की ने असंभव से दिखने वाले लक्ष्य को संभव कैसे कर दिया.

PV Sindhu लगातार तीसरी बार World Championships का Final खेल रही थीं. इससे पहले वो 2017 और 2018 में भी इस Tournament के Final में पहुंची थीं. लेकिन दोनों ही मौकों पर उन्हें हार मिली. और उन्हें Silver Medal से संतोष करना पड़ा. 2017 में उन्हें जापान की उसी खिलाड़ी ने Final में हराया था, जिसे हराकर वो इस बार World Champion बनी हैं. 2017 का Final क़रीब 110 मिनट चला था. जबकि, इस बार का Final सिर्फ 37 मिनट में ख़त्म हो गया. 2018 में PV Sindhu को Spain की Carolina Marin ने हराया था.

समय का चक्र देखिए, Spain की इसी खिलाड़ी ने PV Sindhu को Tweet करके बधाई दी है  और उनके लिए कहा है. Proud Of You Girl. You Are gold

कल खेले गए Final में P.V Sindhu ने लगातार 8 Points जीते. दोनों खिलाड़ियों के बीच 56 Rallies हुईं. जिनमें से 42 सिंधु ने जीतीं. Women's Singles की WORLD RANKING में Sindhu 5वें स्थान पर हैं. मई 2019 से वो लगातार Top Five में बनी हुई हैं.

वक्त बदलते देर नहीं लगती. P.V Sindhu इस कथन की जीती-जागती मिसाल हैं. हालांकि, एक समय ऐसा भी था, जब बार-बार Final हारने की वजह से उन्हें Choker कहा जाने लगा था. और इसकी शुरुआत हुई थी वर्ष 2016 से. जब Rio Olympic Games का फाइनल हारने के बाद उनके बारे में ये कहा जाने लगा था, कि वो देश के लिए Gold Medal नहीं जीत सकतीं. लेकिन अपनी Performance और जूझारु रवैये की बदौलत P.V Sindhu ने सभी आलोचकों को जवाब दे दिया है.

हम हमेशा क्रिकेट और दूसरे खेलों की ही तुलना करते हैं. लेकिन आपने ये भी गौर किया होगा कि क्रिकेट में भी हम सिर्फ पुरुषों की क्रिकेट टीम को ही याद रखते हैं. भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के हर सदस्य का नाम और आंकड़े हममें से कई लोगों को मुंहज़ुबानी याद रहता है. लेकिन इसी पैमाने पर महिला क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों का हमें नाम भी नहीं पता होता है. ये सौतेला व्यवहार भारत के हर खेल और हर महिला खिलाड़ी के साथ होता है. इसीलिए हम कह रहे हैं, कि पुरुष प्रधान देश माने जाने वाले भारत में P.V Sindhu की उपलब्धि बहुत ऐतिहासिक है.

यहां पर बैडमिंटन के जिस World Championships के Singles Event की बात हो रही है.  उसमें P.V Sindhu के अलावा सिर्फ तीन भारतीय खिलाड़ियों को कोई Medal मिला है. इस बार के Men's Singles में B. Sai Praneeth को Bronze Medal मिला है.

2015 के Final में सायना नेहवाल ने Silver Medal जीता था.  जबकि, भारतीय बैडमिंटन का सबसे बड़ा नाम कहे जाने वाले, प्रकाश पादुकोण ने 1983 में Men's Singles का Bronze Medal जीता था. इस लिहाज़ से देखा जाए, तो P.V Sindhu नए भारत की नई चैम्पियन हैं और नया भारत Silver या Bronze Medal नहीं, Gold में यकीन रखता है. इसलिए, आज देश की युवा पीढ़ी को विश्वविजेता सिंधु की 5 मुख्य बातों से भी शिक्षा लेने की ज़रुरत है.

वो बातें क्या हैं, ये जानने से पहले आपको P.V Sindhu के यादगार 37 मिनट को जीना होगा और उसे देखना होगा.  हमने विश्व विजेता सिंधु के ऐतिहासिक 37 मिनट के सबसे रोचक सवा मिनट ख़ास आपके लिए निकाले हैं.  अगर आप किसी कारणवश ये मैच ना देख पाएं हों, तो ये सवा मिनट आपसे आज कोई नहीं छीन सकता.