दयाशंकर मिश्र

डियर जिंदगी: आपका पछतावा क्या होगा!

खुशी भी एक चुनाव है. हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि खुशी तुरंत हासिल करने की चीज है. यह 'अभी नहीं तो कभी नहीं' को याद करने पर ही हासिल हो सकती है.

Nov 21, 2018, 08:01 AM IST

डियर जिंदगी : जिन्‍हें अब तक माफ न कर पाए हों...

किसी को माफ करने के लिए हमें उस पर निर्भर नहीं रहना. ऐसे तो हम जीवन के सूत्र दूसरों के पास गिरवी रख देंगे. माफ करने को स्‍वभाव बनाना है. यह खुद को सुखी करने का रास्‍ता है, जो हमें चुनना है.

Nov 20, 2018, 08:00 AM IST

डियर जिंदगी: अतीत की छाया और रिश्‍ते!

जितना संभव हो खुद को, अपने फैसले और दृष्टिकोण को, अतीत की छाया से बचाएं. उससे कुछ सबक जरूर सीखे जा सकते हैं, लेकिन उसके अनुभव से चिपके नहीं रहा जा सकता.

Nov 14, 2018, 08:14 AM IST

डियर जिंदगी: अतरंगी सपने!

अतरंगी सपने ही असल में हमारे हैं. वही हमें हमारे होने का बोध कराते हैं. ऐसे सपनों की महक को अपने भीतर खोजना, उनके लिए पागल हुए बिना अपने होने को हासिल नहीं किया जा सकता!

Nov 13, 2018, 08:07 AM IST

डियर जिंदगी : उसके ‘जैसा’ कुछ नहीं होता!

कोई किसी के जैसा नहीं होता! हम किसी का पूरा सच नहीं जानते, इसलिए उसके जैसे अरमान में घुलते रहते हैं, यह जीवन के प्रति सबसे बड़ा छल है.  

Nov 1, 2018, 11:44 AM IST

डियर जिंदगी: कितने 'नए' हैं हम!

नया कहने से नहीं होता, नया दिखना होता है. नया साबित करना होता है. नया पहनने की चीज नहीं है, वह नितांत आंतरिक विचार है. मन के भीतर अगर आप नहीं बदले, तो बाहर का कोई अर्थ नहीं!

Oct 26, 2018, 08:43 AM IST

डियर जिंदगी: कब से ‘उनसे’ मिले नहीं…

जब हम जिंदगी को ऑक्‍सीजन की सप्‍लाई करने वाली सारी खिड़कियां बंद कर देते हैं, तो उससे स्‍वाभाविक रूप से बेचैनी होती है. जो धीरे-धीरे रूखेपन में बदल जाती है.

Oct 25, 2018, 10:52 AM IST

डियर जिंदगी: ...जो कुछ न दे सके

 समय का छोटा सा टुकड़ा उनके लिए भी निकालना चाहिए, जिन्होंने 'धूप' के वक्त बिना शर्त हमें अपनी छांव देने के साथ ही, हमारे होने में अहम भूमिका का निर्वाह किया.

Oct 18, 2018, 09:17 AM IST

डियर जिंदगी : साथ रहते हुए स्‍वतंत्र होना!

जहां भाव से अधिक ‘समझ’ जमा हो जाती है, वहां रिश्‍तों में दरार की गुंजाइश बढ़ जाती है. रिश्‍तों के नाम भले वही हों, लेकिन उनके मिजाज, व्‍यवहार में जो ‘ताजी’ हवा आई है, उसके अनुकूल स्‍वयं को तैयार करना होगा.

Oct 17, 2018, 10:19 AM IST

डियर जिंदगी : कितने उदार हैं, हम!

अपने बच्चों के ही मन की बात को समझ पाना. उनके सपनों को पढ़ सकना, अरमां की गहराई तक जा पाना जो आप पर निर्भर हैं, मुश्किल काम नहीं, बस अपनी ख्‍वाहिश उन पर थोपने से मुक्‍त हो जाइए.

Oct 11, 2018, 10:20 AM IST

डियर जिंदगी : दुख रास्‍ता है, रुकने की जगह नहीं…

आंसू तो एक प्रकार की सफाई हैं. वह मन में जमे दुख के मैल को आसानी से डिटर्जेंट की तरह निकाल देते हैं. इसलिए आंसुओं से नहीं डरना है, बल्कि इसकी चिंता करनी हैं कि कहीं आंसू निकलने बंद ही न हो जाएं.

Oct 10, 2018, 09:04 AM IST

डियर जिंदगी : मीठे का ‘खारा’ होते जाना

अकेलापन, केवल अकेले रहना नहीं है. यह तो उस संक्रामक विचार प्रक्रिया का ‘टिप ऑफ आइसबर्ग’ है, जो अपने साथ निराशा, दुख, ईर्ष्‍या और गहरी उदासी को साथ लिए चलता है.

Oct 4, 2018, 09:20 AM IST

डियर जिंदगी : जब बच्‍चों के नंबर 'कम' आएं...

स्‍कूल बच्‍चों के रिजल्‍ट को 'सेल' करके नई फ्रेंचाइजी बनाने में व्‍यस्‍त हैं. उनका बच्‍चों पर से ध्‍यान पूरी तरह गायब है.

Sep 20, 2018, 07:31 AM IST

डियर जिंदगी : इतना ‘नमक’ कहां से आ रहा है!

जिंदगी बूमरैंग के सिद्धांत पर काम करती है. इस नाते हम अपनी नियति के सबसे बड़े लेखक हैं. हम खुद को जैसा देखना चाहते हैं, उसमें और हमारे करने में अंतर नहीं होना चाहिए, यह अंतर सबसे बड़ी बाधा है.

मई 9, 2018, 07:51 AM IST

डियर जिंदगी : बंद दरवाजा…

अगर आप चाहते हैं कि जब आप परेशानी में हों तो लोग तुरंत आपकी मदद को आगें आएं, तो सबसे पहले आपको खुद ऐसा करने का अभ्‍यास करना होगा, आदत डालनी होगी.

मई 8, 2018, 07:29 AM IST

डियर जिंदगी : विश्‍वास में कितना विश्‍वास…

जिंदगी थोकभर लोगों के सहारे नहीं चलती. वह तो चुनिंदा लोगों के यकीन पर टिकी होती है.

मई 7, 2018, 07:49 AM IST

डियर जिंदगी : गाली देती महिलाएं और आधुनिकता!

कुछ बरस पहले, एक मीडिया कंपनी में काम करते हुए मैंने पाया कि कैसे पुरुष साथियों की गालियों के बीच महिलाएं खुद को सहज दिखाती थीं. सहज होने का भ्रम पैदा करती थीं.  लेकिन कई बार खुद वह गालियां ऐसे देतीं मानो वह पुरुषों की बराबरी का ऐलान लालकिले से उन गालियों के माध्‍यम से ही देना चाहती हैं.

मई 2, 2018, 08:46 AM IST

डियर जिंदगी : युवा की 'बूढ़ी' सोच - 2

भारत में शादियों के दौरान बारातियों का व्‍यवहार किसी तांडव से कम नहीं होता. हालांकि जिन लोगों के पास गैर मेट्रो शहर, कस्‍बे, गांव की शादियों का अनुभव नहीं है, उन्‍हें यह बात समझने में परेशानी हो सकती है.

मई 1, 2018, 07:13 AM IST

डियर जिंदगी : जब सुबह तुम उठना !

कुछ दिन पहले मैं एक बुजुर्ग ट्रैफिक पुलिस अफसर के साथ सड़क पर लोगों के व्‍यवहार के बारे में बातें कर रहा था. उन्‍होंने कुछ मजेदार कहानियां बताईं, जो सुबह उठने के तरीके की खोज का असल कारण हैं.

Mar 7, 2018, 06:03 PM IST

डियर जिंदगी: जिंदगी इन्‍हें माफ कर देना, बहुत गुस्‍से में थे...

हम कहते हैं, न.. 'मैं बहुत गुस्‍से में था, मुझे माफ कर दीजिए.' यह कुछ वैसा ही जैसा हम सुनते रहते हैं कि मुझे क्षमा कर दीजिए, मैं नशे में था! मतलब स्‍पष्‍ट है कि नशे में होना और गुस्‍से में होना एक जैसा है! 

Dec 21, 2017, 02:46 PM IST