दयाशंकर मिश्र

डियर जिंदगी: आपने अब तक कितना भुलाया है....

किसी बच्‍चे और बड़े से एक ही सवाल कीजिए. तुम्‍हें पुराना कितना याद है. बच्‍चा फटाक से कहेगा, ध्‍यान नहीं, भूल गया. यह कहकर वह किसी ओर दौड़ जाएगा. कुछ दिन में यह भी भूल जाएगा कि आपने उससे कुछ पूछा था. दूसरी ओर बड़ा! वह तो अपने याद कि बोरियां दिमाग में लिए बैठा है. उसे सब कुछ याद है!

Sep 22, 2017, 04:51 PM IST

डियर जिंदगी : हम रोते हुए बच्‍चे को हंसाना तो दूर, हंसने वाले को रुला रहे हैं...

हम बच्‍चे के भविष्‍य (जिसका कोई ठौर ठिकाना नहीं है) को संवारने के नाम पर उसके आज को डरावना, दुखी करने पर तुले हुए हैं.

Aug 21, 2017, 04:10 PM IST

डियर जिंदगी: 'इतनी मुद्दत बाद मिले हो, किन सोचों में गुम रहते हो...'

मिलने का पर्यायवाची क्‍या है! मोबाइल/चैटिंग? अगर यह सवाल हम जिंदगी से करें तो एक ही जवाब आएगा. मिलना! असल में मिलने को कोई पर्यायवाची है ही नहीं. जिंदगी में सारा दर्द ही तब से उपजा, जबसे हमने मिलने के विकल्‍प का अविष्‍कार कर लिया. हमने तकनीक को मिलने का टेंडर देकर इत्‍मीनान, सुकून को तनाव की नदी में डुबो दिया. 

Aug 17, 2017, 03:32 PM IST

डियर जिंदगी : हमारा बहरापन और 'कॉल मी मीनाक्षी' के खतरे...

एक डियो रिश्‍तों, परिवार की मर्यादा और संस्‍कार पर भारी है. वह मां और बेटी के लिए एक ही पुरुष जैसे उस संबंध की ओर खतरनाक संकेत भेज रहा है, जो कभी हमारे समाज का हिस्‍सा ही नहीं रहा.

Aug 14, 2017, 05:49 PM IST

डियर जिंदगी : आत्‍महत्‍या से पहले क्‍या 'टूटा' होगा आईएएस अफसर के भीतर...

आमतौर पर आत्‍महत्‍या के कारणों के लिए उस अकेले इंसान की परिस्थिति भर जिम्‍मेदार नहीं होती. परिवार, दोस्तों से संबंध, मुश्किलों से सामना करने की क्षमता और किसी अनचाही/अप्रिय बात का सामना करने की शक्ति.

Aug 11, 2017, 04:21 PM IST

डियर जिंदगी : जो माफ नहीं कर सकते उनके लिए...

ठीक वैसे ही कई बार जीवन ऐसी चीजों से बाधित हो जाता है, जो असल में इतनी 'छोटी' होती हैं कि उनका ख्‍याल भी नहीं रहता और कुछ दिन का अबोला कई बार बरसों के प्रेम पर भारी पड़ जाता है.

Aug 9, 2017, 03:57 PM IST

डियर जिंदगी : रिश्‍तों की डोर में गांठ का दर्द...

गांठ है ही खतरनाक. भले ही वह शरीर के लिए हो या मन के लिए. मन के भीतर की गांठें कई बार अनुमान से अधिक नुकसान पहुंचाती हैं.

Aug 8, 2017, 04:06 PM IST

डियर जिंदगी : तनाव की सुनामी और आशा के दीये...

जीवन पर ध्‍यान एकाग्र रहने से हम तनाव से दूर रह सकते हैं. यह तनाव है क्‍या. यह कल की आज चिंता करने से ही तो उपजा है.

Aug 7, 2017, 04:07 PM IST

डियर जिंदगी : कभी एकांत में भी रहिए ....

‘डियर जिंदगी’ पर हम निरंतर तनाव की चर्चा कर रहे हैं, उससे बचने पर संवाद कर रहे हैं. इस बीच मनुष्‍यता पर सबसे बड़ेखतरे आत्‍महत्‍या के खतरनाक स्तर तक हो रहे उभार पर भी हम बात कर रहे हैं.

Aug 4, 2017, 01:12 PM IST

डियर जिंदगी : कमजोर पड़ते 'मन' का कारण क्‍या है...

इन दिनों 'ब्‍लू व्‍हेल' गेम चर्चा में है. इस खेल के चलते मुंबई में एक बच्‍चे ने आत्‍महत्‍या कर ली है. इसे पूरी दुनिया में सैकड़ों बच्‍चों की आत्‍महत्‍या का कारण माना जा रहा है. 'ब्‍लू व्‍हेल' को रूस में मनोविज्ञान की पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले फिलिप बुदेकिन ने तैयार किया है.

Aug 2, 2017, 04:07 PM IST

डियर जिंदगी : आपने बाबा भारती की कहानी सुनी है...

दयाशंकर मिश्र हिंदी कहानियों के पाठक 'हार की जीत' कहानी से परिचित हैं. जो नहीं हैं, उनके लिए बस इतना कि गूगल के आंगन से खोजकर सुदर्शन की यह कहानी बहुत आसानी से पढ़ी जा सकती है. बल्कि इसे बच्‍चों को बकायदा सुनाना चाहिए. इस कहानी का भाव जिंदगी के कठिनतम सवालों को सुलझाने में मदद कर सकता है.

Aug 1, 2017, 06:07 PM IST

डियर जिंदगी : आप बहुत खास हैं, उम्‍मीद है आपको पता होगा...

रंगे हुए चेहरों पर अधिक देर तक रंग नहीं टिकता, देर-सबेर जिंदगी की धूप, बारिश में उनके नकली रंग उनका साथ छोड़ ही देते हैं. उस वक्‍त जिंदगी एक ऐसे चौराहे पर आकर ठहर जाती है कि किसी राह को चुनना आसान नहीं होता.

Jul 31, 2017, 03:21 PM IST

डियर जिंदगी : 'यह भी गुजर जाएगा.'

एक बरस बाद सेठ के वही ठाठ हो गए, जो कुछ बरस पहले थे. बस उनके मिजाज में यह फर्क आ गया कि उन्होंनेअब मांगना छोड़ दिया. उसकी जगह देना शुरू कर दिया.

Jul 27, 2017, 03:08 PM IST

डियर जिंदगी : आप भी दुविधा में हैं!

हिंदी साहित्‍य परंपरा से परिचित लोग निश्चित रूप से डॉ. विजय बहादुर सिंह से परिचित होंगे. वह अक्‍सर कहा करते हैं, 'दुविधा से आत्‍मा का नाश होता है'. वह आगे जोड़ते हैं कि गीता का हमारे जीवन के लिए सबसे सरल संदेश यही है.'

Jul 26, 2017, 05:29 PM IST

डियर जिंदगी : यह रिश्‍ता क्‍या कहलाता है...

मैं इस बात से बिल्‍कुल सहमत नहीं कि पहले दोस्‍तों में जो प्रेम था, अब खत्‍म हो गया. पहले परिवार में जो प्रेम था, अब कम हो गया. पहले भी प्रेम वैसा ही था, जैसा अब हो गया है. बस हमारे आसपास की दुनिया बदल रही है.

Jul 25, 2017, 04:43 PM IST

डियर जिंदगी : दूसरों के अनुसार बदलने की जरूरत नहीं...

जैसे-जैसे हम बड़े होते जाते हैं या यूं कहें कि दुनिया में पुराने होते जाते हैं, खुद को दूसरों के अनुकूल बनाने की जुगाड़ में खपाने में अभ्‍यस्‍त होने की कोशिश करने लगते हैं.

Jul 21, 2017, 07:36 PM IST

डियर जिंदगी : ठहरने का वक्‍त न हो, तो पांव फि‍सल जाते हैं...

जिस गति से हमारा जीवन चल रहा है, कभी-कभी लगता है यह 'मैराथन समय' है. हर कोई दौड़ रहा है. भयानक तेजी से. कोई नियम नहीं है. गुणवत्‍ता नहीं. बस दौड़ना है. एक के बाद दूसरी दौड़, बिना किसी सूचना के शुरू हो जाती है. इसमें हर कोई हिस्‍सा ले रहा है. दूसरे को टंगड़ी मारने जैसी बातें हर पल घट रही हैं.

Jul 14, 2017, 05:29 PM IST