दयाशंकर मिश्र

डि‍यर जिंदगी: आपके कारण कितने लोग खुश हैं...

खुशी गूगल पर सबसे ज्‍यादा तलाश किए जाने वाले कीवर्ड में से एक है. इसके अनंत रूप हैं. कोई किसी वजह से खुश है, तो कोई इस वजह से कि दूसरा दुखी है.

Jul 12, 2017, 06:29 PM IST

डियर जिंदगी: खुद को दिया जाने वाला सबसे बड़ा कष्‍ट है 24x7...

दयाशंकर मिश्र इन दिनों यह फैशन है. जिससे भी बात करिए कि वह तनिक ठसक अधिक दिखाते हुए कहेगा, मैं हर समय काम पर रहता हूं. 24x7 प्रोफेशनल हूं, जिंदगी की यही मांग है. इन दिनों वह सभी जो अपने को युवा कहते हैं, चाहे 'करियर' में हों, बेरोजगार हों, 24x7 ही मिलेंगे. अब इससे हासिल क्‍या हुआ, यह अलग विमर्श है.

Jul 11, 2017, 04:42 PM IST

डियर जिंदगी : मित्र 'संतोष' लापतागंज से लौट आओ, कोई कुछ नहीं कहेगा...

यह कोई प्राचीन समय की कथा नहीं है, जब 'संतोष' के बारे में स्‍कूल, समाज में समझाया, पढ़ाया जाता था. उस 'संतोष' का साथ जिंदगी से कभी-कभार ही छूटता था. 'संतोष' के मायने थे, अपनी कोशिश से संतुष्‍ट रहना. दूसरों की चीजों को देखकर उसकी कामना में तो कोई बुराई नहीं लेकिन हां, उससे जलन, ईर्ष्‍या की मनाही थी.

Jul 10, 2017, 05:08 PM IST

डियर जिंदगी : घर के द्वार खुले हैं, लेकिन अंदर आने से पहले...

महानगर में शुक्रवार खास है, क्‍योंकि उसके बाद बच्‍चों को माता-पिता के दर्शन होने की संभावना रहती है. पहले पांच दिन तो काजी लोगों के लिए कुछ ऐसे हैं, मानो घर पर वह बस 'संडे' वाले पापा/मम्‍मी हैं. जो शनिवार, रविवार को ही प्रकट होते हैं.

Jul 7, 2017, 05:55 PM IST

डियर जिंदगी : अपनी सोच को बंधनों से मुक्त कीजिए...

क्‍या हैं, वही जो हमारा विचार है. वैसा, जैसा हम सोचते हैं. धीरे-धीरे हम अपने विचारों जैसे होने लगते हैं. स्‍कूल हमारी सोच का सबसे पहला केंद्र होता है. इसीलिए हम जीवन भर स्‍कूल की छाया से मुक्‍त नहीं हो पाते. इस छाया की सबसे अधिक सज़ा बच्‍चों को एक जैसा सोचने, अपनी सीमाएं जानने और अपनी हद में रहने के रूप में मिलती है. जब हम छोटे थे, हमें लगता था आने वाले समय में स्‍कूल बेहतर होंगे, शायद वह बच्‍चों को सलीके से समझने की कोशिश करेंगे लेकिन सब उलट गया. स्‍कूल अपने को अच्‍छा बिज़नेस हाउस बनाने में जुट गए... तो बच्‍चों के दिशा नहीं भटकने की गारंटी कौन लेगा.   

Jul 6, 2017, 04:04 PM IST

डियर जिंदगी : 'सुकुमार' नज़रिए से बचें, कल से बाहर निकलें...

हमारे आसपास जो लोग हैं, जैसी वह सलाह देते हैं. हमारी ज़िंदगी उसी सलाह के अनुसार दौड़ती है. देश, समाज के रूप में अभी भी हम वैज्ञानिक चेतना से बहुत दूर हैं. हमारी चिंतन, निर्णय प्रक्रिया में ख़तरनाक जालों का साफ़ होना बाक़ी है. हमारे निर्णय कुछ ज़्यादा ही अतीत आधारित रहते हैं.

Jul 5, 2017, 04:01 PM IST

डियर जिंदगी : आप भी विरोध से डरते हैं !

कभी ऐसा गुलाब देखा है, जिसमें कांटे न हों. मुझे नहीं दिखा, उम्‍मीद है आपको भी नहीं मिला होगा. प्रतिष्‍ठता और सफलता जीवन के ऐसे गुलाब हैं, जो कांटों के बिना नहीं उग सकते. बिना कांटों के गुलाब के अस्तित्‍व की कल्‍पना नहीं की जा सकती. इसी तरह बिना मुश्किलों, विरोधियों के जीवन की सफलता संभव नहीं है.

Jul 4, 2017, 03:08 PM IST

डियर जिंदगी : कितना वक्‍त हुआ अपने मन से मिले हुए ...

हम बाहरी आवाजों के शोर में इतने उलझे कि भीतर की आवाज हम तक पहुंचना ही बंद हो गई. हमारा खुद से संवाद का सिलसिला रुका नहीं, खत्‍म हो गया. हम सब सुन रहे हैं, सबकी सुन रहे हैं, लेकिन मन के दरवाजे पर अपनी अंर्तध्‍वनि के लिए हमारे पास अवकाश नहीं है. बाहर का शोर हमारी चेतना पर भारी पड़ रहा है.

Jul 3, 2017, 03:07 PM IST

डियर जिंदगी : दिल के दरवाजे खुले रखें, जिंदगी रोशन रहेगी

वह शो रूम जाने की तैयारी में थे. जिंदगी की पहली कार को घर लाने. अपने घर के बिल्‍कुल पास बन रही बहुमंजिला इमारत के पास-पास एक मजदूर परिवार बेहद संजीदगी से कुछ चर्चा कर रहा था.

Jun 30, 2017, 05:20 PM IST

डियर जिंदगी: सबसे बड़ी मुश्किल प्रेम की कथनी-करनी में अंतर

दिल्‍ली में मंगलवार शाम को कुछ किशोर बच्‍चों ने एक युवा को पीट-पीट कर मार डाला क्‍योंकि उसने सड़‍क की जगह मैदान में क्रिकेट खेलने की सलाह दी थी. बच्‍चों ने इस युवक को घटना के आठ से दस घंटे बाद काम से लौटते समय इतनी बुरी तरह पीटा कि उसे बचाया नहीं जा सका. आठ घंटे तक इतना गुस्‍सा यह बच्‍चे अपने भीतर पाले बैठे रहे.

Jun 29, 2017, 04:37 PM IST

डियर जिंदगी: सारे दोस्‍त हमेशा के लिए नहीं होते...

दोस्‍तों को लेकर क्रेजी होना नई बात नहीं. हर कोई होता है, लेकिन यह वन-वे ट्रैफि‍क है. और अगर है भी तो कब तक? 'डियर जिंदगी' को अहमदाबाद से नियमित पाठक का ईमेल मिला. आईआईएम से पूर्व छात्र, वहीं मल्‍टीनेशनल कंपनी में काम करने वाले दिनेश वर्मा ने दोस्‍तों को लेकर अनूठे अनुभव साझा किए हैं. आइए, आज इसी पर बात करते हैं. दिनेश ने लिखा है..

Jun 28, 2017, 03:48 PM IST

डियर जिंदगी : खुद से आखिरी बार कब मिले थे...

हमारा स्‍वभाव क्‍या है. हम रोते हुए दुनिया में आते हैं, तो क्‍या जीवन भर रोते ही रहते हैं. रोना एकमात्र गुण है, जो जीवनभर साथ रहता है. हमारा स्‍थाई स्‍वभाव दुख है, जिसकी गलियों से भटकते हुए हम कभी-कभी सुख की गली में चले जाते हैं. जीवन कुछ नहीं, बस एक दुख की गली है. जिसमें रात गुजारने के लिए जिंदगी मिली है.

Jun 27, 2017, 03:54 PM IST

डियर जिंदगी : सबसे बड़ी मुश्किल, एक ही सपने से चिपके रहना...

एक जगह, विचार पर जमे रहने का गुण. विरासत से चिपके रहने की आदत. वैसे ही जीना, वैसे ही सांस लेना यहां तक कि वैसे ही मर जाना, जैसे खानदान के लोग अब तक दुनिया को अलविदा कहते आए. यह स्थिरता कब जड़ता का स्‍वरूप ले लेती है, हमें पता भी नहीं चलता. एक ही सपने से चिपके रहने का यहां अर्थ चीजों के लिए संघर्ष करने से मनाही नहीं है.

Jun 26, 2017, 06:00 PM IST

डियर जिंदगी : हम कितने ओरिजनल हैं...

यह सेल्‍फी समय है. पहले की शताब्‍दियों की तुलना में अधिक आत्‍मकेंद्रित, आत्‍ममुग्‍ध और खुद पर मर मिटने वाला. यह इतना सेल्‍फ सेंटर्ड समय है कि अगर हाथ में मोबाइल न हो, तस्‍वीरें न खींची जा रही हों तो चेहरे पर हंसी असंभव है. इन दिनों हमारे चेहरे पर हंसी तभी आती है, जब चेहरे थोड़े तिरछे किए जाएं, मुंह को थोड़ा टेढ़ा-मेढ़ा किया जाए.

Jun 23, 2017, 05:17 PM IST

डियर जिंदगी : नीम के पत्‍ते कड़वे सही पर खून साफ करते हैं...

इन दिनों भारतीय अखबार, वेबसाइट क्रिकेट टीम के कप्‍तान और कोच के विवाद से भरे हुए हैं. इसमें अब तक सामने आए तथ्‍यों से एक बात साबित हो चुकी है कि खिलाड़ी कोच के 'अधिक' अनुशासन से नाराज हैं. वह आजादी चाहते हैं. तीखे तेवरों वाले कप्‍तान, स्‍टार खिलाड़ियों को अनुशासन के प्रति आदर का भाव पसंद नहीं था.

Jun 22, 2017, 02:33 PM IST

डियर जिंदगी : 'मेरे लायक कुछ हो तो बताना...' को भूल जाना...

मेरे लायक कभी कुछ हो तो बताना. यह एक विनम्र वादा, अक्‍सर कहा जाने वाला वाक्‍य है. लेकिन हममें से कितने लोग इस वाक्‍य को ईमानदारी के साथ निभाते हैं. अक्‍सर देखा जाता है कि ज़रूरत पड़ते ही यह सुनने को मिलता है कि काश! मुझे पहले बताया होता. मैं आपके लिए कुछ कर सकता था. लेकिन अब संभव नहीं.

Jun 21, 2017, 03:01 PM IST

डियर जिंदगी : प्रेम किसी का दुश्‍मन नहीं, बस नजर 'नई' हो...

उन्‍होंने जीवन की सारी कमाई इकलौते बेटे के स्‍टार्टअप के नाम कर दी. कुछ नहीं छोड़ा, न सेविंग्स, न पीएफ, न मकान. तीन बरस बाद बेटे की कंपनी दौड़ पड़ी. अब नोएडा में शानदार ज़िंदगी जी रहे हैं, बेटे के साथ. पत्‍नी नहीं हैं, वह बेटे के जन्‍म के कुछ बरस बाद ही गंभीर बीमारी से चल बसीं थीं. इसलिए, पिता ने बेटे को पूरी तरह मां बनकर पाला.

Jun 20, 2017, 04:19 PM IST

डियर जिंदगी : आपके दोस्‍त भी तो एक जैसे नहीं हैं...

यह सवाल पहली नजर में अटपटा लग सकता है, लेकिन जिंदगी के काम का है. अगर मेरे सभी दोस्‍त मेरे जैसे ही हैं, तो इसका मतलब हुआ, मेरे पास दुनिया देखने का बस एक नजरिया है. क्‍योंकि जिनसे मैं मिलता हूं, जिनके आसपास मैं रहता हूं, उनके दिमाग का 'वायरफ्रेम' मोटेतौर पर एक जैसा हुआ. जैसे कोई इंजी‍नियर है तो उसके ज्‍यादातर दोस्‍त इंजीनियर ही होते हैं.

Jun 19, 2017, 01:20 PM IST

डियर जिंदगी : तलाक की यह चिट्ठी क्‍या कहती है...

'डियर रोशन, यह थोड़ा मुश्किल है, लेकिन हमें अलग होना ही होगा. जिंदगी में सब कुछ इतना एक जैसा हो गया है कि यह जानलेवा बोरियत में बदल गया है. एक-दूसरे को ख़ुश रखने के लिए ज़रूरत से अधिक ख्याल, खुशामद करने से शुरू हुआ सिलसिला हमारे बीच कब दीवार बन गया, पता ही नहीं चला.

Jun 16, 2017, 02:16 PM IST