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डियर जिंदगी : जीवन के गाल पर डिठौना!

सुख के बीच दुख, असुविधा की आहट, अभ्‍यास भी बेहद जरूरी है. इसके बिना सुख की अनुभूति अधूरी है.

Oct 8, 2018, 09:36 AM IST

डियर जिंदगी : मन की गांठ!

हमें उनके लिए जो हम पर निर्भर हैं, कहीं अधिक उदार होने की जरूरत है. जो सबल हैं, उनके प्रति स्‍नेह तो सहज, स्‍वाभाविक है.

Oct 5, 2018, 09:39 AM IST

डियर जिंदगी : मीठे का ‘खारा’ होते जाना

अकेलापन, केवल अकेले रहना नहीं है. यह तो उस संक्रामक विचार प्रक्रिया का ‘टिप ऑफ आइसबर्ग’ है, जो अपने साथ निराशा, दुख, ईर्ष्‍या और गहरी उदासी को साथ लिए चलता है.

Oct 4, 2018, 09:20 AM IST

डियर जिंदगी : रिश्‍ते की ‘कस्‍तूरी’ और हमारी खोज!

तय करिए कि हमारा स्‍नेह, प्रेम और आत्‍मीय उस मोबाइल, गैजेट्स के लिए है, जिसे हमने बनाया है या उनके लिए है, जिन्‍हें हमने बनाया है. जिनसे हम बने हैं!

Oct 3, 2018, 09:10 AM IST

डियर जिंदगी : खुद को कितना जानते हैं!

हमें दुनिया को जानने के मिशन, दावों पर निकलने से पहले अपने बारे में निश्‍चित होने की जरूरत है. हमारे सुख, प्रसन्‍नता, ‘जीवन -आनंद’ के सारे रास्‍ते यहीं से होकर जाते हैं.  

Oct 2, 2018, 07:47 AM IST

डियर जिंदगी : ‘पहले हम पापा के साथ रहते थे, अब पापा हमारे साथ रहते हैं…’

वह सभी रिश्‍ते जिनसे हमारा ‘कुटुंब’ बनता है, माता-पिता जितने ही मूल्‍यवान हैं. बच्‍चों की शिक्षा जरूरी है, लेकिन अगर उस शिक्षा में मूल्‍य नहीं हैं, मनुष्‍य की कद्र, रिश्‍तों की ऊष्‍मा नहीं है, तो बच्‍चा ‘मशीन‘ बनेगा, मनुष्‍य नहीं! मशीन प्रेम नहीं करती, बस वह प्रेम का भरम बनाए रखने वाली चीजें बनाती है.

Oct 1, 2018, 08:50 AM IST

डियर जिंदगी : कह दीजिए, मन में रखा बेकार है…

कुछ अनकहा मत रखिए, इससे रिश्‍ते सुंदर, स्‍वस्‍थ और मन हल्‍का रहेगा!

Sep 28, 2018, 08:36 AM IST

डियर जिंदगी : ‘बड़े’ बच्‍चों को भी चाहिए प्रेम

बच्‍चा कितना ही बड़ा हो जाए, माता-पिता के लिए बच्‍चा ही है. और उसके बच्‍चा बने रहने में कोई गलती नहीं, वह बस थोड़े से स्‍नेह का स्‍पर्श ही तो मांग रहा है.

Sep 27, 2018, 10:02 AM IST

डियर जिंदगी : ‘फूल बारिश में खिलते हैं, तूफान में नहीं…’

हौसले की जरूरत केवल हिंद महासागर में नहीं होती. हर दिन की जिंदगी इससे कम मुश्किल वाली नहीं होती. हमारे आसपास बिखरा तनाव, निराशा और डिप्रेशन समुद्री तूफान जितना ही जानलेवा है.

Sep 26, 2018, 09:30 AM IST

डियर जिंदगी : तुम आते तो अच्‍छा होता!

जब सपनों की शहर में आपके पांव अच्‍छी तरह जम जाएं तो होता यह है कि अपनों की बातें आप तक पहले तो पहुंचती ही नहीं और पहुंच भी जाए तो अच्‍छी बात भी ‘कड़वी’ लगने लगती है.

Sep 25, 2018, 09:35 AM IST

डियर जिंदगी : दुख का संगीत!

अपने भीतर एक ऐसी दुनिया का निर्माण हम करते जाते हैं, जो हमसे ही लडऩे के लिए, हमें ही हराने के लिए कमर कसे हुए हैं.

Sep 24, 2018, 08:45 AM IST

डियर जिंदगी : कितना सुनते हैं!

जब हमें गुस्‍सा दिलाने के लिए अब शब्‍दों की जगह आंख भर से काम हो जाए तो हमें समझना होगा कि हम कितने गंभीर स्‍तर पर पहुंच गए हैं! हम अंदर से इतने उबल रहे हैं कि ‘तापमान’ में जरा सा बदलाव हमारे गुस्‍से को ज्‍वालामुखी में बदल देता है.

Sep 21, 2018, 09:57 AM IST

डियर जिंदगी : जब बच्‍चों के नंबर 'कम' आएं...

स्‍कूल बच्‍चों के रिजल्‍ट को 'सेल' करके नई फ्रेंचाइजी बनाने में व्‍यस्‍त हैं. उनका बच्‍चों पर से ध्‍यान पूरी तरह गायब है.

Sep 20, 2018, 07:31 AM IST

डियर जिंदगी : बच्‍चों के निर्णय!

दिलों में प्रेम तो है लेकिन वह रिवाजों के जाल में कहीं बंध गया है. ऐसे में थोड़े सा स्‍नेह जिंदगी के सारे तनाव को बिसार सकता है. 

Sep 19, 2018, 09:13 AM IST

डियर जिंदगी : बच्चों के प्रति नजरिया…

आपसे विनम्र अनुरोध है कि अपने बच्‍चों की परवरिश से दुविधा, अनिर्णय, कठोरता और अपने ‘भोगे’ को हमेशा के लिए बाहर कर दें.

Sep 18, 2018, 08:40 AM IST

डियर जिंदगी : बच्‍चे के मन में क्‍या है…

बच्‍चे का जीवन सबसे मूल्‍यवान है, उससे बढ़कर आपके लिए कुछ नहीं. न समाज, न कोई परीक्षा और न ही कोई रिजल्‍ट आपके और बच्‍चे के बीच आना चाहिए.

Sep 17, 2018, 08:07 AM IST

डियर जिंदगी : ‘बलइयां’ कौन लेगा…

बलइयां लेने का अर्थ जो न समझ रहे हों, उनके लिए बस इतना ही कि हमसे बड़े, हमारे हितकारी ऐसे लोग जो हमें हर बला (मुसीबत) से दूर रखने का काम करते थे.

Sep 14, 2018, 08:11 AM IST

डियर जिंदगी : कोमल मन के द्वार…

कोमलता की खोज में बहुत इधर-उधर भटकने की जरूरत नहीं, वह तो ऐसी सरल चीज है तो खामोशी से आपके भीतर रहती है, बस उसे सुनने और समझने की जरूरत होती है.  

Sep 13, 2018, 09:12 AM IST

डियर जिंदगी : 'अलग' हो जाइए, पर जिंदा रहिए...

हम बाहरी दुनिया, गरीबी, कड़ी मेहनत से नहीं टूटते, लेकिन जैसे ही दस-बाई-दस के कमरे में तनाव पति-पत्‍नी, मित्र, प्रेमी-प्रेमिका से लिपटता है, तो उसकी पकड़ से निकलना मुश्किल हो जाता है. क्‍यों! 

Sep 12, 2018, 09:35 AM IST

डियर जिंदगी : ‘दुखी’ रहने का निर्णय!

एक बार दुखी रहने का निर्णय लेते ही हम ‘निर्दोष’ दुखी होते जाते हैं. यानी बिना किसी के ‘दोष’ के. रोजमर्रा की छोटी-छोटी बातों, चीजों में हम दुख तलाशने निकल जाते हैं.

Sep 11, 2018, 08:59 AM IST