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डियर जिंदगी : 'क्‍या गम है, जो मुझसे छुपा रहे हो…'

एक-दूसरे से खुलकर दिल की बातें कहने का हुनर अभी हम नहीं सीख पाएं हैं. इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि हम खुलकर आसानी से अपने दिल का ‘हाल’ एक-दूसरे से बयां नहीं करते.

Aug 10, 2018, 08:19 AM IST

डियर जिंदगी: किसी के साथ होने का अर्थ...

अगर हम अपने कहे पर कायम हैं, तो यह बात अंतत: हमारे पक्ष में ही जाती है, क्‍योंकि ऐसा करके हम अपने समीप एक ऐसी दुनिया रच रहे हैं, तो एक-दूसरे के प्रति कृतज्ञ  है.

Aug 9, 2018, 07:39 AM IST

डियर जिंदगी : यादों का डस्‍टबिन!

हर बरस की अगर पांच-पांच बातें भी दिमाग में जमी रह गईं और आपकी उम्र कम से कम तीस-चालीस बरस है तो सोचिए कितनी यादें दिल, दिमाग और चेतन-अवचेतन मन पर अमरबेल की तरह पसरी हैं.

Aug 8, 2018, 08:27 AM IST

डियर जिंदगी : सुखी होने को क्‍या चाहिए…

भारत का सबसे बड़ा रोग यही है, ‘लोग क्‍या कहेंगे.’ जबकि लोग अक्‍सर कुछ नहीं कहते. जिसके पास आपके दुख में खड़े होने की शक्ति नहीं, उसके कहने से हम इतना क्‍यों डरते हैं.

Aug 7, 2018, 07:46 AM IST

डियर जिंदगी : ‘मैं' ही सही हूं!

कठोर होना है तो अपने प्रति होइए. उदार होना है तो दूसरों के प्रति. सारी समस्‍या की जड़ इस सरल नियम का उल्‍टा होते जाना है.

Aug 6, 2018, 08:11 AM IST

डियर जिंदगी : तुम समझते/समझती क्‍यों नहीं...

पति और पत्‍नी इस दुनिया में एक-दूसरे को छोड़कर बाकी सबको समझने योग्‍य मानते हैं! ऐसा क्‍या है इस रिश्‍ते में, जो उल्‍लास, आनंद, खुशी के ख्‍वाब से आरंभ होता है, वह कुछ ही दिनों में हिचकोले खाने लगता है.

Aug 3, 2018, 07:31 AM IST

डियर जिंदगी: दिल के रिश्‍ते ‘दिमाग’ से नहीं सुधरते…

यहां बच्‍चे को जरा सी खरोच, चोट, बुखार पर डॉक्‍टर को दिखाने का रिवाज है, लेकिन हम मन से भी बीमार हो सकते हैं. इसकी ओर किसी का ध्‍यान नहीं...

Aug 2, 2018, 07:32 AM IST

डियर जिंदगी: ‘छोटा’ होता मन…

परिवार, मित्र ऐसे व्‍यक्‍ति को दिन-रात समझाने में जुटे रहते हैं, जो हमेशा सबकी मदद के लिए तैयार रहता हो! उसे ‘करेक्‍ट’ करने की कोशिश की जाती है कि दूसरों के चक्‍कर में कहां पड़े रहते हो.

Aug 1, 2018, 07:46 AM IST

डियर जिंदगी: क्‍यों आत्‍महत्‍या कर रहे हैं ‘बड़े’ लोग…

 हमेशा 'हिसाब' में डूबे रहने वाले  अक्‍सर तनाव की छोटी नहर में भी डूब जाते हैं.  जिंदगी की नदी का मिजाज समझिए. हमेशा दूसरों से कुछ हासिल कर लेने, उनका उपयोग करने की चाहत से ऊपर उठिए.

Jul 31, 2018, 07:39 AM IST

डियर जिंदगी: डर से कौन जीता है!

डर एक ऐसी अंधेरी 'सुरंग' है, जिससे बाहर निकलने के दरवाजे पर बड़ी चट्टान रखी हुई है. जिसे बाहर से नहीं हटाया जा सकता, उसे केवल ‘भीतर’से हटाना संभव है.

Jul 30, 2018, 08:03 AM IST

डियर जिंदगी: खुश नहीं हैं, तो बताना चाहिए…

समय की नाव तो हमें, संबंधों को नए, अ‍लग तटों की यात्रा कराना चाहती है, लेकिन हम भीतर के विरोध से इतने भरे हैं कि ‘चश्‍मे’ के आगे कुछ देखना ही नहीं चाहते! 

Jul 27, 2018, 10:07 AM IST

डियर जिंदगी : बच्‍चे, कहानी और सपने…

‘कहानी खत्‍म हो गई है, क्‍या! कहीं मिलती नहीं. बच्‍चे जिद करते हैं कि कहानी सुनाओ, लेकिन हम तो सारी कहानियां भूल गए हैं, बच्‍चों को कहां से सुनाएं.’

Jul 26, 2018, 08:12 AM IST

डियर जिंदगी: ‘अपने’ मन से दूरी खतरनाक!

हमने यह तो पढ़ा, लिखा और सुना है कि मन चंचल है. मन पागल है. मन मनमौजी है, लेकिन हमारा मन हमसे दूर हो गया! भला यह क्‍या बात हुई…

Jul 25, 2018, 07:49 AM IST

डियर जिंदगी : अनचाही ख्‍वाहिश का जंगल होने से बचें...

मनुष्‍य बने रहने के लिए. जिंदगी को ख्‍वाहिश का जंगल बनने से बचाना होगा. हमेशा ख्‍वाहिश के पीछे दौड़ते रहने से जिंदगी का स्‍वाद कैसे मिलेगा, जिसके लिए पचास तरह के प्रयास किए जा रहे हैं.

Jul 24, 2018, 07:28 AM IST

डियर जिंदगी : कड़ी धूप के बीच ‘घना’ साया कहां है…

हर व्‍यक्‍ति के लिए उसका ‘घना’ साया अलग-अलग लोग हो सकते हैं. जैसे सचिन तेंदुलकर के लिए उनका ‘घना’ साया उनके भाई अजित तेंदुलकर थे. कवि नीरज के लिए एसडी वर्मन थे.

Jul 23, 2018, 07:42 AM IST

डियर जिंदगी : वह ख़त क्‍या हुए…

हमने सोचा था जैसे चिट्ठी अल्‍फाज के बहाने जज्‍बात बयां कर देती थी, वही काम एसएमएस, व्‍हाट्सअप कर देगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. इनसे प्रेम की जगह गुस्‍सा बयां हो रहा है. 

Jul 20, 2018, 08:14 AM IST

डियर जिंदगी: काश! से बाहर निकलें…

अतीत की गलियां हमारा सबसे प्रिय आश्रय हैं. वर्तमान के आंगन में जरा सी धूप आते ही हम हम अतीत की गलियों में दुबकने लगते हैं. 

Jul 19, 2018, 08:13 AM IST

डियर जिंदगी: सबकुछ सुरक्षित होने का ‘अंधविश्‍वास'

हमारी सोच-समझ और विश्‍वास धीमे-धीमे बनते हैं, लेकिन उनकी जड़ें बरगद जैसी होती हैं. एक बार उनके बन जाने पर मनुष्‍य की चेतना में परिवर्तन लगभग असंभव जैसा होता है. 

Jul 18, 2018, 09:14 AM IST

डियर जिंदगी: बस एक दोस्‍त चाहिए, जिससे सब कहा जा सके...

कम से कम एक दोस्‍त, हमख्‍याल बनाइए, जिससे सबकुछ कहा जा सके. जो हर हाल में आपके साथ रहे. भले दुनिया मुंह फेर ले. भले कोई आवाज न दे. लेकिन उसके पास आपकी आवाज सुनने का वक्‍त रहे और आप तक उसकी आवाज आती रहे!

Jul 17, 2018, 07:21 AM IST

डियर जिंदगी : आत्‍महत्‍या 'रास्‍ता' नहीं, सजा है…

जीवन संघर्ष, तनाव, रिश्‍ते से दुखी, अपराधबोध से भीगे मन तेजी से आत्‍महत्‍या की ओर बढ़ रहे हैं. बाहर से सफल, सुखी दिखने वाले मन के भीतर उमड़-घुमड़ रहे डिप्रेशन और अकेलेपन को समझना सहज नहीं.

Jul 16, 2018, 07:30 AM IST