dr vijay bahadur singh

नामवर सिंह स्मृति: 'आलोचना वाद भी है, विवाद और संवाद भी'

यों तो हिंदी के प्राय: सभी बड़े लेखक और आलोचक गांवों से ही चलकर आए हैं पर रामविलास शर्मा और नामवर जी के बोल-व्यवहार और लहजे में गांव शायद ही कभी अनुपस्थित रहा हो.

Feb 20, 2019, 02:40 PM IST

कृष्णा सोबती: स्त्री की आजादी और साहित्यकार के संघर्ष की लंबी कहानी

रेणु की तरह कृष्णा जी अपने उस जमाने की उपज हैं जिसकी मिट्टी और पानी से उनका जीवन सजा-संवरा है. यह कृतज्ञता इतनी गहरी है कि वे बार-बार उसका कर्ज चुकाने को उद्यत जैसी रहती हैं, ठीक रेणु की तरह.  

Jan 27, 2019, 11:13 AM IST

प्रेमचंद: वे केवल लेखक नहीं एक सांस्कृतिक मशाल थे...

हमें इस बात पर गर्व करना चाहिए कि प्रेमचंद केवल हिंदी और हिंदुस्तान के ही महान लेखक नहीं हैं. उर्दू भाषी पाकिस्तान के भी हैं. आखिर वे कौन-से कारण हैं कि राष्ट्रीय राजनीति में एक-दूसरे से त्रस्त देशों में प्रेमचंद उसी तरह स्वीकृत और मान्य हैं जिस तरह मीर-ग़ालिब और फैज या फिर मंटो.

Jul 31, 2018, 12:56 PM IST

अमृतलाल वेगड़ : चला गया नर्मदा का एक और प्रेमी

वेगड़ जी हम लेखकों की तरह नहीं थे. न ही छायावादियों जैसे स्वप्नदर्शी और स्वप्नजीवी ही. तब भी उनके पास सपने तो थे, जिन्हें वे उसी जीवन को मथकर उसी में रमकर निकालते थे.

Jul 7, 2018, 11:09 AM IST