Delhi Bomb Blast: दिल्ली ब्लास्ट की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है. गिरफ्तार डॉक्टरों ने पुलिस की नजर से बचने के लिए 'Dead Drop' ईमेल तकनीक का इस्तेमाल किया. इसमें मैसेज भेजे नहीं जाते हैं बल्कि ड्राफ्ट में छोड़ दिए जाते हैं. इस गुप्त तरीके से वे आतंक गतिविधियों की प्लानिंग करते थे. जांच में टेलीग्राम, थ्रीमा और भारी मात्रा में विस्फोटक भी मिले हैं.
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Delhi Bomb Blast: दिल्ली में 10 नवंबर को लाल किले के पास हुए ब्लास्ट के मामले में जांच कर रहे सुरक्षा सूत्रों ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है. जांचकर्ताओं का मानना है कि इस आतंकी हमले की साजिश रचने वाले संदिग्धों ने एक खास तकनीक का इस्तेमाल किया, जिसे 'डेड ड्रॉप' ईमेल (Dead Drop Email) कहा जाता है. इस ब्लास्ट में एक i20 कार के फटने से करीब 13 लोगों की मौत हुई थी और लगभग दो दर्जन लोग घायल हुए थे. इस मामले में डॉक्टर मुजम्मिल शकील, उमर मोहम्मद और शहीद सईद सहित कई डॉक्टरों पर पुलिस की पैनी नजर है और माना जा रहा है कि इन्हीं लोगों ने अपनी आतंकी गतिविधियों को अंजाम दिया.
आखिर क्या है 'Dead Drop' ईमेल तकनीक?
आतंकवादी और जासूसी नेटवर्क अक्सर अपनी डिजिटल पहचान छिपाने के लिए इस खतरनाक 'डेड ड्रॉप' तकनीक का इस्तेमाल करते हैं. संदिग्धों ने एक ही ईमेल अकाउंट का इस्तेमाल किया. वे अपना मैसेज 'Drafts Folder' में टाइप करके सेव कर देते थे, लेकिन उसे कभी भी भेजते नहीं थे. दूसरा साथी उसी अकाउंट में लॉगिन करके ड्राफ्ट में सेव किए गए मैसेज को पढ़ लेता था.
हालांकि संदेश कभी सर्वर से भेजा ही नहीं जाता है इसलिए इसका डिजिटल फुटप्रिंट ट्रेस करना बेहद मुश्किल हो जाता है. जांचकर्ताओं के मुताबिक, इन संदिग्धों ने निगरानी से बचने के लिए थ्रीमा (Threema) और टेलीग्राम (Telegram) जैसे दूसरे और अनट्रेसेबल प्लेटफॉर्म का भी इस्तेमाल किया था.
पाकिस्तान से लिंक और साजिश का खुलासा
जांच में पता चला है कि ये डॉक्टर संदिग्ध पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammad) आतंकी ग्रुप से जुड़े एक मॉड्यूल से जुड़े हो सकते हैं. उमर मोहम्मद को विस्फोट करने वाली i20 कार का ड्राइवर होने की पुष्टि हुई है. बाकी दो डॉक्टर, मुजम्मिल शकील और शहीद सईद, ब्लास्ट से ठीक पहले गिरफ्तार किए गए थे, जिसके बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस ने इस मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया था.
छापेमारी के दौरान दिल्ली के पास उनके किराए के ठिकानों से लगभग 3,000 किलोग्राम विस्फोटक और बम बनाने का सामान भी मिला था. सईद की कार से एक राइफल और गोला-बारूद भी बरामद हुआ था.
सूत्रों ने पहले बताया था कि आरोपियों ने अल फलाह यूनिवर्सिटी में मुजम्मिल के कमरे में गुप्त बैठकों के दौरान दिल्ली में ब्लास्ट की योजना बनाई थी. ऐसा माना जाता है कि अपने साथियों की गिरफ्तारी के बाद घबराहट में मोहम्मद ने यह ब्लास्ट कर दिया.
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