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क्या आपके बच्चे को भी है फोन की लत, तो हो जाए सावधान!

बच्चों के लिए टचस्क्रीन बहुत नुकसानदायक है. इससे उनकी अंगुलियों की मांसपेशियां प्रभावित होती हैं और एक एक स्टडी के मुताबिक के मुताबिक बच्चों को पेन, पेंसिल पकड़ने में मुश्किल आ रही है. 

क्या आपके बच्चे को भी है फोन की लत, तो हो जाए सावधान!
फोन के ज्यादा इस्तेमाल की वजह से हाथों की मांसपेशियां कमजोर हो रही हैं (प्रतीकात्मक तस्वीर)

लंदन: बचपन एक ऐसी उम्र होती है, जब बगैर किसी तनाव के मस्ती से जिंदगी का आनन्द लिया जाता है. जीवन में रंग भरने, जिंदगी का ककहरा सीखने की एक ऐसी उम्र जहां कल की कोई चिंता नहीं होती. लेकिन हमारी स्मार्ट जेनरेशन ने बचपन को खत्म सा कर दिया है. स्मार्टफोन और टैबलेट हमारी जिंदगी में इस कदर शामिल हो चुके हैं कि इनके बिना अब जीवन मुश्किल लगता है. क्या कभी आपने सोचा है कि आज आपके बच्चों का वो बेखौफ बचपन कहीं खो गया है? क्या आप जानते हैं कि टचस्क्रीन जेनरेशन आने वाले समय में आपके बच्चों के लिए कितनी बड़ी समस्या खड़ी कर सकते हैं. 

स्मार्ट फोन कर रहे हैं हाथों की मांसपेशियां कमजोर 
एक स्टडी के मुताबिक, बच्चों की टचस्क्रीन जेनरेशन पेंसिल पकड़ने, ड्रॉइंग करने तक में कमजोर हो रही है. फोन के ज्यादा इस्तेमाल की वजह से बच्चे परंपरागत खेलों या एक्टिविटी से दूर हो रहे हैं. इससे उनके हाथों की मांसपेशियां कमजोर हो रही हैं और उन्हें पेंसिल तक पर ग्रिप बनाने में समस्या आ रही है.

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बच्चों के लिए खिलौना हुआ स्मार्टफोन
इंग्लैंड के नेशनल हैंडराइटिंग एसोसिएशन की एक रिसर्च से सामने आए हैं. रिसर्च के मुताबिक अब कम उम्र में ही बच्चे मोबाइल, टैबलेट या अन्य गैजेट्स के संपर्क में आ जाते हैं. 2 साल से कम उम्र के 58% बच्चे मोबाइल से खेलते हैं. पहले ऐसा नहीं था.

देर से सीख रहे हैं पैंसिल पकड़ना
इंग्लैंड के नेशनल हैंडराइटिंग एसोसिएशन की रिसर्च में बताया गया है कि तकनीक के अत्याधिक इस्तेमाल के चलते कई बच्चों में लिखने का हुनर देर से विकसित हो रहा है. इसका सीधा असर बच्चों की हैंडराइटिंग पर भी पड़ रहा है. 

आउटडोर गेम को भूल गए बच्चे
पहले बच्चे गेम्स खेलते थे, इनडोर गेम्स के साथ बच्चों का आउटडोर गेम्स खेलने का भी समय होता था लेकिन अब मोबाइल फोन पर खेलने के वजह से टचस्क्रीन जेनरेशन तैयार हो रही है, जिसमें फंडामेंटल मूवमेंट स्किल कम हो रही है. इसका असर तब दिखता है, जब 2-3 साल की उम्र में बच्चे स्कूल जाते हैं. 

परेंस्ट्स बच्चों के साथ हो और एक्टिव 
इस समस्या से बचने के लिए परेंस्ट्स को थोड़ा और ज्यादा एक्टिव होना पड़ेगा. बच्चों को ब्लॉक बनाने, खिलौने या रस्सियां खींचने जैसे मांसपेशियां बनाने वाले खेल खेलने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए ताकि बच्चों की का ध्यान थोड़ा से डाइवर्ट हो.