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नवरात्रि 2019: 2 हजार फीट ऊंची पहाड़ी पर विराजित हैं मां बमलेश्वरी, 2200 साल पुराना है इतिहास

प्रमाणों के आधार पर ये कहा जाता है कि पूर्व मे डोगरगढ़ ही वैभवशाली कामख्या नगरी कहलाती थी, लेकिन मां बमलेशवरी देवी के इतिहास को लेकर कोई स्पष्ट तथ्य सामने नहीं आए हैं.

नवरात्रि 2019: 2 हजार फीट ऊंची पहाड़ी पर विराजित हैं मां बमलेश्वरी, 2200 साल पुराना है इतिहास

राजनांदगांवः राजनांदगांव जिला मुख्यालय से चालीस किलोमीटर पश्चिम की ओर बसा है डोंगरगढ़. यहां विराजित हैं मां बम्लेशवरी देवी. मां बमलेश्वरी छतीसगढ़ राज्य की सबसे उंची चोटी पर विराजित हैं. डोंगरगढ़ स्थित मां बमलेश्वरी देवी का इतिहास काफी पुराना है. डोंगरगढ से प्राप्त भग्नावेशों से मिली जानकारी के मुताबिक यहां का इतिहास लगभग 2200 साल पुराना है. डोंगरगढ़ में प्राचीन कामावती नगरी के प्रमाण मिले हैं. इन प्रमाणों के आधार पर ये कहा जाता है कि पूर्व मे डोगरगढ़ ही वैभवशाली कामख्या नगरी कहलाती थी, लेकिन मां बमलेशवरी देवी के इतिहास को लेकर कोई स्पष्ट तथ्य सामने नहीं आए हैं. हालांकि, डोंगरगड् मंदिर के संदर्भ मे मिली कुछ पुरानी पुस्तकों के अनुसार यहां का इतिहास मध्य प्रदेश के उज्जैन से जुड़ा हुआ भी मिलता है.

मां बम्लेश्वरी देवी को बगला मुखी देवी के रूप मे भी जाना जाता है. नवरात्रि मे माता का वैभवशाली रूप देखते ही बनता. इतिहासकारों और विद्वानों ने इस क्षेत्र को कलचुरी काल का भी पाया है, लेकिन अन्य उपलब्ध सामग्री जैसे जैन मूर्तियां यहां दो बार मिल चुकी हैं. इसके अलावा भी कुछ मूर्तियां, गहने उनके वस्त्र आभूषण और मस्तक ले लंबे बालों की सूक्ष्म अध्ययन करने पर विद्वान इस क्षेत्र की मूर्ति कला को गौंड कला का प्रमाण भी मानते हैं.

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इसके अलावा माता के इतिहास को लेकर काफी कहानियां भी प्रचलित हैं. ऐतिहासिक नगरी डोंगरगढ़ में माता के दो रूप विश्व प्रसिद्ध हैं. एक मंदिर 2 फीट उंची पहाड़ी पर विराजित हैं, जहां बड़ी बम्लेश्वरी माता विराजित हैं और नीचे समतल पर छोटी माता के नाम से विख्यात हैं. उंची पहाड़ी पर विराजित माता के दर्शन के लिए पूर्व मे पहाड़ी रास्ते का ही इस्तेमाल होता था, लेकिन माता की ख्याति बढ़ने के साथ-साथ यहां सुविधाओं का विकास शुरू हो गया.

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साल 1974 में जिले की खैरागढ़ रियासत के राजा विरेंद्र बहादुर सिंह ने यहां एक ट्रस्ट की स्थापना कर दी. इससे पहले मंदिर मे खैरागढ़ राज परिवार के बैगा यहां माता की पूजा अर्चना किया करते थे. डोंगरगढ़ और मां बम्लेशवरी के इतिहास के बारे में यहां के मुख्य पुजारी युवराज शर्मा की जानकारी के अनुसार यहां का इतिहास बेहद प्राचीन है. वहीं प्राकृतिक खूबसूरती और बढ़ती प्रसिद्धि के कारण साल दर साल यहां आने वाले श्रद्धालुओं की तादाद मे इजाफा होता जा रहा है.