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राजस्थान को फेवरेट डेस्टीनेशन के तौर पर चुना गया, होगा पर्यटन राज्य के रूप में विकास

'पधारो म्हारे देश' से शुरू हुआ सफर 'जाने क्या दिख जाए' तक पहुंच कर वापस 'पधारो म्हारे देश'' पर आ गया है. राजस्थान, देश में शुरू से पर्यटन का पायोनियर रहा है.

राजस्थान को फेवरेट डेस्टीनेशन के तौर पर चुना गया, होगा पर्यटन राज्य के रूप में विकास
फाइल फोटो

दामोदर प्रसाद, जयपुर: केंद्र की मोदी सरकार ने राजस्थान को मोस्ट फेवरेट डेस्टीनेशन के तौर पर चुना है. अब राजस्थान को देश के अव्वल पर्यटन प्रदेश के तौर पर विकसित किया जाएगा. राजे सरकार ने केंद्र से पांच सर्किट मंजूर कराए थे और अब गहलोत सरकार द्वारा प्रस्तावित चार सर्किट को इस वर्ष के अंत तक मंजूरी मिल जाएगी. कुल 1178 करोड़ के इन सर्किट्स से 'राजस्थान पर्यटन' की दिशा और दशा बदलने वाली है. 

'पधारो म्हारे देश' से शुरू हुआ सफर 'जाने क्या दिख जाए' तक पहुंच कर वापस 'पधारो म्हारे देश'' पर आ गया है. राजस्थान, देश में शुरू से पर्यटन का पायनियर रहा है. बीच के वर्षों में आधारभूत ढांचे के विकास में पिछड़ने से राजस्थान पर्यटन ने अपना अव्वल दर्जा खो दिया था. अब केंद्र में मोदी और प्रदेश में गहलोत सरकार बनने के बाद 'पर्यटन' को एक बार फिर से प्राथमिकता पर रखा गया है. राज्य से केंद्र को 3 साल पहले चार सर्किट्स के प्रस्ताव भेजे गए जिन्हें केंद्र ने मंजूर कर लिया था. सबसे पहले स्वदेश दर्शन योजना के तहत सांभर में 'सॉल्ट ट्यूरिजम' का 64 करोड़ का प्रोजेक्ट मंजूर हुआ. 

इसके बाद अजमेर-पुष्कर में 40 करोड़ का प्रोजेक्ट प्रसाद योजना में मंजूर किया गया. इसके बाद 91 करोड़ का कृष्णा सर्किट और 95 करोड़ का स्प्रिचुअल सर्किट मंजूर हुआ. इसके बाद 100 करोड़ का हैरिटेज सर्किट मंजूर किया गया है. पर्यटन विभाग के अनुसार प्रदेश की जीडीपी में पर्यटन का योगदान बढ़ाना है. सर्किट्स की मंजूरी से प्रदेश के पर्यटन उत्पादों को यूनीक फीचर के साथ सामने लाना है. 

केंद्र राजस्थान को सबसे अहम पर्यटन राज्य मानता है. अब राज्य ने केंद्र को 438 करोड़ का रिलीजियस सर्किट, 100-100 करोड़ के मेगा डेज़र्ट, इको ट्यूरिज्म और ट्राइबल सर्किट के प्रस्ताव दोबारा भेजे हैं. केंद्र की टीम ने इन्हें सैद्धांतिक तौर पर मंजूर कर लिया है. माना जा रहा है कि इस वर्ष के अंत तक इनके लिए 738 करोड़ रुपए की मंजूरी मिल जाएगी. 

दरअसल, पिछली भाजपा सरकार में सीएम राजे ने मुख्यमंत्री सलाहकार परिषद की बैठक में प्रदेश की जल, वन, पुरासंपदा को दुनिया के सामने लाने के लिए पर्यटन सर्किट्स के प्रस्ताव बनाने के निर्देश दिए थे. इसके बाद से ही तमाम सर्किट्स का खाका तैयार किया गया. प्रदेश में सरकार बदलने और गहलोत सरकार के काबिज होने के बाद पर्यटन के तौर तरीके बदले हैं. पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह की अगुवाई में विभाग ने नए सिरेे से प्रस्ताव केंद्र को भेजे हैं.

इन सर्किट्स में वन, नदी, झील, मंदिर, अन्य धार्मिकस्थल, पुरास्मारक, गांव, हस्तशिल्प, व्यंजन, किले, महल, बावड़ी सहित मेले और उत्सवों तक को शामिल किया गया है. मेवाड़ और मारवाड़ सर्किट के भी प्रस्ताव केंद्र को भेजे हैं. सांभर और अजमेर-पुष्कर प्रोजेक्ट पर काम भी पूरा हो चुका है. ऐसे में आने वाले दो वर्षों में राजस्थान पर्यटन का कलेवर कुछ ओर ही होगा और एक बार जो पर्यटक यहां आएगा वो बार बार आने को आतुर होगा. केंद्र से मिली राशि के बाद अब राज्य में 1178 करोड़ की लागत से तमाम सर्किट्स का विकास होगा. खासकर यहां आधुनिक सुविधाओं के साथ ही पर्यटकों को उम्मीद से अधिक देखने को मिलेगा. ऐसे में अगले दो वर्ष में राजस्थान फिर से देश में अव्वल पर्यटन राज्य बन सकता है.