किसी कुदरती करिश्मे से कम नहीं हैं ये जगहें, Lockdown खत्म होने के बाद जरूर करें प्लान

इस दुनिया में बहुत-सी ऐसी जगहें हैं, जो किसी कुदरती करिश्मे से कम नहीं हैं.

किसी कुदरती करिश्मे से कम नहीं हैं ये जगहें, Lockdown खत्म होने के बाद जरूर करें प्लान
एसबिर्गी कैन्‍यन, आइसलैंड

नई दिल्ली: इस दुनिया में बहुत-सी ऐसी जगहें हैं, जो किसी कुदरती करिश्मे से कम नहीं हैं. आइसलैंड में घोड़े की नाल की तरह दिखने वाली घाटी एसबिर्गी हो या फिर बोलिविया में नमक का सबसे बड़ा मैदान सालार दे उयूनी, ये जगहें आम दिनों में पर्यटकों को खूब आकर्षित करती हैं. भले ही अभी लॉकडाउन की वहज से इन जगहों की सैर नहीं कर पाएं, लेकिन भविष्य की अपनी ट्रैवल योजनाओं में इसे जरूर शामिल कर सकते हैं. आखिर ऐसा क्या है यहां, जो पर्टयकों को आकर्षित करता है...

एसबिर्गी कैन्‍यन, आइसलैंड (ASBYRGI CANYON)
उत्तरी आइसलैंड में स्थित यह घाटी किसी कुदरती चमत्कार से कम नहीं है. आसमान से देखने पर यह घोड़े की नाल की तरह दिखाई देती है. यहां इसे  देवताओं का घर भी कहा जाता है.  घाटी को लेकर मान्‍यता  है कि यहां के एक भगवान के घोड़े का खुर जमीन पर पड़ने से यह घाटी अस्तित्‍व में आई।

वैसे, इस घाटी की 300 फीट लंबी चट्टानें दिखने में किसी अजूबे से कम नहीं लगतीं.  यह आइसलैंड दो मील लंबा और आधा मील चौड़े क्षेत्र में फैला हुआ है. हालांकि भूवैज्ञानिकों का मानना है कि पास के ही जोकुल्सा हिमनद नदी में आई भयावह बाढ़ के कारण यह अस्तित्व में आया था, लेकिन आज भी जब आप इसके ऊपरी चट्टानी सिरे को देखेंगे, तो यह घोड़े के खुर की आकृति जैसी ही दिखती है. यह जगह वटनाजोकुल नेशनल पार्क का हिस्सा है.

यहां जलीय जीव-जंतु भी खूब देखे जा सकते हैं. इसके अंदर एक खूबसूरत तालाब भी है, जिसके आसपास अनेक प्रजाति के पक्षियों को देखा जा सकता है. सैलानी यहां सुकून, गोल्फ कोर्स और कैंपिंग के लिए आते हैं. यह ऐसा डेस्टिनेशन है, जहां के बारे में महज कल्‍पना करके ही रोमांच महसूस कर सकते हैं.

सालार दे उयूनी, बोलिविया (salar de uyuni)
दुनिया के सबसे बड़े नमक के मैदान के रूप में प्रसिद्ध सालार दे उयूनी सैलानियों को खूब आकर्षित करता है. यहां दूर-दूर तक फैले नमक की वजह से मिरर इफेक्ट पैदा होता है, जो फोटोग्राफी के शौकीनों को खूब पसंद आता है. यह बोलिविया के अल्टिप्लानो में 10,582 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है.

कहा जाता है कि करीब 30 हजार साल पहले एक पूर्वऐतिहासिक झील के सूख जाने के बाद यह पूरा क्षेत्र नमक के अवशेषों में तब्‍दील हो गया. बताते हैं कि यह जगह दुनिया का सबसे बड़ा भूभाग है, जहां इतना ज्‍यादा नमक पाया जाता है. हर साल करीब 25 हजार टन से अधिक नमक इस जगह से पैदा होता है. वैसे, यहां पक्षी प्रेमियों के लिए भी काफी कुछ है.

खासकर यहां फ्लेमिंगो बड़ी संख्या में पाई जाती हैं. सैलानियों के आकर्षण की एक वजह यहां की पैलेशिया डी साल है, जो 16 कमरों का एक होटल है और यह पूरी तरह नमक के ब्‍लाक से बना है.

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