धरती का नायाब अजूबा है ये प्‍लेस! मसाले की तरह खाई जाती है यहां की मिट्टी
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धरती का नायाब अजूबा है ये प्‍लेस! मसाले की तरह खाई जाती है यहां की मिट्टी

ईरान का होर्मोज द्वीप दुनिया के लिए एक अजूबा समान ही है. यहां की मिट्टी को मसाले के रूप में इस्तेमाल किया जाता है और सॉस भी बनाई जाती है.

धरती का नायाब अजूबा है ये प्‍लेस! मसाले की तरह खाई जाती है यहां की मिट्टी

नई दिल्ली: इस दुनिया में इतने रहस्य हैं कि अगर सुलझाने की कोशिश करने के लिए भी लिस्ट बनाओ तो उसमें ही कई जन्म लग जाएंगे. कई लोग अजूबों को देखने और जानने के इच्छुक होते हैं. ऐसी ही एक अजूबा है ईरान (Iran) का होर्मोज द्वीप (Hormuz Island). ये काफी आकर्षक है और इसे रेनबो द्वीप (Rainbow Island) के नाम से भी जाना जाता है. पारस की खाड़ी में स्थित इस रहस्यमयी द्वीप के पहाड़ों के अलावा खूबसूरत समुद्री किनारे एक अलग ही सुंदरता को दर्शाते हैं, लेकिन इसके अलावा एक और चीज है जो इस द्वीप को खास बनाती है. कहते हैं कि यहां की मिट्टी मसालेदार होती है और लोग इसका इस्तेमाल करते हैं.

चमकदार पत्थरों से घिरा डिजनीलैंड

बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार यह द्वीप अपने खनिज पदार्थों की वजह से भी जाना जाता है इसीलिए इसे भूगर्भशास्त्रियों का डिजनीलैंड (Geologist's Disneyland) भी कहा जाता है. यहां जाने वाले टूरिस्ट हमेशा सलाह देते हैं कि जब भी वहां जाने का मौका मिले तो वहां की मिट्टी जरूर चखें. यह द्वीप काफी रंगीन है और यहां कई जगह नमक के टीले भी दिखाई देते हैं जिनमें शेल, मिट्टी और लौह समृद्ध आग्नेय चट्टानों की परतें (Iron Rich Igneous Rocks) पाई जाती हैं. इन्हीं चट्टानों की परतों की वजह से यह क्षेत्र कई जगहों पर लाल पीला और नारंगी रंगों से चमकता दिखाई देता है.

फारस की खाड़ी में रंगीन भूभाग

इस द्वीप पर 70 तरह के खनिज पाए जाते हैं. लोकल गाइड्स कहते हैं कि 42 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में हर इंच की जगह की अपनी अलग कहानी है. ब्रिटिश जियोलॉजीकल सर्वे की प्रमुख भूवैज्ञानिक डॉ कैथरीन गुडइनफ जो कि पहले ईरान के साथ काम करती थीं, उनका कहना है कि करोड़ों साल पहले फारस की खाड़ी और उसके आसपास उथले सागरों में नमक की मोटी परत बन गई थी. इन परतों का धीरे धीरे आपस में टकराव हुआ और यहां की खनिज समृद्ध ज्वालामुखी धूल की परतें भी इसमें मिल गईं. जिससे यहां रंगीन भूभाग बन गया है. पहले नमक की परतें ज्वालामुखी अवसाद से ढक गईं, फिर समय के साथ नमक दरारों से ऊपर आ गया और नमक के टीले बन गए. गुडइनफ बताती हैं कि नमक की मोटी परतें जमीन में कई किलोमीटर नीचे तक धंसी हुईं हैं और फारस की खाड़ी के बड़े इलाके में फैली हैं.

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जरूर चखें रेनबो आइलैंड की मिट्टी

इस जगह की आकृति ऐसी है, जिससे यहां बहुत खूबसरत तट, पहाड़ और गुफाएं बन गई हैं. इसीलिए होरमूज को रेनबो आइलैंड भी कहते हैं. यह दुनिया का एकमात्र ऐसा द्वीप है जहां खाने योग्य पहाड़ हैं. दूर-दूर से आए हुए ट्रैवलर यहां की मिट्टी को चखने की सलाह जरूर देते रहते हैं.

मसाले और सॉस की तरह करते हैं उपयोग

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि यहां की मिट्टी मसालों की तरह उपयोग में लाई जाती है. यहां के पहाड़ों की गीलैक नाम की लाल मिट्टी, (जोकि हीमैटाइट नाम के लौह अयस्क से बनती है), के बारे में कहा जाता है कि वह आग्नेय चट्टानों से बनी है. दिलचस्प बात है कि गीलैक का उपयोग उद्योगों के अलावा स्थानीय भोजन में मसाले के तौर पर भी किया गया जाता है. इस मसाले को लोग यहां की स्थानीय ब्रेड के साथ भी खाते हैं. स्थानीय लोग बताते हैं कि यहां की लाल मिट्टी को सॉस (Sauce) की तरह भी यूज किया जाता है. इस खास सॉस को सूरखा कहते हैं. खाने के अलावा भी लाल मिट्टी कई तरह से इस्तेमाल की जाती है, जैसे कि लाल मिट्टी का प्रयोग पेंटिंग, रंगरोन, कॉस्मेटिक्स और सिरेमिक आदि में किया जाता है. माणिक लाल पहाड़ के अलावा होरमूज के पश्चिम में नमक का पहाड़ भी है. इस नमक में औषधीय गुण होते हैं.

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'ग्लोबल हैरिटेज बनना चाहिए रेनबो आइलैंड'

इतनी क्वालिटीज होने के बाद भी यह द्वीप काफी अनएक्सप्लोरड (Unexplored) है. एक आंकड़े के अनुसार साल 2019 में यहां सिर्फ 1800 पर्यटक आए थे. हालांकि स्थानीय लोगों की पूरी कोशिश रहती है कि यहां पर्यटन सुविधाएं बढ़ाई जाएं. वे इस क्षेत्र को ग्लोबल पहचान दिलाना चाहते हैं. 

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