Union Budget 2018: चिकित्सकीय यंत्रों पर आयात शुल्क बढ़ा सकती है सरकार

बजटपूर्व ज्ञापन में सरकार से अनुरोध किया गया है कि चिकित्सकीय यंत्रों पर आयात शुल्क बढ़ाकर 5-15 प्रतिशत कर दिया जाए.

Union Budget 2018: चिकित्सकीय यंत्रों पर आयात शुल्क बढ़ा सकती है सरकार

नई दिल्ली: आगामी बजट में कुछ चिकित्सकीय यंत्रों पर आयात शुल्क बढ़ाया जा सकता है ताकि घरेलू विनिर्माताओं को बढ़ावा दिया जा सके. सूत्रों ने इसकी जानकारी दी. सूत्र ने नाम जाहिर नहीं करने का अनुरोध करते हुए कहा कि इस कदम से सरकार की महत्वाकांक्षी मेक इन इंडिया मुहिम को भी प्रोत्साहन मिलेगा. एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री समेत घरेलू उद्योग जगत ने बजटपूर्व ज्ञापन में सरकार से अनुरोध किया था कि चिकित्सकीय यंत्रों पर आयात शुल्क बढ़ाकर 5-15 प्रतिशत कर दिया जाए. इसका मौजूदा दायरा 0-7.5 प्रतिशत है.

Union Budget 2018: 'सबके लिए मकान' पर जोर! आवास योजनाओं को मिल सकता है बढ़ावा

वहीं दूसरी ओर नारेडको ने कहा कि बजट में रियल एस्टेट पर जीएसटी को और अधिक तर्कसंगत बनाए जाने तथा सबके लिए मकान के लक्ष्य के मद्देनजर सस्ते आवास योजनाओं के लिए कर्ज आदि की शर्तें अधिक अनुकूल बनाए जाने की संभावना है. सरकार ने 2022 तक सबके लिए आवास का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है. आवास एवं जमीन जायदाद विकास क्षेत्र से जुड़े संगठनों ने सरकार से इस क्षेत्र को कर में सहूलियत और कर्ज सस्ता करने के सुझाव दिए हैं. रीयल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम-2016 के प्रावधानों को लागू किए जाने और नोटबंदी के प्रभावों से अब भी निकलने के लिए संघर्ष कर रहे इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने पिछले बजट में किफायती दर के मकानों की परियोजनाओं को बुनियादी ढांचा क्षेत्र का दर्जा दिया था. इसके अलावा वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मध्य आय वर्ग के मकानों पर ब्याज सहायता योजना की घोषणा की थी. यह उद्योग बिक्री और कीमतों में नरमी का सामना कर रहा है.

इस उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि आवास एवं जमीन जायदाद विकास क्षेत्र रोजगार की दृष्टि से महत्वपूर्ण है. ऐसे में उम्मीद है कि चुनावों से पूर्व अपने आखिरी बजट में वित्त मंत्री इस क्षेत्र को करों और पूंजी की दृष्टि से कुछ प्रोत्साहन दे सकते हैं. उद्योग को उम्मीद है कि बजट 2018-19 में एमआईजी आवास परियोजनाओं की विकासकर्ता कंपनियों को भी बुनियादी ढांचा विकासकर्ताओं की तरह आयकर का लाभ दिया जा सकता है.

(इनपुट एजेंसी से भी)