राजस्थान के बांसवाड़ा के बड़ोदिया गांव में 600 साल से अनोखी शादी की परंपरा चली आ रही है.
बड़ोदिया गांव में होली से एक दिन पहले दो लड़कों की आपस में पूरे विधि विधान से शादी कराई जाती है.
यह अनोखी परंपरा गांव के मुखिया के नेतृत्व में सामूहिक रूप से निभाई जाती है और पूरे समाज की भागीदारी होती है.
इस रस्म का विरोध करने वालों को हल्के सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ता है, विशेष रूप से जब वे पापड़ी भोज कराते हैं.
विवाह के लिए 9-14 वर्ष के ऐसे लड़कों को चुना जाता है, जिनका विवाह और जनेऊ संस्कार न हुआ हो.
दूल्हा-दुल्हन की प्रतीकात्मक शादी लक्ष्मीनारायण मंदिर चौक पर मंडप और वेदिका के साथ मंत्रोच्चार में करवाई जाती है.
रस्म के दौरान गैर नर्तक ढोल-थाप पर नाचते-गाते घर-घर जाकर योग्य बच्चों की तलाश करते हैं.
बच्चों और ग्रामीणों में इस रस्म को लेकर विशेष उत्साह होता है, जिसे त्योहार की तरह मनाया जाता है.
विवाह के बाद वर-वधू के घर बिनौला (शोभायात्रा) पहुंचती है, जहां लोगों को नारियल व शक्कर की मिठाई दी जाती है.