कई जगहों पर ‘सिट-स्टैंड’ डेस्क सिस्टम को अपनाया गया है, जिस पर आप लंबे समय तक बैठने के नुकसान से बचने के लिए डेस्क को बटन दबाकर ऊंचा कर सकते हैं और खड़े होकर काम कर सकते हैं.
लेकिन खड़ा होना बेहतर कैसे है? और क्या देर तक खड़े होने के भी नुकसान हैं? बहुत ज्यादा बैठने और खड़े होने के जोखिमों के बारे में रिसर्च क्या कहता है?
एक्टिव रहना अहम है. लेकिन इससे हर दिन लंबा वक्त बैठकर गुजारने के नकारात्मक असर को पूरी तरह दूर नहीं किया जा सकता. लंबे वक्त तक खड़े रहना भी नुकसानदेह है.
लंबे वक्त तक खड़े रहने से मांसपेशियों में थकान, पैरों में सूजन, पीठ के निचले हिस्से, घुटनों और टखनों में दिक्कत हो सकती है.
रिसर्च से पता चलता है कि एक बार में लगातार खड़े होने की समय-सीमा लगभग 40 मिनट तय करने से देर तक खड़े रहने से मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होने के आसार कम हो जाते हैं.
भले ही आप खड़े होने के बीच में आराम कर लेते हैं और अगर आपको पहले कभी खड़े होने से दर्द हुआ है, तो जब आप फिर खड़े होते हैं, तो आपको यह दिक्कत फिर से होने के ज्यादा आसार होते हैं.
लंबे वक्त तक खड़े रहने वाले हर शख्स को इन ‘मस्कुलोस्केलेटल’ सिम्टम्स का तजुर्बा नहीं होगा. और कुछ लोग दूसरों की तुलना में लंबे वक्त तक खड़े रहने के प्रभावों के प्रति ज्यादा लचीलापन रखने वाले हो सकते हैं.
एक्टिव रहना सबसे ज्यादा अहम है. ऑस्ट्रेलिया समेत दूसरे देशों की सरकारों और विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसी एजेंसियों के जिस्मानी गतिविधियों के ताल्लुक से हिदायत में नौजवानों को बैठने में बिताए जाने वाले वक्त को कम करने की सलाह दी जाती है.
बैठने के वक्त को कम करने और उसकी जगह एक्टिव रहने, भले ही हल्की फुल्की शारीरिक सक्रियता रखने से सेहत के ताल्लुक से फायदा होता है.