Adil Mansoori: "बच्चे बिगड़ गए हैं बहुत देख-भाल से"; आदिल मंसूरी के शेर

Published by: Siraj Mahi | May 08, 2024

तू किस के कमरे में थी... मैं तेरे कमरे में था

Published by: Siraj Mahi | May 08, 2024

फिर बालों में रात हुई... फिर हाथों में चाँद खिला

Published by: Siraj Mahi | May 08, 2024

ज़रा देर बैठे थे तन्हाई में... तिरी याद आँखें दुखाने लगी

Published by: Siraj Mahi | May 08, 2024

जो चुप-चाप रहती थी दीवार पर... वो तस्वीर बातें बनाने लगी

Published by: Siraj Mahi | May 08, 2024

कभी ख़ाक वालों की बातें भी सुन... कभी आसमानों से नीचे उतर

Published by: Siraj Mahi | May 08, 2024

चुप-चाप बैठे रहते हैं कुछ बोलते नहीं... बच्चे बिगड़ गए हैं बहुत देख-भाल से

Published by: Siraj Mahi | May 08, 2024

अल्लाह जाने किस पे अकड़ता था रात दिन... कुछ भी नहीं था फिर भी बड़ा बद-ज़बान था

Published by: Siraj Mahi | May 08, 2024

ऐसे डरे हुए हैं ज़माने की चाल से... घर में भी पाँव रखते हैं हम तो सँभाल कर

Published by: Siraj Mahi | May 08, 2024

मेरे टूटे हौसले के पर निकलते देख कर... उस ने दीवारों को अपनी और ऊँचा कर दिया

Published by: Siraj Mahi | May 08, 2024

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