Urdu Poetry: आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ

Published by: Siraj Mahi | May 15, 2024

देर

ज़िंदगी से यही गिला है मुझे... तू बहुत देर से मिला है मुझे

Published by: Siraj Mahi | May 15, 2024

बे-वफ़ा

इस से पहले कि बे-वफ़ा हो जाएं... क्यूँ न ऐ दोस्त हम जुदा हो जाएँ

Published by: Siraj Mahi | May 15, 2024

रंजिश

रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ... आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ

Published by: Siraj Mahi | May 15, 2024

बिछड़ना

हुआ है तुझ से बिछड़ने के बा'द ये मा'लूम... कि तू नहीं था तिरे साथ एक दुनिया थी

Published by: Siraj Mahi | May 15, 2024

मंज़िल

किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल... कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा

Published by: Siraj Mahi | May 15, 2024

बरस

आज इक और बरस बीत गया उस के बग़ैर... जिस के होते हुए होते थे ज़माने मेरे

Published by: Siraj Mahi | May 15, 2024

अना

अगर तुम्हारी अना ही का है सवाल तो फिर... चलो मैं हाथ बढ़ाता हूँ दोस्ती के लिए

Published by: Siraj Mahi | May 15, 2024

जिंदगी

इस ज़िंदगी में इतनी फ़राग़त किसे नसीब... इतना न याद आ कि तुझे भूल जाएँ हम

Published by: Siraj Mahi | May 15, 2024

वफा

ढूँड उजड़े हुए लोगों में वफ़ा के मोती... ये ख़ज़ाने तुझे मुमकिन है ख़राबों में मिलें

Published by: Siraj Mahi | May 15, 2024

VIEW ALL

Read Next Story