Mecca में कैसे शुरू हुई मूर्ति पूजा, कौन लाया था पहली मूर्ति?

Published by: Sami Siddiqui | Aug 31, 2025

लोगों की मोहब्बत

उस दौर के लोग इब्राहिम (अ.स.) और इस्माइल (अ.स.) से बेहद मोहब्बत करते थेस, और वह काबा जुड़े पत्थर को भी पाक मानने लगे और उसे घर ले जाने लगे.

Published by: Sami Siddiqui | Aug 31, 2025

खुदा से इबादत के बीच का जरिया

लोगों का मानना था कि काबा के पास के ये पत्थर खुदा और उनके बीच का जरिया है, इसी के जरिए दुआएं कबूल होंगी.

Published by: Sami Siddiqui | Aug 31, 2025

यहां तक की सफर या कारोबार पर जाने वाले लोग अपने साथ पत्थर रखते थे ताकि बरकत और हिफाज़त मिल सके.

Published by: Sami Siddiqui | Aug 31, 2025

धीरे-धीरे बुतपरस्ती

समय के साथ इन पत्थरों को चूमना, सजाना और उनसे मांगना बुतपरस्ती (आइडल वर्शिप) में बदल गया.

Published by: Sami Siddiqui | Aug 31, 2025

बाहर से उठा लाते पत्थर

अगर किसी को ऐसा पत्थर मिलता जो जानवर या इंसान जैसी शक्ल रखता, तो उसे घर में रखकर पूजा शुरू कर देते.

Published by: Sami Siddiqui | Aug 31, 2025

इसके बाद अरबों ने खुद पत्थरों को काट-छांटकर उन्हें शक्ल देना शुरू किया और उन्हें देवता/बुजुर्गों से जोड़कर इबादत करने लगे.

Published by: Sami Siddiqui | Aug 31, 2025

अरब में पहली मूर्ति

अरब में पहली मूर्ति 'हुबल' की लाई गई. इसे अम्र-बिन-लुहय्यी नामक शख्स लाया था.

Published by: Sami Siddiqui | Aug 31, 2025

इसाफ और नाइला

जमजम के पास इसाफ और नाइला नाम की मूर्तियां रखी गईं.

Published by: Sami Siddiqui | Aug 31, 2025

हर कबीले की मूर्ति

अलग-अलग कबीलों की अपनी-अपनी मूर्तियां थीं. मिसाल के तौर पर कुरैश की उज्जा, सकीफ की लात और औस और खजरज की मनात. मूर्ति पूजा शुरू होने में सदियों लगीं.

Published by: Sami Siddiqui | Aug 31, 2025

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