Urdu Poetry: कायनात पर बेहतरीन शेर; 'भुला चुके हैं ज़मीन ओ ज़मा के सब क़िस्से'

Published by: Zee Team | Aug 27, 2023

साबिर ज़फ़र

दूर तक एक ख़ला है सो ख़ला के अंदर... सिर्फ़ तन्हाई की सूरत ही नज़र आएगी

Published by: Zee Team | Aug 27, 2023

क़ाएम चाँदपुरी

मिरी नज़र में है 'क़ाएम' ये काएनात तमाम... नज़र में गो कोई लाता नहीं है यां मुझ को

Published by: Zee Team | Aug 27, 2023

राना आमिर लियाक़त

अपना आप पड़ा रह जाता है बस इक अंदाज़े पर... आधे हम इस धरती पर हैं आधे उस सय्यारे पर

Published by: Zee Team | Aug 27, 2023

सनाउल्लाह ज़हीर

ख़ला में तैरते फिरते हैं हाथ पकड़े हुए... ज़मीं की एक सदी एक साल सूरज का

Published by: Zee Team | Aug 27, 2023

अख़्तर ज़ियाई

भुला चुके हैं ज़मीन ओ ज़मां के सब क़िस्से... सुख़न-तराज़ हैं लेकिन ख़ला में रहते हैं

Published by: Zee Team | Aug 27, 2023

महेंद्र कुमार सानी

रात दिन गर्दिश में हैं लेकिन पड़ा रहता हूँ मैं... काम क्या मेरा यहां है सोचता रहता हूं मैं

Published by: Zee Team | Aug 27, 2023

ज़ुबैर रिज़वी

तुम अपने चाँद तारे कहकशां चाहे जिसे देना... मिरी आंखों पे अपनी दीद की इक शाम लिख देना

Published by: Zee Team | Aug 27, 2023

निदा फ़ाज़ली

दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है... मिल जाए तो मिट्टी है खो जाए तो सोना है

Published by: Zee Team | Aug 27, 2023

शहाब जाफ़री

चले तो पांव के नीचे कुचल गई कोई शय... नशे की झोंक में देखा नहीं कि दुनिया है

Published by: Zee Team | Aug 27, 2023

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