सूरज सितारे चाँद मिरे साथ में रहे जब तक तुम्हारे हाथ मिरे हाथ में रहे
रोज़ पत्थर की हिमायत में ग़ज़ल लिखते हैं रोज़ शीशों से कोई काम निकल पड़ता है
अब इतनी सारी शबों का हिसाब कौन रखे बड़े सवाब कमाए गए जवानी में
ख़याल था कि ये पथराव रोक दें चल कर जो होश आया तो देखा लहू लहू हम थे
इक मुलाक़ात का जादू कि उतरता ही नहीं तिरी ख़ुशबू मिरी चादर से नहीं जाती है
आते जाते पल ये कहते हैं हमारे कान में कूच का ऐलान होने को है तय्यारी रखो
रात की धड़कन जब तक जारी रहती है सोते नहीं हम ज़िम्मेदारी रहती है
सोए रहते हैं ओढ़ कर ख़ुद को अब ज़रूरत नहीं रज़ाई की
मैं मर जाऊँ तो मेरी एक अलग पहचान लिख देना लहू से मेरी पेशानी पे हिंदुस्तान लिख देना