देश के पूर्व पीएम राजीव गांधी की आज 33वीं पुण्यतिथि है. इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रद्धांजलि अर्पित की है. वहीं, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, और सोनिया गांधी समेत कई दिग्गज नेताओं ने राजीव गांधी स्मारक स्थल पर जाकर ख़िराज-ए-'अक़ीदत पेश की है.
इस मौके पर पूर्व पीएम राजीव गांधी से जुड़े 10 रोचक बात बताने वाला हूं.. आइए जानते हैं.
पूर्व पीएम राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को हुआ था, जब देश आजाद नहीं हुआ था. बतौर प्रधानमंत्री राजीव गांधी गांधी और नेहरू परिवार के आखिरी सदस्य थे.
शायद ही लोग जानते हो कि राजीव गांदी को प्लेन उड़ाने के साथ-साथ फोटोग्राफी का भी काफी शौक था. उनकी तस्वीरों को छापने के लिए कई पब्लिशर्स ने मशक्कत की लेकिन राजीव गांधी ने कभी भी इजाजत नहीं दी.
राजीव गांधी ने साल 1980 में राजनीति में कदम रखा, तो उन्हें मिस्टर क्लीन कहा जाता था. महज 40 साल की उम्र में वो भारतीय राजनीति की ऊंचाइयों तक पहुंच गए.
भारत में साल 1956 में कंप्यूटर युग की शुरुआत हुई थी, लेकिन देश में डिजिटल कंप्यूटर को कोई खास महत्व नहीं दिया गया था. इसके बाद जब राजीव गांधी 19984 में प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने इस मुहिम को नई ऊंचाई पर ले गए. जिसको हम कंप्यूटर क्रांति के नाम से जानते हैं. उस वक्त लोगों के दफ्तर से लेकर घरों तक कंप्यूटर पहुंच गया था.
इसके अलावा राजीव गांधी ने पंचायती राज के कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसका लक्ष्य सत्ता का विकेंद्रीकरण करना और जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को बढ़ावा देना था.
वहीं, राजीव गांधी को पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को बेहतर बनाने के प्रयासों के लिए भी जाना जाता है. उन्होंने साल 1987 में भारत-श्रीलंका समझौते पर हस्ताक्षर किया, जिसका उद्देश्य श्रीलंका में गृह युद्ध को खत्म करना था. इस समझौते के तहत मौजूदा राजीव गांधी सरकार ने श्रीलंका में भारतीय फौज को भेजा था.
इसके अलावा राजीव गांधी ने नौजवानों को सशक्त बनाने के लिए एक अहम कदम उठाए थे. राजीव गांधी की अगुआई वाली सरकार ने संविधान का 61वां संशोधन अधिनियम 1989 में पारित किया गया था. जिसमें वोटर्स की उम्र 21 साल से घटाकर 18 साल कर दी थी.
लेकिन राजीव गांधी एक ऐसी गलती, जो राजनीतिक परिदृश्य को बदलकर रख दिया. दरअसल, साल 1985 में शाह बानो केस में सुप्रीम कोर्ट ने शाह बानो के शौहर को हर महीने गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया.
उस वक्त मुस्लिम संगठनों ने इस फैसले का विरोध किया, तो राजीव गांधी ने साल 1986 में पार्लियामेंट में कानून लाकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलट दिया. जिसके बाद हिंदू संगठन काफी नाराज हो गया.
वहीं कुछ राजनीतिक जानकारों का कहना था कि शाह बानो मामले को डैमेज कंट्रोल करने के लिए राजीव गांधी ने हिंदू पक्ष को खुश करने के लिए बाबरी मस्जिद के ताले खुलवाए थे. जिसके बाद बाबरी मस्जिम भगवान राम की पूजा-अर्चना हुई थी. हालांकि, कांग्रेस ने हमेशा इस आरोप को खारिज करती आई है.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राजीव गांधी एकमात्र ऐसे पीएम थे, जो खुद अपनी गाड़ी चलाकर जगह-जगह जाते थे. वो कई बार चुनावी रैलियों में खुद अपनी कार चलाकर पहुंचते थे.
साल 1984 से लेकर 1989 के बीच राजीव गांधी देश के पीएम रहे. साल 1991 में तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदूर में एक चुनावी प्रचार के दौरान लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) के सदस्यों ने उनका कत्ल कर दिया.