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राहुल गांधी का किला ढहाने का स्मृति ईरानी को मिला इनाम, मिली ये बड़ी जिम्मेदारी

राहुल गांधी को हराने के बाद से ही यह कयास लगाए जा रहे थे कि मोदी सरकार में उनका कद पहले से बढ़ सकता है.

राहुल गांधी का किला ढहाने का स्मृति ईरानी को मिला इनाम, मिली ये बड़ी जिम्मेदारी
माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में वह मंत्रालयों का कार्यभार संभालेंगी. .फोटो साभारः ANI

नई दिल्ली: गांधी परिवार के गढ़ अमेठी से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को हराकर लोकसभा चुनाव में सबसे बड़ा उलटफेर करने वाली स्मृति ईरानी को मोदी सरकार में इस बार दो मंत्रालयों की जिम्मेदारी सौंपी गई है. उन्हें महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और कपड़ा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है. इससे पहले भी वह कपड़ा मंत्री के तौर पर काम कर रही थीं. माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में वह मंत्रालयों का कार्यभार संभालेंगी. 

राहुल गांधी को हराने के बाद से ही यह कयास लगाए जा रहे थे कि मोदी सरकार में उनका कद पहले से बढ़ सकता है. पिछली बार चुनाव हारने के बावजूद उन्हें मानव संसाधन विकास मंत्री बनाया गया और बाद में वह सूचना प्रसारण और फिर कपड़ा मंत्री रही. चुनावी राजनीति में उनका पदार्पण 2004 में हुआ जब दिल्ली के चांदनी चौक संसदीय इलाके से वह कांग्रेस के कपिल सिब्बल से हार गई थीं.

टीवी की चहेती बहू 'तुलसी' ने गांधी परिवार के गढ में सेंध लगाकर बढ़ाया अपना कद
गांधी परिवार के गढ़ अमेठी से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को हराकर लोकसभा चुनाव में सबसे बड़ा उलटफेर करने वाली स्मृति ईरानी ने राजनीति में अपना कद काफी ऊंचा किया है. कभी छोटे पर्दे की हर दिल अजीज बहू रही स्मृति अब कुशल राजनीतिज्ञ के रूप में पहचान बना चुकी है. चुनाव के ठीक बाद अमेठी में एक कार्यकर्ता की हत्या के बाद उसकी अर्थी को कंधा देकर स्मृति ने एक नयी मिसाल पेश की. पिछली बार लोकसभा चुनाव में हार के बावजूद उन्होंने मानव संसाधन विकास, सूचना और प्रसारण और कपड़ा मंत्रालय जैसे मंत्रालयों का जिम्मा संभाला.

स्मृति ईरानी ने गुरुवार को दूसरी बार नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली. 
स्मृति ईरानी ने गुरुवार को दूसरी बार नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली. टीवी की चहेती बहू ‘तुलसी’ अब उस पहचान को पीछे छोड़कर एक मंझी हुई राजनीतिज्ञ के रूप में उभरी है. पिछली बार राहुल से अमेठी में एक लाख से अधिक मतों से हारने के बाद उन्होंने अमेठी से नाता नहीं तोड़ा. 

इनपुट भाषा से भी