Coronavirus के संकट के बीच इस साल IRAN को लगे ये बड़े 3 झटके, उबरना मुश्किल

परमाणु हथियारों की सनक पाले बैठे ईरान के लिए साल 2020 बाकी दुनिया से कुछ ज्यादा खराब रहा. उसे अपने दो प्रमुख लीडरों की मौत का सामना करना पड़ा, जबकि एक करीबी की भी हत्या हो गई. ईरान ने हर मौके पर बदला लेने की धमकी दी, लेकिन अभी तक कुछ कर नहीं पाया है.   

Coronavirus के संकट के बीच इस साल IRAN को लगे ये बड़े 3 झटके, उबरना मुश्किल
ईरान के राष्ट्रपति (फाइल फोटो: PTI)

तेहरान: कोरोना संकट के चलते वैसे तो पूरी दुनिया के लिए ही साल 2020 खराब रहा, लेकिन ईरान को आंतरिक मोर्चे पर तीन बड़े झटके भी झेलने पड़े. ये झटके ऐसे हैं जिनसे बाहर निकलना उसके लिए आसान नहीं होगा. सबसे पहले स्पेशल फोर्स चीफ जनरल कासिम सुलेमानी की बगदाद में हत्या हुई. इसके बाद अलकायदा छोड़कर ईरान के करीब आया अबु मोहम्मद अल मासरी मारा गया और हाल ही में ईरान के परमाणु वैज्ञानिक मोहसिन फखरीजादेह को मौत के घाट उतार दिया गया. 

Israel पर है आरोप
ईरान (Iran) का आरोप है कि मोहसिन फखरीजादेह (Mohsen Fakhrizadeh) की हत्या इजरायल (Israel) ने करवाई है. उसने इजरायल को अंजाम भुगतने की धमकी देते हुए कहा है कि परमाणु वैज्ञानिक के हत्यारों को बक्शा नहीं जाएगा. फखरीजादेह की हत्या रिमोट कंट्रोल वाली मशीन गन से हुई थी, जो किसी दूसरी कार से ऑपरेट हो रही थी. उस कार को भी धमाका करके उड़ा दिया गया था.

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क्यों खिलाफ हैं अधिकांश Countries

अमेरिका सहित अधिकांश देश ईरान के खिलाफ हैं. इसकी वजह है उसका परमाणु हथियार हासिल करने की दौड़ में शामिल होना. करीब 20 साल से ईरान एटमी ताकत हासिल करने की कोशिश कर रहा है. अमेरिका, इजरायल जैसे देशों को लगता है कि अगर ईरान ने परमाणु हथियार बना लिए तो इससे दुनिया को खतरा पैदा हो जाएगा. इसी के चलते 2010 में ईरान को रोकने के लिए UN सिक्योरिटी काउंसिल, यूरोपीय यूनियन और अमेरिका ने उस पर कई पाबंदियां लगाईं थीं. हालांकि, 2015 में हुए एक समझौते के तहत ईरान को प्रतिबंधों से कुछ राहत मिली, मगर जनवरी 2020 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह समझौता रद्द कर दिया और ईरान फिर से उनके निशाने पर आ गया. 

ऐसे लगे झटके दर झटके

पहला झटका: परमाणु हथियारों की सनक पाले बैठे ईरान को पहला झटका जनवरी में लगा था, जब जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या कर दी गई. सुलेमानी स्पेशल फोर्स के कमांडर इन चीफ थे और जनता के बीच राष्ट्रपति हसन रूहानी से ज्यादा लोकप्रिय थे. कहा जाता है कि CIA ने कार में बैठते वक्त रॉकेट से हमला बोलकर सुलेमानी को मौत के घाट उतारा था.  

दूसरा झटका: अबु मोहम्मद अल मासरी अल कायदा में नंबर दो की हैसियत रखता था, बाद में वो ईरान का करीबी हो गया. वो तेहरान में हबीब दाऊद के नाम से छिपा था. लादेन के रिश्तेदार मासरी और उसकी बेटी को कुछ लोगों ने 7 अगस्त को कार में ही ढेर कर दिया. ईरान ने मामला दबाने की कोशिश की, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मीडिया में यह खबर आ गई कि मासरी को मोसाद के सीक्रेट एजेंट्स ने मारा है.

तीसरा झटका: ईरान को तीसरा झटका मोहसिन फखरीजादेह के रूप में लगा, जो उसके परमाणु कार्यक्रम के प्रमुख थे. 27 नवंबर को तेहरान में कुछ लोगों ने उन्हें कार में मार गिराया. ईरान का आरोप है कि यह काम इजरायल की एजेंसी मोसाद ने किया है. बता दें कि 2010 से 2012 के बीच ईरान के कुछ और न्यूक्लियर साइंटिस्ट्स मारे गए थे, ये सभी मोहसिन के सहयोगी थे. 

क्या वास्तव में है खतरा?

कुछ महीने पहले इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) की रिपोर्ट में कहा गया था कि ईरान के पास इस वक्त 2105 किलोग्राम एनरिच यूरेनियम है. जबकि अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक, यह 300 किलोग्राम से ज्यादा नहीं हो सकता. ईरान ने यह भी दावा किया है कि उसके पास यूरेनियम को एनरिच करने वाले संसाधन भी हैं. बता दें कि एनरिच यूरेनियम ही परमाणु ऊर्जा या हथियार बनाने के काम आता है. इसलिए दुनिया ईरान को लेकर दहशत में रहती है.  

 

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