दिल्ली से भी बहुत छोटा देश बारबाडोस 400 साल बाद बना गणतंत्र, जानिए पूरी कहानी
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दिल्ली से भी बहुत छोटा देश बारबाडोस 400 साल बाद बना गणतंत्र, जानिए पूरी कहानी

Replacing the queen, Barbados first president Sandra Mason: पिछले महीने Barbados ने ऐलान कर दिया था कि वो अब ब्रिटेन (UK) की महारानी को Head of State नहीं मानेगा, उनकी जगह देश की नई राष्ट्रपति लेंगी, जिनका नाम है डेम सांड्रा प्रुनेला मेसन, वो 72 साल की हैं. हाल ही में एक समारोह में Barbados की नई राष्ट्रपति ने पहली बार सलामी ली.

दिल्ली से भी बहुत छोटा देश बारबाडोस 400 साल बाद बना गणतंत्र, जानिए पूरी कहानी

नई दिल्ली: अब आपको आकार में देश की राजधानी दिल्ली से भी बहुत छोटे देश बारबाडोस (Barbados) की कहानी बताते हैं. जो दुनिया का सबसे नया गणतंत्र बन गया है. Barbados ने हाल ही में अपनी मानसिक गुलामी की बेड़ियों को तोड़ते हुए ये ऐलान किया था कि अब वो ब्रिटेन (UK) की महारानी एलिजाबेथ (Queen Elizabeth) को अपना राष्ट्राध्यक्ष (Head of State) नहीं मानेगा बल्कि उनकी जगह Barbados में नए राष्ट्रपति को Head of State का दर्जा दिया जाएगा.

हाल ही में Barbados ने ब्रिटेन के राजकुमार और ब्रिटेन की महारानी के पुत्र प्रिंस चार्ल्स के सामने गुलामी की इन बेड़ियों को तोड़ दिया और खुद को एक गणतंत्र घोषित कर दिया. 

1625 में हुआ कब्जा

Barbados भारत से 14 हज़ार किलोमीटर दूर Caribbean सागर के किनारे बसा एक छोटा सा देश है. जो आकार में सिर्फ 439 वर्ग किलोमीटर बड़ा है और जिसकी आबादी सिर्फ तीन लाख है. इस छोटे से देश पर 396 वर्ष पहले यानी सन 1625 में ब्रिटेन के कब्ज़ा कर लिया था.

इसके बाद Barbados 341 वर्षों तक पूरी तरह से ब्रिटेन का गुलाम बना रहा और वर्ष 1966 में जाकर इस देश को ब्रिटेन से आज़ादी मिली. लेकिन इसे गणतंत्र का दर्जा नहीं मिल पाया, और आज़ादी के बाद भी ब्रिटेन की महारानी ही Barbados की Head of State बनी रही.

डेम सांड्रा प्रुनेला मेसन को कमान

लेकिन पिछले महीने ही Barbados ने ऐलान कर दिया था कि वो अब ब्रिटेन की महारानी को Head of State नहीं मानेगा और उनकी जगह देश की नई राष्ट्रपति लेंगी, जिनका नाम है डेम सांड्रा प्रुनेला मेसन, वो 72 साल की हैं. इसके लिए बीते मंगलवार का दिन तय गया था और एक तय समारोह में Barbados की नई राष्ट्रपति ने पहली बार सलामी ली.

'ब्रिटेन तालियों के लायक नहीं'

इस मौके पर ब्रिटेन के राजपरिवार की तरफ से प्रिंस चार्ल्स और मशहूर अमेरिकन सिंगर रियाना भी मौजूद थीं. जो मूल रूप से Barbados की रहने वाली हैं. इस समारोह में रियाना समेत जितने भी खास मेहमान मौजूद थे, उन सबके लिए ज़ोरदार तालियां बजाई गई. वहीं जब प्रिंस चार्ल्स भाषण देने के लिए अपनी जगह से उठे तो उनके लिए किसी ने ताली नहीं बजाई. शायद Barbados  के नेता और वहां के लोग ये संदेश देना चाहते थे कि जिन लोगों ने उनके देश को आज तक गुलाम समझ रखा था वो लोग तालियों के लायक नहीं हैं.

396 साल पहले जब ब्रिटेन ने Barbados पर कब्ज़ा किया था. तब इस देश के लोगों से गुलामी कराई जाती थी, और इस देश के लोगों को ब्रिटेन में दासों की तरह बेचा और खरीदा भी जाता था. ये सिलसिला 208 साल तक चलता रहा.

नहीं मागी माफी

Barbados के लोगों का आरोप है कि गुलामों को बेचने और खरीदने में ब्रिटेन का शाही परिवार भी शामिल रहा है और इसलिए इस शाही परिवार को सम्मान देने की कोई ज़रूरत नहीं है. हालांकि कई लोगों को उम्मीद थी कि प्रिंस चार्ल्स अपने भाषण में इतिहास में हुई गलतियों के लिए माफी मांगेंगे लेकिन उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया, इसलिए Barbados के लोग ब्रिटेन के शाही परिवार से और ज्यादा नाराज़ हैं और अब वो 400 वर्षों की गुलामी के लिए ब्रिटेन से हर्जाना भी मांग रहे हैं.

National Hero सिंगर रियाना

लेकिन इसी समारोह में मशहूर सिंगर रियाना को बहुत सम्मान दिया गया और उन्हें देश का National Hero भी घोषित किया गया. रियाना का जन्म Barbados  में ही हुआ था, जो वर्ष 2005 में अमेरिका चली गईं थी और एक मशहूर Pop Singer बन गईं. आज उनके पूरी दुनिया में करोड़ों Fans हैं और इसलिए Barbados के लोग उन्हें अपना सबसे बड़ा हीरो मानते हैं.

भारत में जो लोग आज़ादी की अहिमयत नहीं समझते और जिन्हें लगता है कि ये आज़ादी बहुत आसानी से मिल गई थी, उन्हें आज Barbados से सबक लेकर आज़ादी की कीमत पहचाननी चाहिए.

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