एंतोनियो गुतेस अगले संयुक्त राष्ट्र महासचिव नियुक्त

पुर्तगाल के पूर्व प्रधानमंत्री एंतोनियो गुतेस को आज महासभा ने संयुक्त राष्ट्र का अगला महासचिव नियुक्त किया।193 सदस्य देशों वाली शक्तिशाली महासभा ने 67 वर्षीय गुतेस को नौवां संयुक्त राष्ट्र महासचिव नियुक्त करने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया । वह बान की मून की जगह लेंगे जिनका कार्यकाल 31 दिसंबर को पूरा होगा।

एंतोनियो गुतेस अगले संयुक्त राष्ट्र महासचिव नियुक्त

संयुक्त राष्ट्र: पुर्तगाल के पूर्व प्रधानमंत्री एंतोनियो गुतेस को आज महासभा ने संयुक्त राष्ट्र का अगला महासचिव नियुक्त किया।193 सदस्य देशों वाली शक्तिशाली महासभा ने 67 वर्षीय गुतेस को नौवां संयुक्त राष्ट्र महासचिव नियुक्त करने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया । वह बान की मून की जगह लेंगे जिनका कार्यकाल 31 दिसंबर को पूरा होगा।

पंद्रह सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने पिछले सप्ताह गुतेस के लिए मतदान किया था और उनका नाम महासभा को भेज दिया था ।गुतेस 1995 से लेकर 2002 तक पुर्तगाल के प्रधानमंत्री थे।वह जून 2005 से दिसंबर 2015 तक शरणार्थी मामलों के संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त भी रहे ।

महासचिव का चयन करने के लिए परिषद में हुए सभी छह अनौपचारिक मतदानों में गुतेस सबसे आगे रहे । वह ऐसे समय आगे रहे जब संयुक्त राष्ट्र के कई सदस्य देश और नागरिक समाज संगठन विश्व निकाय का मुखिया किसी महिला को चुनने की मांग उठा रहे थे । संयुक्त राष्ट्र के 71 साल के इतिहास में इसके सभी प्रमुख पुरुष ही रहे हैं ।

हालांकि, बान ने उन्हें महासचिव पद के लिए ‘एक शानदार विकल्प’ करार दिया ।

बान ने संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के प्रमुख के रूप में गुतेस के कार्यकाल का संदर्भ देते हुए कहा, ‘महासचिव-निर्वाचित गुतेस को हम सभी अच्छी तरह जानते हैं । लेकिन वह शायद सर्वश्रेष्ठ रूप में वहां जाने जाते हैं जहां इसका सर्वाधिक महत्व हो: सशस्त्र संघर्ष और मानवीय पीड़ा के मोर्चों पर।’ उन्होंने पिछले सप्ताह कहा था कि गुतेस ने ‘लाखों लोगों के लिए गहरी करणा दिखाई जिन्हें अपने घर छोड़ने को मजबूर होना पड़ा है। उन्होंने उनकी मदद के लिए अनवरत काम किया ।’

बान ने कहा था, ‘पुर्तगाल के प्रधानमंत्री के रूप में उनका (गुतेस का) पिछला अनुभव, विश्व मामलों के बारे में उनका व्यापक ज्ञान और उनकी जीवंत मेधा एक अत्यंत महत्वपूर्ण समय में संयुक्त राष्ट्र का नेतृत्व करने में भी उनकी अच्छी तरह मदद करेगी।’

पिछले सप्ताह अपने चयन के तुरंत बाद लिस्बन में बोलते हुए गुतेस ने ‘आभार’ प्रकट किया था और संघषर्, आतंकवाद, मानवाधिकार उल्लंघन तथा गरीबी के पीडित़ों सहित अत्यंत संवेदनशील तबकों के लिए ‘सेवा करने’ का संकल्य लिया था।

अप्रैल में रखे गए अपने दृष्टि पत्र में उन्होंने जोर देकर कहा था कि चार्टर में निहित शांति, न्याय, मानवीय गरिमा, सहनशीलता और एकजुटता के मूल्य विश्व में सभी संस्कृतियों और धर्मों का केंद्र हैं तथा इनकी झलक ‘उपनिषदों से लेकर कुरान तथा गास्पल तक में दिखती है।’ गुतेस ने कहा था कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव को अपने अच्छे कार्यों तथा मध्यस्थता क्षमता को एक ईमानदार मध्यस्थ की तरह ‘सक्रियता, निरंतरता और बिना थके’ करना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा था कि आतंकवाद से लड़ने के लिए रोकथाम भी महत्वपूर्ण है तथा अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सभी तरह के आतंकवाद को उखाड़ फेंकने के लिए सामूहिक रूप से काम करने का ‘‘कानूनी अधिकार है’’ और यह उसका ‘नैतिक दायित्व’ है।

विश्व निकाय का नया प्रमुख नियुक्त करने की प्रक्रियाओं के तहत, परिषद से महासभा को सिफारिश भेजे जाने के बाद, महासभा के लिए कार्रवाई करने के वास्ते एक मसौदा प्रस्ताव जारी किया जाता है । पिछले पांच महासचिव महासभा ने आम सहमति से स्वीकार किए एक प्रस्ताव के जरिए नियुक्त किए थे । मतदान तभी कराया जाता है जब कोई सदस्य देश इसकी मांग करे और प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए महासभा को एक साधारण बहुमत की आवश्यकता होगी। यदि मतदान कराया जाता है तो यह गुप्त मतदान होगा।

गुतेस के अतिरिक्त 12 अन्य उम्मीदवार भी पद की दौड़ में थे । नए संयुक्त राष्ट्र महासचिव के चयन का फैसला पारंपरिक रूप से कुछ शक्तिशाली देश बंद कमरों में हुई बैठकों में करते थे, लेकिन इस बार पहली बार इस प्रक्रिया में जन चर्चा शामिल हुई और प्रत्येक उम्मीदवार ने विश्व के शीषर्तम राजनयिक पद के लिए प्रचार किया।

संयुक्त राष्ट्र में रूसी राजनयिक एवं अक्तूबर महीने के लिए परिषद के अध्यक्ष विताली चर्न ने पिछले सप्ताह संवाददाताओं से कहा था कि संयुक्त राष्ट्र का नेतृत्व करने के लिए गुतेस में ‘कई मजबूत योग्यताएं’ हैं।

उम्मीदवारों, संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों और नागरिक समाज के संगठनों के बीच अनौपचारिक चर्चा अप्रैल में शुरू हुई थी जब पहले तीन उम्मीदवारों ने अपना दृष्टि पत्र रखा तथा इस मुद्दे पर सवालों के जवाब दिए कि वे किस तरह सतत विकास को बढ़ावा देंगे, किस तरह शांति प्रयासों में सुधार करेंगे, किस तरह मानवाधिकारों की रक्षा करेंगे और किस तरह मानवीय आपदाओं से निपटेंगे।

इसके अतिरिक्त जुलाई में संयुक्त राष्ट्र ने महासभा हॉल में पहली बार अपनी तरह की चर्चा कराई जिसका प्रसारण विश्वभर में टेलीविजन पर किया गया और इसका वेब प्रसारण भी किया गया।