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बरकरार रहना चाहिए ऑस्ट्रेलियाई कार्डिनल को दोषी ठहराया जाना: अभियोजक

अभियोजक क्रिस बोयस ने तीन न्यायाधीशों की पीठ से कहा कि दोषसिद्धि कायम रखी जानी चाहिए जो एक ही फरियादी की गवाही पर आधारित है. उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता बहुत ही अकाट्य गवाह है. स्पष्ट तौर पर वह झूठा नहीं है. वह सच्चा गवाह है.

बरकरार रहना चाहिए ऑस्ट्रेलियाई कार्डिनल को दोषी ठहराया जाना: अभियोजक
घटना 1996 की है जो मेलबर्न स्थित सेंट पैट्रिक्स कैथेड्रल में हुई थी.

मेलबर्न: ऑस्ट्रेलियाई अभियोजकों ने गुरुवार को अदालत में कहा कि बच्चों के यौन शोषण मामले में एक रोमन कैथोलिक कार्डिनल की दोषसिद्धि बरकरार रखी जानी चाहिए. कार्डिनल जॉर्ज पेल (77) ऐसा सबसे वरिष्ठ कैथोलिक है जिसे बच्चों के यौन शोषण मामले में दोषी ठहराया गया है. उसने दोषसिद्धि को विक्टोरिया राज्य के ‘कोर्ट ऑफ अपील’ में चुनौती दी है. वह दूसरे दिन सुनवाई के लिए पहुंचा.

अभियोजक क्रिस बोयस ने तीन न्यायाधीशों की पीठ से कहा कि दोषसिद्धि कायम रखी जानी चाहिए जो एक ही फरियादी की गवाही पर आधारित है. उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता बहुत ही अकाट्य गवाह है. स्पष्ट तौर पर वह झूठा नहीं है. वह सच्चा गवाह है.

पोप फ्रांसिस के पूर्व वित्त प्रमुख को 13 वर्षीय एक लड़के से मुख मैथुन और उसके 13 वर्षीय दोस्त से अश्लील व्यवहार करने के मामले में दिसंबर में एक ज्यूरी ने सर्वसम्मति से दोषी ठहराया था. घटना 1996 की है जो मेलबर्न स्थित सेंट पैट्रिक्स कैथेड्रल में हुई थी. कुछ महीने पहले ही पेल ऑस्ट्रेलिया के दूसरे सबसे बड़े शहर मेलबर्न का आर्चबिशप बना था.

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पीड़ित दोनों लड़कों में से एक अभियोजन पक्ष का प्रमुख गवाह था जो अब 35-36 साल का हो चुका है. वहीं, 2014 में दूसरे लड़के की मौत हेरोइन की अत्यधिक मात्रा के सेवन के चलते हो गई. वह कोई आरोप नहीं लगा पाया था.

पेल को मार्च में छह साल के कारावास की सजा सुनाई गई थी. उसे विशेष सुरक्षा वाली जेल में रखा जा रहा है क्योंकि बच्चों का यौन उत्पीड़न करने वाले कैदियों को अन्य कैदियों से काफी खतरा होता है. वह ऑस्ट्रेलिया का सर्वोच्च रैंकिंग वाला कैथोलिक है, इसलिए वैटिकन उसकी दोषसिद्धि को लेकर खुद भी जांच कर रहा है.