अजरबैजान-आर्मेनिया के बीच भीषण लड़ाई जारी, अब सामने आया NATO का बयान

नागोर्नो-काराबाख ने कहा कि अजरबैजान की सेना ने मुख्य प्रशासनिक केंद्र और स्टेपनाकर्ट पर रॉकेट हमले किए, जबकि अजरबैजान ने कहा कि अर्मेनिया ने ब्रेक्जिट क्षेत्र के बाहर कई शहरों में मिसाइलें दागीं.

अजरबैजान-आर्मेनिया के बीच भीषण लड़ाई जारी, अब सामने आया NATO का बयान
अर्मेनिया और अजरबैजान के बीच 9 दिनों से संघर्ष जारी है.. (फाइल फोटो)

येरेवन / बाकू: अर्मेनिया और अजरबैजान (Armenia and Azerbaijan) ने एक-दूसरे पर दक्षिण काकेशस क्षेत्र में 25 से अधिक वर्षों के सबसे घातक लड़ाई के नौवें दिन नागरिक क्षेत्रों पर हमला करने का आरोप लगाया. इस बीच नाटो (NATO) के प्रमुख जेन्स स्टोलटेनबर्ग ने नागोर्नो-काराबाख (Nagorno-Karabakh) के क्षेत्र पर कब्जे को लेकर संघर्ष को तत्काल समाप्त करने के लिए अपनी आवाज को तेज किया. सप्ताहांत में दोनों देशों के हमले तेज करने और अजरबैजान के राष्ट्रपति इलहाम अलीयेव (Azerbaijani President Aliyev) द्वारा जंग खत्म करने के लिए रखी शर्तें को कारण संघर्ष विराम की संभावनाएं दूर दिखाई दे रही हैं.

अजरबैजान के राष्ट्रपति ने रखी शर्त
अजरबैजान के राष्ट्रपति इलहाम अलीयेव ने रविवार को राष्ट्र के नाम एक संबोधन में कहा कि अर्मेनियाई सेना ने उस इलाके पर कब्जा कर रखा है, जिसे वह 1990 के दशक में हार चुका है. उन्होंने कहा कि अर्मेनिया जानबूझकर युद्ध भड़का रहा है. यदि अर्मेनियाई सेना तुरंत हमारे इलाके से पीछे हटती है, पूरी तरह से वापसी की समय-सीमा बताती है और जो कुछ किया है उसके लिए माफी मांगती है तो हम युद्ध खत्म करने को तैयार हैं. अर्मेनियाई रक्षा मंत्रालय के आधिकारी अर्स्टन होवनहिस्यान ने कहा, "मुझे नहीं लगता कि येरेवन (अर्मेनियाई राजधानी) के लिए कोई जोखिम है, लेकिन वैसे भी हम युद्ध में हैं."

अंतरराष्ट्रीय समुदाय संघर्ष से चिंतित
अमेरिका समेत कई देशों ने अर्मेनिया और अजरबैजान (Armenia-Azerbaijan) से युद्ध समाप्त करने के अपील की है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने दक्षिण काकेशस क्षेत्र में जारी स्थिति पर चिंता जाहिर की है, क्योंकि यहां से पाइपलाइनें दुनिया के बाजारों में अजरबैजान से तेल और गैस अंतर्राष्ट्रीय बाजार में जाती हैं. इसके साथ ही संभावना है कि अन्य क्षेत्रीय शक्तियों को भी यहां खींचा जा रहा है. अजरबैजान तुर्की द्वारा समर्थित है, जबकि अर्मेनिया के पास रूस का समर्थन है.

अजरबैजान-अर्मेनिया ने लगाए ये आरोप
नागोर्नो-काराबाख के अधिकारियों ने कहा कि अजरबैजान की सेना ने मुख्य प्रशासनिक केंद्र और स्टेपनाकर्ट पर रॉकेट हमले किए, जबकि अजरबैजान ने कहा कि अर्मेनिया ने ब्रेक्जिट क्षेत्र के बाहर कई शहरों में मिसाइलें दागीं. नागोर्नो-करबाख नेता के प्रवक्ता वहरम पोगोसियन ने कहा, "दुश्मन स्टीफनकैर्ट और शुशी में रॉकेट दाग रहा है. रक्षा सेना की प्रतिक्रिया आने में ज्यादा देर नहीं लगेगी."

अब तक 223 सैन्यकर्मियों की मौत
नागोर्नो-काराबाख (Nagorno-Karabakh) में अधिकारियों ने कहा कि हमले में 21 और सैनिक मारे गए हैं और 27 सितंबर से शुरू हुए संघर्ष के बाद से मौत का आंकड़ा 223 हो गया है. वहीं अजरबैजान ने कहा कि लड़ाई शुरू होने के बाद 25 नागरिक मारे गए और 127 घायल हुए हैं. अजरबैजान ने सैन्य हताहतों की संख्या को लेकर जानकारी नहीं दी है.

क्या है दोनों देशों के बीच विवाद की जड़
बता दें कि पूर्व सोवियत संघ का हिस्सा रह चुके अर्मेनिया और अजरबैजान के बीच युद्ध की बड़ी वजह नागोर्नो-काराबाख (Nagorno-Karabakh) क्षेत्र है. इस क्षेत्र के पहाड़ी इलाके को अजरबैजान अपना बताता है, जबकि यहां अर्मेनिया का कब्जा है. 1994 में खत्म हुई लड़ाई के बाद से इस इलाके पर अर्मेनिया का कब्जा है. उस समय करीब 30 हजार लोग मारे गए थे. 2016 में भी दोनों देशों के बीच इसी इलाके को लेकर खूनी युद्ध हुआ था, जिसमें 200 लोग मारे गए थे. अब एक बार फिर से दोनों देश आमने-सामने हैं.

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