रोहिंग्या संकट पर शेख हसीना ने मांगी कंबोडिया से मदद

कॉक्स बाजार में रहने वाले रोहिंग्या शरणार्थियों का कहना है कि सेना और स्थानीय लोगों ने अंधाधुंध रूप से गोलियां चलाकर लोगों को मार डाला, महिलाओं के साथ दुष्कर्म, उन्हें लूट लिया और घरों में आग लगा दी.

रोहिंग्या संकट पर शेख हसीना ने मांगी कंबोडिया से मदद
बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना. (फाइल फोटो)

नोमपेन्ह: बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने सोमवार (4 दिसंबर) को म्यांमार के रखाइन राज्य में अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न और रोहिंग्या संकट के एक स्थायी समाधान के लिए कंबोडिया से सहायता मांगी. बीडीन्यूज24 डॉट कॉम की खबर के मुताबिक, हसीना ने यह अपेक्षा नोमपेन्ह में अपने कमबोडियाई समकक्ष हुन सेन के साथ सोमवार को चर्चा के दौरान जताई. संयुक्त बयान के दौरान हसीना ने कहा, "हमने अपने क्षेत्र के सामने उभरती हुई सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा की और आतंकवाद व उग्रवाद से लड़ने के लिए समान संकल्प व्यक्त किए."

उन्होंने कहा, "हमने हमारे क्षेत्र की सुरक्षा और स्थायित्व के लिए खतरा बन चुके रोहिंग्या संकट पर भी चर्चा की. बांग्लादेश ने 10 लाख रोहिंग्याओं को आश्रय देना जारी रखा है. हाल ही में करीब 630,000 रोहिंग्या म्यांमार में अत्याचार के बाद भाग कर आए हैं और बांग्लादेश में आश्रय लिया है." हसीना ने हुन सेन से मसले के एक स्थायी समाधान के लिए समर्थन मांगा और कहा कि बांग्लादेश ने रोहिंग्या को उनके देश सुरक्षित रूप से वापस करने के लिए द्विपक्षीय वार्ता जारी रखी है.

कंबोडिया के नेता ने कहा, "हम बांग्लादेश (रोहंग्यिा शरणार्थियों को आश्रय देने के लिए) की बहुत सराहना करते हैं..हालांकि बांग्लादेश की आबादी 16 करोड़ से अधिक है, लेकिन फिर भी देश ने शरणार्थियों के मुद्दे को अपने कंधे पर ले लिया." विद्रोहियों द्वारा हमले के बाद म्यांमार सेना ने रखाइन राज्य में कार्रवाई शुरू की थी जिसके बाद अगस्त के अंत से रोहिंग्या शरणार्थी एक लहर के रूप में बांग्लादेश पहुंचे हैं.

कॉक्स बाजार में रहने वाले रोहिंग्या शरणार्थियों का कहना है कि सेना और स्थानीय लोगों ने अंधाधुंध रूप से गोलियां चलाकर लोगों को मार डाला, महिलाओं के साथ दुष्कर्म, उन्हें लूट लिया और घरों में आग लगा दी. बांग्लादेश और म्यांमार ने 23 नवंबर को शरणार्थियों के अपने देश लौटने को लेकर एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. बांग्लादेश सरकार ने रोहिंग्या संकट पर अंतर्राष्ट्रीय समर्थन जुटाने का भी प्रयास किया है. संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय यूनियन, अमेरिका, ब्रिटेन और अन्य पक्षों ने रोहिंग्या संकट पर बांग्लादेश के प्रयासों की सराहना की है.