बेनजीर भुट्टो हत्याकांड: दोषी अधिकारियों ने अपने खिलाफ फैसले को हाई कोर्ट में दी चुनौती

रावलपिंडी की आतंकवाद निरोधी अदालत (एटीसी) ने पिछले सप्ताह अतिरिक्त महानिरीक्षक साउद अजीज और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक खुर्रम शहजाद को लापरवाही और सुरक्षा चूक को लेकर दोषी पाया था और 17 साल की जेल की सजा सुनाई थी.

बेनजीर भुट्टो हत्याकांड: दोषी अधिकारियों ने अपने खिलाफ फैसले को हाई कोर्ट में दी चुनौती
भुट्टो की 27 दिसंबर, 2007 को एक चुनावी रैली के दौरान रावलपिंडी में बंदूक और बम से किये गये हमले में हत्या कर दी गयी थी. (फाइल फोटो)

इस्लामाबाद: बेनजीर भुट्टो हत्याकांड में दोषी ठहराये गये पाकिस्तान के दो पूर्व पुलिस अधिकारियों ने गुरुवार (7 सितंबर) को अपने खिलाफ सुनाये गये फैसले को यह कहते हुए ऊपरी अदालत में चुनौती दी कि उनको ‘बली का बकरा’ बनाया गया है. दोनों को 17 साल की जेल की सजा सुनाई गई है. रावलपिंडी की आतंकवाद निरोधी अदालत (एटीसी) ने पिछले सप्ताह अतिरिक्त महानिरीक्षक साउद अजीज और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक खुर्रम शहजाद को लापरवाही और सुरक्षा चूक को लेकर दोषी पाया था और 17 साल की जेल की सजा सुनाई थी. दोनों ने फैसले को लाहौर उच्च न्यायालय की रावलपिंडी पीठ में चुनौती दी है. अदालत से जुड़े एक अधिकारी ने इसकी जानकारी दी.

अधिकारी ने बताया कि दोनों अधिकारियों ने अपील में दलील दी है कि उन्होंने भुट्टो को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराई थी, जिनकी रावलपिंडी में हत्या कर दी गई थी. पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की अध्यक्ष और देश की दो बार की प्रधानमंत्री भुट्टो की 27 दिसंबर, 2007 को एक चुनावी रैली के दौरान रावलपिंडी के लियाकत बाग में बंदूक और बम से किये गये हमले में हत्या कर दी गयी थी. इस हमले में 20 से अधिक लोगों की जान गयी थी.

अधिकारियों ने निचली अदालत के फैसले को विरोधाभासी बताया है. पाकिस्तान के प्रमुख अखबार ‘डॉन’ के मुताबिक दोनों पूर्व अधिकारियों के वकीलों के मुताबिक सुरक्षा मुहैया कराने वाले अधिकारियों को ‘बली का बकरा’ बनाया गया है. उन्होंने कहा कि अभियोजन पक्ष के पास आरोपियों के खिलाफ ठोस सबूत नहीं हैं.

गौरतलब है कि पाकिस्तान की एक आतंकवाद रोधी अदालत (एटीसी) ने गुरुवार (31 अगस्त) को पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की हत्या के मामले में पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को भगोड़ा घोषित किया था. अदालत ने मामले में गिरफ्तार पांच आरोपियों को बरी कर दिया था, जबकि दो पुलिस अधिकारियों को 17-17 साल जेल की सजा दी गई. न्यायाधीश असगर खान ने रावलपिंडी के आदियाला जेल में फैसले की घोषणा की थी. न्यायाधीश ने मुशर्रफ की संपत्तियों को जब्त करने का आदेश दिया था.

2007 में एक दशक बाद पाकिस्तान में हो रहे चुनावों में हिस्सा लेने पहुंची भुट्टो की गोलीबारी व बम हमले में हत्या कर दी गई थी. डॉन ऑनलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक पूर्व सैन्य तानाशाह के लिए बेमियादी गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए. मुशर्रफ इस समय दुबई में निर्वासन में रह रहे हैं.

मुशर्रफ ने तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को 1999 में सत्ता से हटा दिया था. उनके प्रशासन को बेनजीर भुट्टो को सुरक्षा मुहैया कराने में नाकाम रहने का जिम्मेदार ठहराया गया था. बेनजीर भुट्टो पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की प्रमुख थीं और दो बार प्रधानमंत्री रह चुकी थीं.

अदालत ने पांच आरोपियों रफाकत हुसैन, हुसनैन गुल, शेर जमान, एतजाज शाह व अब्दुल राशिद को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया था, क्योंकि उनके खिलाफ सबूत नहीं मिले थे. अदालत ने दो पुलिस अधिकारियों रावलपिंडी सेंट्रल पुलिस के पूर्व अधिकारी सउद अजीज और रावल शहर के पूर्व एसपी खुर्रम शाहजाद को 17-17 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई. इन पर बेनजीर की सुरक्षा में लापरवाही का आरोप सही साबित हुआ था.

(इनपुट एजेंसी से भी)