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अर्थव्यवस्था खोलने के बाद आलोचनाएं झेल रहे बोल्सोनारो ने दी WHO को चेतावनी

ब्राजील में कोरोनोवायरस पॉजिटिव मामलों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. इतना ही नहीं, शुक्रवार को 1,473 मौतों के दैनिक रिकॉर्ड के साथ ब्राजील ने इटली को पछाड़ दिया है और रोजाना होने वाली मौतों के मामले में तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया है.

अर्थव्यवस्था खोलने के बाद आलोचनाएं झेल रहे बोल्सोनारो ने दी WHO को चेतावनी
ब्राजील को कोरोना संकट से बचाने में नाकाम हो रहे हैं जायर बोल्सोनारो

ब्राजीलिया: कोरोना वायरस (Coronavirus) के दौर में अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए लॉकडाउन में ढील देने पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने देशों को चेतावनी दी थी. इसके कुछ ही दिनों बाद ब्राजील के राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो (Jair Bolsonaro) ने ब्राजील को UN समर्थित WHO से अलग कर देने की धमकी दी है.

ब्राजील में कोरोनोवायरस पॉजिटिव मामलों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. इतना ही नहीं, शुक्रवार को 1,473 मौतों के दैनिक रिकॉर्ड के साथ ब्राजील ने इटली को पछाड़ दिया है और रोजाना होने वाली मौतों के मामले में तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया है. हालांकि, इन आंकड़ों का ब्राजील के राष्ट्रपति पर कोई असर नहीं पड़ रहा. वो अर्थव्यवस्था को फिर से शुरू करने और राज्य में लगे प्रतिबंधों को हटाने पर बहस कर रहे हैं. 

ब्राजील के एक दैनिक समाचार पत्र फोल्हा डे एस.पाउलो के फ्रंट पेज पर छपे एक संपादकीय में कहा गया है कि वायरस को 'सामान्य फ्लू' और वायरस 'प्रति मिनट एक ब्राजीलियन की जान ले रहा है' कहे हुए बोल्सोनारो को अभी 100 दिन बीत चुके हैं. समाचार पत्र में लखा गया- 'जब आप ये रहे थे, तो ब्राजील के एक और व्यक्ति ने कोरोना वायरस से दम तोड़ दिया.'

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कुछ दिनों पहले, जब विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से ब्राजील में रोजाना बढ़ रही मृत्यु दर और अर्थव्यवस्था को फिर से शुरू करने की योजना के बारे में पूछा गया तो प्रवक्ता मार्गरेट हैरिस ने कहा- 'लैटिन अमेरिका में ये महामारी वास्तव में चिंता में डालने वाली है.'

WHO की इन चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए ब्राजील के राष्ट्रपति, जो मास्क न पहनने और महामारी को गंभीरता से नहीं लेने के लिए बदनाम हैं, उन्होंने कहा कि अगर WHO पक्षपाती राजनीतिक संगठन बनकर रहेगा तो ब्राजील डब्ल्यूएचओ को छोड़ने पर विचार करेगा.

यह पहली बार नहीं है जब बोल्सोनारो को उनके बयानों के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा है. वो कोरोना वायरस को हल्के में लेने के लिए बदनाम रहे हैं, और उनपर महामारी का सहारा लेकर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने के आरोप भी लगे हैं. WHO ने शुक्रवार को की गई बोल्सोनारो की इस टिप्पणी पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.