Brexit: 46 साल बाद यूरोपियन संघ से अलग होगा ब्रिटेन, होंगे ये बड़े बदलाव

ब्रिटेन 2020 के आखिर तक ईयू की आर्थिक व्यवस्था में बना रहेगा, लेकिन उसका नीतिगत मामलों में कोई दखल नहीं होगा. वह ईयू का सदस्य भी नहीं रहेगा. 

Brexit: 46 साल बाद यूरोपियन संघ से अलग होगा ब्रिटेन, होंगे ये बड़े बदलाव
फाइल फोटो

नई दिल्ली: शुक्रवार, 31 जनवरी को ब्रिटेन (Britain) आखिरकार यूरोपियन यूनियन (ईयू) से अलग हो जायेगा. ब्रिटेन रात 11 बजे (स्थानीय समयानुसार) यूरोपीय संघ से अलग होगा. लगभग 4 साल तक चली खींचतान के बाद ईयू संसद ने 49 के मुकाबले 621 मतों के बहुमत से ब्रेग्जिट (Brexit) समझौते पर मुहर लगा दी है. आपको बता दें कि ब्रिटेन 2020 के आखिर तक ईयू की आर्थिक व्यवस्था में बना रहेगा, लेकिन उसका नीतिगत मामलों में कोई दखल नहीं होगा. वह ईयू का सदस्य भी नहीं रहेगा. 

क्या है ये पूरा मसला
यूरोपीय यूनियन 28 देशों का संगठन है. इन 28 देशों के लोग आपस में किसी भी मुल्क में आ-जा सकते हैं और काम कर सकते हैं. इस वजह से ये देश आपस में मुक्त व्यापार कर सकते हैं. 1973 में ब्रिटेन ईयू में शामिल हुआ था और अब वह बाहर होने वाला पहला देश होगा. ब्रेग्जिट का मतलब है ब्रिटेन का यूरोपीय यूनियन से अलग होना. यानी ब्रिटेन एग्जिट. ईयू की अपनी मुद्रा यूरो है, 19 सदस्य देश इसका इस्तेमाल करते हैं.

2016 में हुई जनता की वोटिंग
ब्रिटेन में 23 जून, 2016 को आम जनता से वोटिंग के जरिए पूछा गया कि क्या ब्रिटेन को ईयू में रहना चाहिए, उस वक्त 52 फीसदी वोट ईयू से निकल जाने के लिए मिले. 48 फीसदी लोगों ने ईयू में बने रहने की पैरवी की. ब्रिग्जेट समर्थकों का कहना है कि देश से जुड़े फैसले देश में ही होने चाहिए. इसके बाद इस पर लंबी बहस हुई, और अब आखिरकार ईयू संसद ने ब्रेग्जिट समझौते को अपनी मंजूरी दे दी है.

ब्रेग्जिट का होगा ये असर
दरअसल ब्रिटेन का ये फैसला हर साल इस देश को करीब 53 हजार करोड़ रु. का नुक्सान देगा. क्युंकी अब न सिर्फ ब्रिटेन में रोजमर्रा की चीजें बल्कि सर्विसेज भी महंगी हो जाएंगी. लोगों के खर्च भी बढ़ेंगे. उनकी आय में कमी होगी. इससे लोगों को 45 हजार करोड़ का नुकसान होगा. ब्रिटेन में इसका प्रति व्यक्ति बोझ 68 हजार रु. आएगा. कुछ दिन पहले ही ब्लूमबर्ग ने रिपोर्ट में 2016 से 2020 तक 18.9 लाख करोड़ के नुकसान का अनुमान जताया है. 

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