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अमेरिका ने कंबोडियाई चुनाव की आलोचना की, कहा- ये दोषपूर्ण चुनाव है

अमेरिकी सरकार ने रविवार को कंबोडिया में 29 जुलाई को हुए ससंदीय चुनाव की आलोचान की है, जिसमें सत्तारूढ़ कम्बोडियन पीपुल्स पार्टी ने जबरदस्त प्रदर्शन किया है.

अमेरिका ने कंबोडियाई चुनाव की आलोचना की, कहा- ये दोषपूर्ण चुनाव है
अंतर्राष्ट्रीय पर्यवेक्षक इस चुनाव की आलोचना कर रहे हैं.(फाइल फोटो)

वॉशिंगटन: अमेरिकी सरकार ने रविवार को कंबोडिया में 29 जुलाई को हुए ससंदीय चुनाव की आलोचान की है, जिसमें सत्तारूढ़ कम्बोडियन पीपुल्स पार्टी ने जबरदस्त प्रदर्शन किया है. सीपीपी ने रविवार को हुए आम चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन देश की सर्वोच्च अदालत द्वारा पिछले साल मुख्य विपक्षी कंबोडिया नेशनल रेस्क्यू पार्टी को गैरकानूनी घोषित किए जाने के बाद जीत की वास्तविकता पर संदेह है. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव सारा हकाबी-सैंडर्स ने एक बयान में कहा, "दोषपूर्ण चुनाव, जो देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी को बाहर करता है, यह कंबोडिया के संविधान में लोकतांत्रिक प्रणाली की स्थापना को लेकर एक बड़ा झटका है. "

बयान में कहा गया है कि रविवार को हुए चुनाव 1991 के पेरिस शांति समझौते के बाद से राजनीतिक सुलह और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में कम्बोडिया की उपलब्धियों की कमी को दर्शाते हैं. 29 जुलाई को हुए मतदान के लिए करीब 83 लाख कम्बोडियाई पंजीकृत थे, जिनमें से ज्यादातर छोटे, हाल ही में गठित दलों के 19 अन्य उम्मीदवार सीपीपी और प्रधानमंत्री हुन सेन के खिलाफ लड़ रहे हैं, जिन्होंने 1985 से दक्षिणपूर्व एशियाई राष्ट्र पर शासन किया है.  

कंबोडिया आम चुनाव : मुख्य विपक्षी पार्टी के बगैर हुआ मतदान
कंबोडिया में आम चुनाव के लिए रविवार सुबह से ही मतदान शुरू हो गया. इस बार चुनाव में देश के मौजूदा प्रधानमंत्री हून सेन के समक्ष किसी मुख्य विपक्षी पार्टी की चुनौती नहीं है. प्रधानमंत्री हून कंबोडियन पीपुल्स पार्टी(सीपीपी) के नेता हैं. उन्होंने यहां से 15 किलोमीटर दूर कंडाल प्रांत के टखमाऊ में सुबह मतदान किया. देश की सर्वोच्च न्यायालय ने 2017 में कंबोडियन नेशनल रेस्क्यू पार्टी(सीएनआरपी) पर प्रतिबंध लगा दिया था.  पार्टी पर सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंकने के लिए विदेशी लोगों के साथ षड़यंत्र रचने का आरोप था.

सीएनआरपी ने इस चुनाव के बहिष्कार की अपील की है. 19 उम्मीदवार हून सेन के खिलाफ लड़ रहे हैं, जिनमें से अधिकतर छोटी पार्टियों या नवनिर्मित पार्टियों के उम्मीदवार हैं.  सून यहां 1985 से सत्ता पर काबिज हैं. कंबोडिया के कुल 83 लाख लोगों ने 125 संसदीय सीटों के लिए यहां अपराह्न् तीन बजे तक मतदान किया.

अंतर्राष्ट्रीय पर्यवेक्षक इस चुनाव की आलोचना कर रहे हैं, और उन्होंने सीपीपी पर धांधली करने के आरोप लगाए हैं. ह्यूमन राइट वाच के एशिया के उपनिदेशक फिल रॉबर्टसन ने ट्वीट किया, "वास्तव में यह चुनाव कंबोडिया के लोकतंत्र का अंतिम संस्कार है. संयुक्त राष्ट्र संघ ने अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ चुनाव की वैधता पर सवाल उठाए हैं.  कंबोडिया सरकार ने हालांकि चुनाव में किसी तरह के कदाचार से इंकार किया है. 

 

इनपुट आईएएनएस से भी