टला खतरा! पहली बार पृथ्वी के बेहद करीब से गुजरा कार के आकार का एस्टेरॉयड

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने एक एसयूवी आकार के एस्टेरॉयड (Asteroid) के पृथ्वी से 1,830 मील ऊपर से गुजरने की जानकारी दी है.

टला खतरा! पहली बार पृथ्वी के बेहद करीब से गुजरा कार के आकार का एस्टेरॉयड
एसयूवी आकार का एस्टेरॉयड पृथ्वी के करीब से गुजरा

वॉशिंगटन: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने एक एसयूवी आकार के एस्टेरॉयड (Asteroid) के पृथ्वी से 1,830 मील ऊपर से गुजरने की जानकारी दी है. नासा ने मंगलवार को बताया कि कार के आकार का यह एस्टेरॉयड पृथ्वी के ऊपर से गुजरा है, लेकिन इससे किसी भी तरह का खतरा नहीं था. 

अमेरिकी एजेंसी के मुताबिक, पहले भी एस्टेरॉयड पृथ्वी के ऊपर से गुजरे हैं, लेकिन यह पहली बार है जब कोई एस्टेरॉयड पृथ्वी के इतना करीब आया हो. नासा की जेट प्रपल्शन लेबोरेटरी (Jet Propulsion Laboratory -JPL) ने कहा कि 2020QG नामक यह एस्टेरॉयड धरती से टकराता भी, तो किसी तरह के नुकसान की आशंका नहीं थी. 

अपने बयान में नासा ने कहा है कि लगभग तीन से छह मीटर लंबा एस्टेरॉयड हिंद महासागर के दक्षिणी हिस्से के ऊपर से रविवार को गुजरा था. यह करीब 8 मील प्रति सेकेंड की रफ्तार से आगे बढ़ रहा था. नासा के अनुसार, पृथ्वी के पास से लगभग इसी आकार के एस्टेरॉयड गुजरते रहते हैं, लेकिन उन्हें रिकॉर्ड करना मुश्किल होता है. ये केवल तभी संभव होता है जब वे सीधे पृथ्वी की तरफ आ रहे हों. ऐसी स्थिति में आमतौर पर वायुमंडल में विस्फोट होता है. 

2013 में रूस का चेल्याबिंस्क भी एक ऐसी ही खगोलीय घटना का गवाह बना था, जब तेज रोशनी छोड़ते हुए एक उल्कापिंड वहां जा गिरा था. इस घटना में एक हजार के आसपास लोग घायल हुए थे. रूसी वैज्ञानिकों ने दावा किया था कि उल्कापिंड धरती के वायुमंडल में करीब 54,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से घुसा और धरती से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर कई छोटे टुकड़ों में बिखर गया.

नासा का मिशन बड़े एस्टेरॉयड (460 फीट) की निगरानी करना है, जो वास्तव में पृथ्वी के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं, लेकिन वह छोटे एस्टेरॉयड को भी ट्रैक करता है. नासा में सेंटर फॉर नियर-अर्थ ऑब्जेक्ट स्टडीज के निदेशक पॉल ने कहा कि छोटे एस्टेरॉयड को पृथ्वी के काफी करीब आते देखना अच्छा लगता है, क्योंकि हम पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण को नाटकीय रूप से मोड़ते हुए देख सकते हैं.

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