चीन जमा करेगा दक्षिण चीन सागर का डेटा, शुरू किया रिसर्च प्रोजेक्ट

चीन ने 1950 के दशक के अंत से विवादित दक्षिण चीन सागर में उसके दलों की यात्रा के दौरान एकत्र किए गए ऐतिहासिक डेटा को संकलित करने के लिए एक अनुसंधान परियोजना आरंभ की है.

चीन जमा करेगा दक्षिण चीन सागर का डेटा, शुरू किया रिसर्च प्रोजेक्ट
चीनी मुख्यभूमि से 800 मील से अधिक तक के दायरे में आने वाले द्वीपों समेत संसाधन समृद्ध दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा करता है. (फाइल फोटो)

बीजिंग: चीन ने 1950 के दशक के अंत से विवादित दक्षिण चीन सागर में उसके दलों की यात्रा के दौरान एकत्र किए गए ऐतिहासिक डेटा को संकलित करने के लिए एक अनुसंधान परियोजना आरंभ की है. चीनी विज्ञान अकादमी के अंतर्गत आने वाले साउथ चाइना सी इंस्टीट्यूट ऑफ ओशियनोलॉजी के उपप्रमुख लॉन्ग लिजुआन ने बताया कि अनुसंधानकर्ता दक्षिण चीन सागर और इससे संबंधित द्वीपों में चीन की बड़ी समुद्री यात्राओं के दौरान प्राप्त मूल्यवान डेटा एवं सामग्री को एकत्र एवं संकलित करेंगे.

सरकारी संवाद समिति शिंहुआ ने आज बताया कि परियोजना उन 14 संसाधन जांच कार्यक्रमों में से एक है जिसे इस साल विज्ञान एवं तकनीक ने स्वीकृति दी थी. डेटा का तुलनात्मक विश्लेषण एवं अनुसंधान दक्षिण चीन सागर एवं उसके सहयोगी द्वीपों संबंधी संसाधनों, पर्यावरण एवं बदलावों की जानकारी मुहैया कराएगा.

परियोजना में समुद्री जीवन, पारिस्थितिकी, मत्स्य एवं भूविज्ञान जैसे क्षेत्रों में विशेज्ञता वाले 10 घरेलू अनुसंधान संस्थाओं एवं विश्वविद्यालयों के 193 विद्वानों ने भाग लिया है. इस परियोजना में मदद के लिए समुद्री यात्रा अभियानों पर जाने वाले सेवानिवृत्त सदस्यों को आमंत्रित किया गया है ताकि डेटा की विश्वसनीयता एवं सटीकता सुनिश्चित की जा सके. चीन फिलीपीन, मलेशिया, ब्रुनेई एवं वियतनाम जैसे पड़ोसियों की आपत्तियों के बावजूद चीनी मुख्यभूमि से 800 मील से अधिक तक के दायरे में आने वाले द्वीपों समेत संसाधन समृद्ध लगभग सम्पूर्ण दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा करता है.