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चीनी मानवाधिकार विद्वानों ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में की संगोष्ठी आयोजित

 गोष्ठी में पाकिस्तान, क्यूबा, वेनेजुएला, डीपीआरके, बेलारूस, निकारागुआ, सऊदी अरब, इंडोनेशिया, वियतनाम, बुरुंडी, लाओस, सिंगापुर और कैमरून समेत कई देशों के अधिकारियों ने संगोष्ठी में भाग लिया.

चीनी मानवाधिकार विद्वानों ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में की संगोष्ठी आयोजित
फाइल फोटो

बीजिंग : संयुक्त राष्ट्र(United Nations) स्थित स्थाई चीनी प्रतिनिधिमंडल और चीनी मानवाधिकार अनुसंधान संघ ने 23 अक्टूबर को न्यूयॉर्क(NewYork) स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में संगोष्ठी आयोजित की. चीन के मानवाधिकार अनुसंधान संघ और इंटरनेशनल एक्सचेंज एसोसिएशन के विद्वानों ने संयुक्त राष्ट्र संघ स्थित संबंधित देशों के प्रतिनिधियों के साथ शिनच्यांग वेवुर स्वायत्त प्रदेश में आतंकवाद और उग्रवाद के विरोध में कदम, तिब्बती बौद्ध धर्म में जीवित बुद्ध के पुन: अवतार और हांगकांग मामलों आदि पर विचार-विमर्श किया। गोष्ठी में पाकिस्तान, क्यूबा, वेनेजुएला, डीपीआरके, बेलारूस, निकारागुआ, सऊदी अरब, इंडोनेशिया, वियतनाम, बुरुंडी, लाओस, सिंगापुर और कैमरून समेत कई देशों के अधिकारियों ने संगोष्ठी में भाग लिया.

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चीनी(China) मानवाधिकार अनुसंधान संघ के सदस्य शू च्येनयिंग ने कहा कि शिनच्यांग में व्यावसायिक कौशल प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना से आतंकवाद और उग्रवाद फैलने का वातावरण खत्म हुआ, जिससे शिनच्यांग में विभिन्न जातीय लोगों का जीवन, स्वास्थ्य और विकास का अधिकार सुनिश्चित किया गया.

चीनी मानवाधिकार अनुसंधान संघ की सदस्य गेसंग ड्रोमा ने कहा कि जीवित बुद्ध का पुन: अवतार तिब्बती बौद्ध धर्म का विशेष तरीका है. इसका कड़ा नियम है. जीवित बुद्ध के पुन: अवतार को केंद्र सरकार की पुष्टि और स्वीकृति लेनी पड़ती है.

चीनी इंटरनेशनल एक्सचेंज एसोसिएशन की विशेषज्ञ छन सिन ने कहा कि हांगकांग(Hongkong) में कानून में सुधार करना अनिवार्य और न्यायोचित भी है. हांगकांग के विभिन्न जगत एकजुट होकर हिंसा का विरोध करते हैं और शीघ्र ही शांति बहाल करने का प्रयास कर रहे हैं.