हरकतों से बाज नहीं आ रहा चीन, मजबूरन US के बाद UK ने भी उठाया ये बड़ा कदम

एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटिश विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे 900 स्नातक के छात्र चीनी सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी से जुड़े हुए हैं.

हरकतों से बाज नहीं आ रहा चीन, मजबूरन US के बाद UK ने भी उठाया ये बड़ा कदम
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (फाइल फोटो).

लंदन: चीन (China) अपनी हरकतों की वजह से अब हर तरफ से घिरता जा रहा है. चीन की हरकतों की वजह से चीनी छात्रों की ब्रिटेन (UK) में नो एंट्री हो सकती है. एक रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन सरकार (UK government) चीन द्वारा उत्पन्न ‘इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी’ (IP) चोरी के खतरे को देखते हुए ब्रिटिश विश्वविद्यालयों (British universities) में चीनी छात्रों पर रोक लगा सकती है.

चीन की गतिविधियां संदिग्ध
ब्रिटेन सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित विषयों पर अध्ययन करने के इच्छुक विदेशी आवेदकों पर रोक लगा सकती है. ब्रिटेन को अंदेशा है कि उसकी ‘इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी’ चोरी करने की कोशिश की जा रही हैं. बताया जा रहा है राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के मंत्रियों ने इस बाबत बन रही पॉलिसी पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इसके बाद सैकड़ों चीनी छात्रों के ब्रिटेन में एडमीशन पर रोक लग सकती है. इतना ही नहीं पहले से ही अध्यन करने वालों में भी जिनकी गतिविधियां संदिग्ध लगेंगी उनका भी वीजा रद्द कर दिया जाएगा.

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US-UK ने लगाया था चीन पर आरोप
कहा जा रहा है कि यह कदम ब्रिटेन की टॉप रिसर्च लैब से बीते दिनों ‘इंटलेक्चुआल प्रॉपर्टी’ चोरी होने की पुष्टि के बाद उठाया गया है. अमेरिका और ब्रिटेन दोनों ने चीनी छात्रों पर आईपी चोरी का आरोप लगाया है. सूत्रों के मुताबिक चोरी की इन कोशिशों के बीच एकैडमिक टेक्नोलॉजी एप्रूवल स्कीम (ATAS) का विस्तार किया जा रहा है. इस बारे में मंत्रिपरिषद स्तर से फैसला लिया जा रहा है.

चीनी सेना से जुड़े छात्र कर रहे हैं रिसर्च चोरी
एक हालिया रिपोर्ट में पाया गया है कि ब्रिटिस विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे 900 स्नातक के छात्र चीनी सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (People's Liberation Army) से जुड़े हुए हैं. ये 33 ब्रिटिश विश्वविद्यालयों में रिसर्च कर रहे हैं. 2018-19 में ब्रिटेन के विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत सभी स्नातकोत्तर छात्रों में से चीनी छात्रों की संख्या 12 प्रतिशत थी. अब इनमें से सैकड़ों छात्रों पर प्रतिबंध लग सकता है.

अमेरिका पहले ही लगा चुका है प्रतिबंध
मई में अमेरिका द्वारा ऐसा ही कदम उठाया गया था. ट्रम्प प्रशासन ने घोषणा की थी कि उसने कुछ चीनी छात्रों और शोधकर्ताओं पर आईपी चोरी करने की कोशिशों के बाद अमेरिका में प्रवेश करने पर प्रतिबंध लगा दिया है.

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