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लादेन को मारने के बाद एबटाबाद के कंपाउंड से 13 ईंटें क्यों ले गए थे अमेरिकी कमांडोज? CIA ने अब दिखाई तस्वीर

Abbottabad Brick: CIA ने अपने एक्स अकाउंट से ईंट की तस्वीर पोस्ट की है. जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है. इस ईंट का कनेक्शन आतंकी ओसामा बिन लादेन से है. जिसे मारने के बाद अमेरिकी जवान इन ईंटों को लेकर गए.

लादेन को मारने के बाद एबटाबाद के कंपाउंड से 13 ईंटें क्यों ले गए थे अमेरिकी कमांडोज? CIA ने अब दिखाई तस्वीर

CIA: CIA ने अपने एक्स अकाउंट से ईंट की तस्वीर पोस्ट की है. जिसके बाद सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा छिड़ गई है कि आखिर ये ईंट क्यों पोस्ट की है. CIA को एबटाबाद कंपाउंड से फोरेंसिक आर्टिफैक्ट के तौर पर 13 ईंटें मिलीं, इन ईंटों पर A,M, या S अक्षर की मुहर लगी थी और ये मई 2011 की रेड के बाद बिल्डिंग मटीरियल के ढेर में मिली थीं. इन ईंटों का कनेक्शन आतंकी ओसामा बिन लादेन से है जिसे US आर्मी के द्वार मार गिराया गया था. 

एबटाबाद में लादेन ने बिताया था अंतिम दिन

CIA के मुताबिक, ईंट पाकिस्तान के एबटाबाद में उस भारी सुरक्षा वाले कंपाउंड से आई थी, जो US इतिहास के सबसे कड़ी सुरक्षा वाले इंटेलिजेंस ऑपरेशन में से एकथा. ऑपरेशन नेप्च्यून स्पीयर के तहत की गई इस रेड में एक दशक बाद बिन लादेन मारा गया था. इस पोस्ट ने सोशल मीडिया पर ध्यान खींचा है, केवल ईंट की वजह से नहीं, बल्कि इस वजह से कि यह किस चीज का प्रतीक थी. इन्हें शायद कंस्ट्रक्शन मटीरियल को वेरिफाई करने, साइट की शुरुआत का एनालिसिस करने और इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करने के लिए इकट्ठा किया गया था, जो बाद में CIA म्यूजियम के कलेक्शन का हिस्सा बन गईं. बता दें कि ओसामा बिन लादेन ने 2011 में US सेना द्वारा मारे जाने से पहले अपने आखिरी साल बिताए थे. 

CIA ने कैसे किया लादेन को ट्रैक

CIA ने इस तस्वीर के साथ एबटाबाद रेड के पीछे के इंटेलिजेंस ऑपरेशन की डिटेल्ड हिस्टोरिकल जानकारी भी दी, एजेंसी के मुताबिक, एनालिस्ट्स ने पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में इस्लामाबाद से लगभग 35 मील उत्तर में एबटाबाद में एक संदिग्ध कंपाउंड की पहचान की. घर तुरंत ही सबकी नजरों में आ गया.  कंपाउंड में कांटेदार तार लगी असामान्य रूप से ऊंची दीवारें, डबल सिक्योरिटी गेट और धुंधली खिड़कियां थीं.

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नहीं दिख रहा था कोई कनेक्शन

वहां कोई इंटरनेट या टेलीफोन कनेक्शन नहीं दिख रहा था, कचरा बाहर से इकट्ठा करने के बजाय अंदर ही जला दिया जाता था, यह एक और ऑपरेशनल गड़बड़ी थी जिसने ध्यान खींचा. CIA एनालिस्ट्स ने यह भी नोट किया कि रजिस्टर्ड मालिकों के पास इतने बड़े और सुरक्षित घर को चलाने के लिए कोई साफ फाइनेंशियल प्रोफाइल नहीं थी. कुल मिलाकर, अधिकारियों ने यह नतीजा निकाला कि कंपाउंड शायद बिन लादेन और उसके अंदरूनी नेटवर्क को पनाह दे रहा था. इसके बाद साल 2011 में अमेरिकी स्पेशल ऑपरेशन फोर्स की एक छोटी टीम ने एक गुप्त हेलीकॉप्टर हमले में एबटाबाद में प्रवेश किया और फिर उसका अंजाम ये हुआ कि ओसामा बिन लादेन मारा गया.

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Abhinaw Tripathi

Zee News में नेशनल डेस्क पर देश–विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरें लिखते हैं. करियर का आगाज 2023 से (Zee Media) से हुआ. डिजिटल डेस्क पर खबरें लिखने के लिए अलावा साहित्य से भी गहरा नाता है. खबरों के अल...और पढ़ें

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