योग दिवस पर यूएन महासचिव ने कहा, 'नस्ल, आस्था, लिंग और यौन रूझान से ऊपर उठकर एकता का संकल्प लें'

योग का संदेश ‘सद्भावना को बढ़ावा देना’ है, इस बात का उल्लेख करते हुए संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने आज सभी देशों के नागरिकों से कहा कि वे नस्ल, आस्था, लिंग और यौन रूझान से ऊपर उठकर एकता का संकल्प लें।

योग दिवस पर यूएन महासचिव ने कहा, 'नस्ल, आस्था, लिंग और यौन रूझान से ऊपर उठकर एकता का संकल्प लें'

संयुक्त राष्ट्र: योग का संदेश ‘सद्भावना को बढ़ावा देना’ है, इस बात का उल्लेख करते हुए संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने आज सभी देशों के नागरिकों से कहा कि वे नस्ल, आस्था, लिंग और यौन रूझान से ऊपर उठकर एकता का संकल्प लें।

बान ने दूसरे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर अपने संदेश में कहा, ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर मैं हर किसी से आग्रह करता हूं कि सेहतमंद जीवनशैली अपनाएं तथा नस्ल, आस्था, उम्र, लिंग और लैगिंक पहचान अथवा यौन रूझान से ऊपर उठकर सभी इंसानों के साथ एकता का संकल्प लें। इस दिन और हर दिन को समान मानव परिवार के सदस्य के तौर पर मनाएं।’ उन्होंने नागरिकता और यौन रूझान से इतर इंसानों के बीच समानता का आह्वान किया जिसका पिछले सप्ताह अमेरिका ओरलैंडो के एक गे क्लब में हुई गोलीबारी की घटना के मद्देनजर खासा महत्व है। अफगान मूल के युवक उमर मतीन ने ओरलैंडे के क्लब में गोलीबारी की थी जिसमें 49 लोग मारे गए थे और 50 से अधिक घायल हो गए थे।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव का योग दिवस पर संदेश यहां योग दिवस की पूर्व संध्या पर भारत के स्थायी मिशन में आयोजित एक विशेष परिचर्चा के दौरान पढ़ा गया। वरिष्ठ राजनयिक और म्यामांर मामले पर बान के विशेष सलाहकार विजय नाम्बियार ने यह संदेश पढ़ा। बान ने कहा कि योग की प्राचीन शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक क्रिया भारत से पैदा हुई और अब इसे पूरी दुनिया में किया जा रहा है।

बान ने कहा, ‘योग शरीर और आत्मा, शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य को संतुलित करता है। यह लोगों के बीच सद्भाव बढ़ाता है।’ उन्होंने कहा कि दूसरा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाना सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने में स्वस्थ जीवन की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।

संरा महासचिव ने कहा, ‘योग करने से हमें इस ग्रह के संस्थानों के उपभोगता के तौर पर अपनी भूमिका के बारे में जागरूकता बढ़ाने और अपने पड़ोसियों का सम्मान करने एवं उनके साथ शांति के साथ रहने में मदद मिलती है।’ उधर, जानेमाने आध्यात्मिक नेता और ईसा फाउंडेशन के संस्थापक सदगुरू जग्गी वासुदेव ने कहा कि योग दुनिया को भारत का उपहार है।

उन्होंने कहा, ‘हमें यह समझना चाहिए कि योग कोई भारतीय (चीज) नहीं है। अगर आप योग को भारतीय कहना चाहते हैं तो फिर गुरूत्वाकषर्ण को यूरोपीय कहिए।’ सदगुरू ने कहा, ‘हां योग की उत्पत्ति भारत से हुई और भारतीय के तौर पर हमें इस पर गर्व है, परंतु यह भारत का नहीं है।’ इस परिचर्चा में अमेरिकी नेता रॉबर्ट एफ कैनेडी के पुत्र एवं जानेमाने लेखक मैक्स कैनेडी तथा कई अन्य राजनयिकों ने अपने विचार रखे।