बहुपक्षीय संस्थाओं में बड़े सुधार की जरूरत, MEA ने दोहराई PM मोदी की बात

विदेशमंत्री ने कहा कि भले ही कुछ चीजों को लेकर हमारे बीच मतभेद हो सकते हैं लेकिन कोरोना संकट का मुकाबला करने के लिए समन्वय और सहयोग के साथ काम करना पड़ेगा.

बहुपक्षीय संस्थाओं में बड़े सुधार की जरूरत, MEA ने दोहराई PM मोदी की बात
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कोरोना संकट को लेकर दुनिया को जरूरी सलाह दी है...

नई दिल्ली : कोरोना संकट के बीच विदेशमंत्री एस जयशंकर (S.Jaishankar) ने बहुपक्षीय संस्थाओं पर आए खतरे से आगाह करते हुए और मजबूती से काम करने की सलाह दी है. यूएन की बहुपक्षीय बैठक के दौरान  विदेशमंत्री ने कोरोना वायरस से मुकाबले के लिए एक सामूहिक सहयोग और समन्वय के साथ आगे बढ़ने पर जोर दिया.

विदेशमंत्री ने कहा कि भले ही कुछ चीजों को लेकर हमारे बीच मतभेद हो सकते हैं लेकिन कोरोना संकट का मुकाबला करने के लिए समन्वय और सहयोग के साथ काम करना पड़ेगा. उन्होने कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो इसे इतने बड़े तंत्र की खराबी कहा जाएगा.

गौरतलब है कि विदेशमंत्री एस जयशंकर का ये बयान भारत की ओर से हो रही उन कोशिशों के बीच आया है जब देश की ओर से खुलकर संयुक्त राष्ट्र संघ में सुधारों की जरूरत पर जोर देते हुए स्थाई सीट की मांग की जा रही है. गौरतलब है कि सुरक्षा परिषद की स्थाई सीट को लेकर भारत लंबे समय से प्रयास कर रहा है. परिषद में चीन को छोड़ बाकी सभी देश रूस, अमेरिका, यूके, फ्रांस की स्थाई सदस्यता की मांग का समर्थन कर रहे हैं.

ग्लोबल सप्लाई चेन पर चिंता
विदेश मंत्री ने वैश्विक आपूर्ति से जुड़ी चेन को लेकर कहा कि कोरोना महामारी के बीच किसी एक देश पर निर्भर होना सही नहीं है. गौरतलब है कि पीएम मोदी ने भी डेनमार्क समिट के दौरान ग्लोबल सप्लाई चेन को लेकर समान सोंच वाले देशों से मिलकर साथ काम करने की अपील की थी. गौरतलब है कि यूएन में इस मुहिम के चलते मोदी सरकार आत्म निर्भर भारत के मिशन को तेजी से आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है. 

ऐसे में कोरोना संकट के दौरान पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि हमारी सोंच और रणनीति हालात संभालने के लिए स्थायित्व को मजबूती देने से जुड़ी है. फिर चाहे बात सीमा के इस पार की हो या उस पार इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. 

महामारी में भारत की महामदद
विदेशमंत्री ने कहा कि कोरोना संकट के दौरान भारत ने महामारी की मुसीबत से छुटकारा दिलाने के लिए भागीरथ प्रयास किए. कई देशों कों दवा , मेडिकल उपकरण समेत जरूरी सहायता मुहैया कराई गई. भारत ने करीब 150 देशों को हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन और पैरासीटामोल (Hydroxychloroquine & Paracetamol) जैसी जरूरी दवाएं भेजीं. वहीं दुनिया के सबसे बड़े घर वापसी अभियान मिशन 'वंदे भारत' को भी सफलता से पूरा किया.

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