DNA ANALYSIS: Cristiano Ronaldo ने कभी किया था Coca Cola का प्रचार, अब क्यों बदला रवैया?

Cristiano Ronaldo: प्रेस कॉन्फ्रेंस में कोका कोला की बोतल हटाने वाले क्रिस्टियानो रोनाल्डो वर्ष 2006 में कोका कोला  की सॉफ्ट ड्रिंक्स का प्रचार कर चुके हैं. अब लोग पूछ रहे हैं कि कोका कोला के लिए विज्ञापन कर चुके रोनाल्डो ने अब ऐसा क्यों किया.

DNA ANALYSIS: Cristiano Ronaldo ने कभी किया था Coca Cola का प्रचार, अब क्यों बदला रवैया?

नई दिल्ली: आज DNA में हम एक ऐसे वीडियो का विश्लेषण करेंगे, जिसने एक झटके में कोका कोला के 30 हजार करोड़ रुपये डुबा दिए. ये वीडियो इस समय सोशल मीडिया पर काफी वायरल है और शायद आपने भी इसे अब तक देख लिया होगा. लेकिन इस वीडियो के पीछे की असली खबर क्या है, आज हम आपको इसके बारे में बताएंगे.

कोका कोला को 30 हजार करोड़ रुपये का नुकसान

ये वीडियो फुटबॉल की सबसे बड़ी चैम्पियनशिप्स में से एक यूरो कप की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का है, जिसमें दुनिया के मशहूर फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो को कोका कोला की बोतल हटाते हुए देखा गया.

रोनाल्डो ने न सिर्फ इन बोतलों को हटाया, बल्कि इन्हें कैमरे के फ्रेम से भी बाहर कर दिया और साथ में रखी पानी की बोतल उठा कर ऐसा इशारा किया कि कोका कोला की बोतल से अच्छा तो पानी है. लेकिन उनके सिर्फ इतना करने से ही कोका कोला के 4 बिलियन डॉलर यानी 30 हजार करोड़ रुपये डूब गए और कंपनी के शेयर की कीमत 1.6 प्रतिशत तक गिर गई.

अब इस वीडियो ने कोका कोला के करोड़ों रुपये तो डुबाए ही. साथ ही इससे ऐसी कंपनियों के सॉफ्ट ड्रिंक्स की भी आलोचना होने लगी और इस आलोचना का कारण थे, क्रिस्टियानो रोनाल्डो.

लेकिन इस आलोचना और कोका कोला को हुए नुकसान के बाद क्या हुआ, अब हम आपको वो बताते हैं.

इसी कंपनी के लिए विज्ञापन कर चुके हैं रोनाल्डो

प्रेस कॉन्फ्रेंस में कोका कोला की बोतल हटाने वाले क्रिस्टियानो रोनाल्डो वर्ष 2006 में कोका कोला की सॉफ्ट ड्रिंक्स का प्रचार कर चुके हैं. अब लोग पूछ रहे हैं कि कोका कोला के लिए विज्ञापन कर चुके रोनाल्डो ने अब ऐसा क्यों किया.

हम रोनाल्डो के ऐसा करने की वजह बताएंगे, लेकिन पहले आप एक और वीडियो के बारे में जान लीजिए.

कई दूसरी कंपनियों का भी हो रहा विरोध

रोनाल्डो के बाद इटली के फुटबॉलर Manuel Locatelli ने भी कुछ ऐसा ही किया और अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कोका कोला की बोतलों को हटा दिया. यहां बता दें कि कोका कोला की कंपनी अकेली नहीं है, जिसका यूरो कप के दौरान विरोध हो रहा है.

फ्रांस के मशहूर फुटबॉलर Paul Pogba ने भी अपनी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनके सामने रखी Heineken की अल्कोहल फ्री बियर को हटा दिया. इस्लाम धर्म में शराब को कुफ्र माना गया है यानी इसमें सच्चे मुसलमान को शराब पीना मना है और इसीलिए Paul Pogba ने ऐसा किया. ये विरोध Coca Cola और Heniken तक ही सीमित नहीं है.

यूरो कप की एक और स्पॉन्सर कंपनी Volkswagen का भी विरोध हो चुका है. 15 जून को फ्रांस और जर्मनी के बीच खेले गए एक मैच के दौरान एक व्यक्ति पैराशूट के साथ ग्राउंड पर आ गया और इसने ऐसा इसलिए किया क्योंकि, Volkswagen पर धोखाधड़ी करके अमेरिका में अपनी गाड़ियों से प्रदूषण फैलाने का आरोप है और इसके लिए इस कंपनी पर वहां 25 बिलियन डॉलर यानी 1 लाख 87 हजार करोड़ रुपये जुर्माना लग चुका है.

विरोध की वजह

अब सवाल है कि इन सारी कंपनियों का विरोध क्यों हो रहा है?

तो विरोध की वजह ये है कि इस तरह के स्पोर्ट्स इवेंट्स काफी लोकप्रिय होते हैं और ये लोगों को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं. खेल के बहाने कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स बेचती हैं और लोग इन प्रोडक्ट्स से जुड़ जाते हैं.

अमेरिका की एक मैगजीन सोशल मीडिया वीक की स्टडी के मुताबिक, जब कोई सेलिब्रिटी किसी प्रोडक्ट को एंडोर्स करता है तो उस प्रोडक्ट की बिक्री भी काफी बढ़ने लगती है और इस दौरान लोग ये भी नहीं देखते कि उस प्रोडक्ट से उनके स्वास्थ्य को कितना नुकसान होगा.

उदाहरण के लिए जब वर्ष 1986 में FIFA World Cup का आयोजन मेक्सिको में हुआ था, तब अमेरिका की बड़ी तंबाकू कंपनी R. J. Reynolds इसकी प्रमुख स्पॉन्सर कंपनी थी,  लेकिन उस समय मेक्सिको में सिगरेट के विज्ञापन पर पूरी तरह पाबंदी थी और इसी वजह से इस कंपनी  को स्पॉन्सर से हटाने की मांग की गई. हालांकि FIFA के तत्कालीन अध्यक्ष ने मेक्सिको की सरकार पर इसके लिए दबाव बनाया और मेक्सिको कानून होने के बावजूद खेलों का आयोजन कराने के लिए तैयार हो गया. 

ऐसा कहा जाता है कि उस समय इससे मेक्सिको में सिगरेट का क्रेज लोगों के बीच काफी बढ़ा.

एक दिलचस्प बात ये है कि 20वीं शताब्दी की शुरुआत में सिगरेट के पैकेट्स पर कैंसर जैसी चेतावनियां नहीं लिखी होती थीं, बल्कि इस पर फुटबॉल का चिन्ह होता था और लोग सिगरेट पीना फैशन का हिस्सा मानते थे. आज भी कई लोग ऐसा मानते हैं.

रोनाल्डो अकेले नहीं

ऐसा नहीं है कि रोनाल्डो पहले ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने इस तरह किसी कंपनी के प्रोडक्ट का प्रचार करने से खुद को अलग किया है.

इससे पहले भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली भी ऐसा कर चुके हैं. वर्ष 2017 में उन्होंने ऐलान किया था कि वो कभी किसी सॉफ्ट ड्रिंक का प्रचार नहीं करेंगे, लेकिन इस फैसले से पहले तक वो भारत में पेप्सी के ब्रांड एम्बेसडर थे.

साल 2012 में Brazil के पूर्व फुटबॉलर Ronaldinho का कोका कोला कंपनी के साथ करार था, लेकिन वो एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पेप्सी की दो केन लेकर पहुंच गए थे. इस गलती के लिए तब Ronaldinho ने 10 लाख पाउंड यानी 10 करोड़ रुपये रुपये का नुकसान उठाया और कोका कोला कंपनी ने उनके साथ करार को तोड़ लिया.

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