कयामत की घड़ी का इशारा, दुनिया 'महाप्रलय' के खतरे से सिर्फ 100 'सेकंड' पीछे

'महाविनाश' के करीब आ गई दुनिया? 100 सेकंड और... दुनिया ख़त्म !

कयामत की घड़ी का इशारा, दुनिया 'महाप्रलय' के खतरे से सिर्फ 100 'सेकंड' पीछे
एटमी वार का संकेत देने वाली घड़ी 'डूम्सडे क्लॉक' 1947 के बाद से अब सबसे अधिक तनावपूर्ण मुकाम पर है. (फोटो साभार: सोशल मीडिया)

वॉशिंगटन/नई दिल्ली: जापान के हिरोशिमा और नागासाकी शहरों पर परमाणु हमले के बाद दुनियाभर के वैज्ञानिकों को यह फिक्र सताने लगी कि कहीं इस तरह की घटनाएं पूरी धरती के विनाश का सबब न बन जाएं. इसी सोच से एक आइडिया निकलकर सामने आया आइडिया एक ऐसी घड़ी बनाने का आया जो दुनिया के सामने मौजूद विनाश की चुनौतियों को दर्ज करे. साथ ही ये घड़ी दुनिया को इस बारे में अलर्ट भी करे कि इंसानों के कौन से काम धरती की तबाही की वजह बन सकते हैं. ऐसी ही घड़ी बनाने के मकसद से 15 वैज्ञानिकों के एक दल ने नॉन टेक्निकल एकेडमिक जर्नल के रूप में एक संगठन- 'द बुलेटिन ऑफ द अटॉमिक साइंटिस्ट्स' का गठन किया. जिसमें मशहूर वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग भी शामिल हैं. यह संगठन ऐसे खतरों का आंकलन कर समय-समय पर दुनियाभर के लोगों को आगाह करता है कि धरती तबाही के कितने करीब है.

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान हिरोशिमा और नागासाकी पर एटमी हमले से हुए भारी विनाश के दो साल बाद 1947 में पहली बार 'डूम्स डे क्लॉक' को आधी रात यानी बारह बजे से 420 सेकंड की दूरी पर सेट किया गया था. उस वक्त माना गया कि इस घड़ी में 12 बजने का मतलब होगा कि अब धरती पर इंसान की तरफ से तैयार की गई प्रलय का वक्त आ गया है. साल दर साल 'डूम्सडे क्लॉक' (Doomsday clock) में बदलाव किया जाता रहा. इन बदलावों के पीछे परमाणु युद्ध, जलवायु परिवर्तन, जैव सुरक्षा, आतंकवाद, साइबर टेरर, हैकिंग और आर्टिफिशल इंटेलिजेंस जैसे कई खतरे और टॉप पदों पर बैठे लोगों की बयानबाजी को वजह बताया गया है.
 
यहां बता दें कि 1947 के बाद 'डूम्स डे क्लॉक' की सुइयां 1949 में आधी रात से सिर्फ 3 मिनट की दूरी पर सेट की गई थीं, क्योंकि उस साल तत्कालीन सोवियत संघ ने अपने पहले परमाणु हथियार का परीक्षण किया था.

फासला ज्यादा नहीं रह गया
इसके बाद के साल यानी 1953 में जब अमेरिका ने पहले हाइड्रोजन बम का टेस्ट किया, तो डूम्सडे क्लॉक में प्रलय का वक्त सिर्फ 2 मिनट दूर माना गया. हालांकि 1969 में जब परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर किए गए, तो इस घड़ी की सुइयां पीछे हटाकर आधी रात से 10 मिनट की दूरी पर ले जाई गईं. अब एक बार फिर दुनिया पर तबाही का खतरा मुंह फैलाए खड़ा है और फासला ज्यादा नहीं रह गया है.

सब कुछ ठीक नहीं
दरअसल, तबाही की तारीख बदल गई है. कयामत की घड़ी में वक्त का बदलना ये इशारा कर रहा है कि सब कुछ ठीक नहीं चल रहा. डूम्स डे क्लॉक यानी प्रलय के आंकलन की प्रतीकात्मक घड़ी के समय में फिर बदलाव हुआ है. घड़ी में मिडनाइट यानी तबाही का वक्त ज्यादा दूर नहीं है.

सबसे अधिक तनावपूर्ण मुकाम पर घड़ी का कांटा
कयामत की घड़ी यानी ‘डूम्सडे क्लॉक’ की सुई को आधी रात 12 बजे के 100 सेकंड पीछे ला दिया है. इस घड़ी के मुताबिक आधी रात होने में जितना कम वक्त रहेगा, दुनिया परमाणु और जलवायु संकट के उतने ही करीब रहेगी. अमेरिका और रूस के शीतयुद्ध के दौरान भी इसका कांटा आधी रात से 120 सेकंड दूर रखा गया था, लेकिन पहली बार घड़ी का कांटा 120 सेकंड के अंदर चला गया है. यानी इस बार सुई का कांटा 73 साल के इतिहास में सबसे अधिक तनावपूर्ण मुकाम पर है.

डूम्स डे क्लॉक में इस बार क्यों बदला वक्त?
दुनिया में परमाणु हथियारों के खतरे की स्थिति चरम पर है. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव को देखकर न्यूक्लियर वॉर की आशंका बनी हुई है. ईरान परमाणु समझौते को राजी नहीं है. उत्तर कोरिया लगातार परमाणु क्षमता बढ़ा रहा है. चीन, पाकिस्तान और भारत के बीच न्यूक्लियर हथियारों को लेकर होड़ बढ़ती जा रही है और जलवायु परिवर्तन और धरती-समुद्र का तापमान बढ़ता जा रहा है.

आखिर क्या है 'डूम्सडे क्लॉक'
'डूम्स डे क्लॉक' प्रलय के आकलन की प्रतीकात्मक घड़ी है. 1947 में डूम्स डे क्लॉक को बनाया गया था. हिरोशिमा, नागासाकी पर परमाणु हमले के बाद वैज्ञानिकों ने डूम्स डे क्लॉक बनायी थी.

डूम्स डे क्लॉक की भविष्यवाणी 'द बुलेटिन ऑफ द एटॉमिक साइंटिस्ट्स' में छपती है. परमाणु वैज्ञानिकों की एक टीम इसके कांटे को आगे या पीछे करती है. इस टीम में 13 नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक भी शामिल हैं.

अब तक 19 बार वक्त बदला जा चुका है
 2017 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के न्यूक्लियर हथियारों के इस्तेमाल को लेकर दिये गये बयानों ने युद्ध का माहौल बना दिया था...जिसके बाद डूम्स डे क्लॉक की सुइयों को 30 सेकंड आगे खिसकाया गया था, लेकिन डूम्स डे क्लॉक में मिडनाइट यानी तबाही का ये वक्त 180 सेकंड दूर था. लेकिन इस बार फासला महज 100 सेकंड का है. जाहिर है दुनिया की तबाही का खतरा नए साल के शुरुआती महीने में बढ़ चुका है यानी पूरी दुनिया तबाही के मुहाने पर खड़ी है.

किस देश के पास कितने परमाणु हथियार ?
रूस- 6,490                 
अमेरिका- 6,185           
फ्रांस- 300                 
चीन- 290      
ब्रिटेन- 200              
पाकिस्तान- 160
भारत- 140             
इज़राइल- 90          
उत्तर कोरिया- 30