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दुनिया में 'महाप्रलय' की आ गई नई तारीख, सबकुछ हो जाएगा खत्म: शोधकर्ता

शोधकर्ताओं ने शोध में पाया है कि करीब 26 करोड़ साल पहले धरती पर पहली बार महाप्रलय (Cataclysm) हुआ था, जिसके बाद से छह बार ऐसा हो चुका है. शोध में बता चला है छह बार यह धरती पर जीव-जंतुओं से विहीन हो चुकी है. एक बार फिर से ऐसी संभावना बन रही है. 

दुनिया में 'महाप्रलय' की आ गई नई तारीख, सबकुछ हो जाएगा खत्म: शोधकर्ता
शोध में दावा किया गया है कि 26 करोड़ वर्ष के बाद महाप्रलय होता है.

न्यूयॉर्क. जब 1999 के बाद साल 2000 आने वाला था तो मीडिया में कई ऐसे रिपोर्ट्स प्रकाशित हुए थे, जिसमें सृष्टि के खत्म होने का दावा किया गया था. हालांकि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. अब एक बार फिर से सृष्टि के विनाश की आशंका जताई जा रही है. गौर करने वाली बात यह है कि यह दावा कोई धार्मिक नेता या जादूगर नहीं बल्कि शोधकर्ता अपने अध्ययन के आधार पर कर रहे हैं. शोधकर्ताओं ने शोध में पाया है कि करीब 26 करोड़ साल पहले धरती पर पहली बार महाप्रलय (Cataclysm) हुआ था, जिसके बाद से छह बार ऐसा हो चुका है. शोध में बता चला है छह बार यह धरती पर जीव-जंतुओं से विहीन हो चुकी है. एक बार फिर से ऐसी संभावना बन रही है. अमेरिका में न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मिशेल रेम्पिनो ने शोध रिपोर्ट पेश की है. 

शोध की मुख्य बातें-:
न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक सृष्टि के विनाश के कारणों की जांच के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंचा जा सका है कि पृथ्वी पहले भी जीव-जन्तु विहीन भी हो चुकी है. सामूहिक विनाश की सभी घटनाएं पर्यावरणीय उथल-पुथल के कारण हुई थीं. शोध के आधार पर दावा किया गया है कि पृथ्वी पर महाप्रलय (Cataclysm) बाढ़ और ज्वालामुखी विस्फोट जैसी घटनाओं के चलते हुई थीं. दावा किया जा रहा है कि ज्वालामुखी विस्फोट के बाद लाखों किलोमीटर तक धरती पर लावा फैल गया था, जिसके चलते सारे जीव-जन्तुओं का नाश हो गया था.

यहां आपको बता दें कि इससे पहले वैज्ञानिकों का अनुमान था कि धरती का पांच बार विनाश हो चुका है. इसी वजह से धरती पर से कई जीव-जन्तुओं की प्रजाति पूरी तरह विलुप्त हो गई हैं. भूवैज्ञानिक ने सामूहिक विनाश की इन अवधियों को ऑर्डोविशियन (44.3 करोड़ साल पहले), लेट डेवोनियन (37 करोड़ वर्ष पहले), पर्मियन (25.2 करोड़ वर्ष पहले), ट्रायसिक (20.1 करोड़ वर्ष पहले) और क्रेटेशियस (6.6 करोड़ वर्ष पहले) में बांटा है.

शोध का अनुमान
शोध रिपोर्ट में कहा गया है कि धरती का ताप जिस तरीके से बढ़ रहा है उसे देखते हुए सातवीं बार महाप्रलय (Cataclysm) हो सकता है. इसमें ये भी कहा गया है कि कई जीवों की प्रजातियां विलुप्त हो चुकी हैं. शोधकर्ताओं ने कहा है कि ऐसी ही परिस्थिति बनने पर पहले महाप्रलय (Cataclysm) की घटनाएं हो चुकी हैं, इसलिए एक बार फिर से सृष्टि के खात्मे का अनुमान है.

हिस्टोरिकल बायोलॉजी में प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि 27.2 करोड़ से लेकर 26 करोड़ वर्ष के बाद महाप्रलय (Cataclysm) होते हैं. अब यह समय अवधि पूरा होने को है. ऐसे में एक बार फिर से महाप्रलय (Cataclysm) हो सकता है. इस दौरान सबसे ज्यादा धरती और महासागर प्रभावित हुए थे.

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