एंजेला मर्केल ने उठाया सरकार गठन की दिशा में पहला कदम, शरणार्थी मुद्दा उछला

सीएसयू नेता हॉर्स्ट सीहॉफर ने शरणार्थियों की संख्या प्रतिवर्ष दो लाख तक सीमित करने की मांग रखी है, लेकिन मर्केल इस मांग को असंवैधानिक बताते हुए लगातार अस्वीकार कर रही हैं.

एंजेला मर्केल ने उठाया सरकार गठन की दिशा में पहला कदम, शरणार्थी मुद्दा उछला
एंजेला मर्केल तीन बार देश की चांसलर बन चुकी हैं. (फाइल फोटो)

बर्लिन: जर्मनी में चुनाव जीतने के दो हफ्तों बाद चांसलर एंजेला मर्केल ने रविवार (8 अक्टूबर) को सरकार के गठन की दिशा में पहला कदम उठाया. उन्हें पूर्ण बहुमत हासिल नहीं हुआ है और सरकार बनाने की राह आसान नहीं है. ब्राविया की सिस्टर पार्टी सीएसयू के प्रतिनिधियों के साथ उनकी बैठक के साथ ही गठबंधन संबंधी लंबी बातचीत शुरू हो गई. इस वार्ता में चार पार्टियां शामिल हैं जो मंत्री पदों के लिए मोलभाव करेंगी और यूरोपीय संघ से लेकर जलवायु नीति जैसे मुद्दों को उठाएंगी. मर्केल ने बीते दो वर्षों में दस लाख से ज्यादा शरणार्थियों को शरण दी है. इससे संबंधित सवाल भी मर्केल के सामने खड़े होंगे. उनके इस फैसले से धुर दक्षिणपंथी दल अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी को अपने आश्चर्यजनक उत्थान में मदद मिली. सीएसयू नेता हॉर्स्ट सीहॉफर शरणार्थियों के लिए दरवाजे खोलने की नीति के कड़े आलोचक हैं. उन्होंने शरणार्थियों की संख्या प्रतिवर्ष दो लाख तक सीमित करने की मांग रखी है, लेकिन मर्केल इस मांग को असंवैधानिक बताते हुए लगातार अस्वीकार कर रही हैं.

जर्मनी की 'आयरन लेडी' एंजेला मर्केल, जो अपने बूते बदलाव लाने का माद्दा रखती हैं

एंजेला मर्केल एक बार फिर इतिहास दोहरा चुकी हैं. वह जर्मनी के संघीय चुनाव में जीत दर्ज कर चौथी बार देश की चांसलर बनने जा रही हैं. हालांकि, उनकी यह जीत उतनी आसान नहीं रही. इस बार शरणार्थी संकट, बेरोजगारी और हिचकोले खाती देश की अर्थव्यवस्था जैसे कुछ ऐसे मुद्दे थे, जो मर्केल की उम्मीदों पर पानी फेर सकते थे, लेकिन मर्केल ने अपने करिश्माई व्यक्तित्व के कारण यह अग्निपरीक्षा पास कर ली. एंजेला विश्व की एकमात्र ऐसी महिला नेता हैं, जो अपने बूते परिवर्तन लाने का माद्दा रखती हैं. वह कई मायनों में दुनिया के अगुवा पुरुष नेताओं को भी पीछे छोड़ देती हैं. उन्हें जमीन से जुड़ी हुई नेता के तौर पर देखा जाता है, जो हर चीज पर कड़ा होमवर्क करती हैं.

एंजेला को राजनीतिक गुर विरासत में मिले हैं. उनकी मां सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी की सदस्य थीं, जो महिलाओं के मुद्दे पर काफी मुखर थीं. यही गुर एंजेला में भी हैं. वह महिलाओं की समस्याओं को कभी नजरअंदाज नहीं करतीं और महिला वर्ग में उनकी अच्छी पैठ होने का यही कारण है. एंजेला साल 2000 से क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन (सीडीयू) पार्टी से जुड़ी थीं और 2005 में देश की पहली महिला चांसलर बनीं. उन्होंने साल 2013 में अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी पर फोन टैप करने का आरोप लगाकर सनसनी फैला दी थी. वह यहीं नहीं रुकीं, उन्होंने यूरोपीय सम्मेलन में अमेरिका पर तंज कसते हुए कहा था, "दोस्तों में जासूसी कभी स्वीकार नहीं की जाती." एंजेला की सीडीयू और क्रिश्चियन सोशल यूनियन (सीएसयू) पार्टी के गठबंधन को लगभग 34 फीसदी वोट मिले हैं. हालांकि, एंजेला की पार्टी का जनाधार पिछले चुनाव की तुलना में घटा है.