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जी-4 शिखर सम्मेलन आज, यूएनएससी सुधार के लिए वार्ता की होगी जोरदार वकालत

भारत, जापान, ब्राजील और जर्मनी पर आधारित जी-4 समूह की शिखर बैठक आज होगी जिसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में शीघ्र सुधारों के लिए अंतरसरकारी वार्ताओं की जोरदार वकालत की जाएगी।

संयुक्त राष्ट्र : भारत, जापान, ब्राजील और जर्मनी पर आधारित जी-4 समूह की शिखर बैठक आज होगी जिसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में शीघ्र सुधारों के लिए अंतरसरकारी वार्ताओं की जोरदार वकालत की जाएगी।

वर्ष 2004 के बाद यह पहला जी-4 शिखर सम्मेलन होगा जिसकी मेजबानी भारत करेगा। इस शिखर सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल, ब्राजील की राष्ट्रपति डिल्मा रोसेफ और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो एबे भाग लेंगे।

नेता बैठक के समापन के बाद एक संयुक्त बयान जारी करेंगे। महासभा ने 14 सितंबर को मौजूदा सत्र में यूएनएससी सुधारों के लिए एक दस्तावेज पर चर्चा करने और दस्तावेज आधारित वार्ता शुरू करने का निर्णय पारित किया था जिसके बाद यह शिखर सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा, चारों नेता संयुक्त राष्ट्र परिषद सुधार की खातिर अंतरसरकारी वार्ता की जोरदार वकालत करने के लिए एक बार फिर मुलाकात कर रहे हैं। स्वरूप ने कहा कि यूएनजीए के निर्णय की पृष्ठभूमि में जी 4 शिखर सम्मेलन महत्वपूर्ण है।

जी4 शिखर सम्मेलन का आयोजन दूसरी बार किया जा रहा है। पहला जी4 शिखर सम्मेलन 2004 में उस समय हुआ था जब चार बहुत महत्वपूर्ण देशों ने परिषद सुधार पर जोर देने के लिए यह समूह गठित किया था।

स्वरूप ने आगे कहा कि संयुक्त राष्ट्र मे सुधार केवल परिषद में सुधार तक ही सीमित नहीं है बल्कि इसमें वैश्विक संस्था की संचालन संरचना में भी सुधार करना शामिल है। उन्होंने जोर देकर कहा कि 15 देशों की परिषद में सुधार और विस्तार बहुत महत्वपूर्ण है। इस वैश्विक संस्था का जब गठन हुआ था, उस समय इसमें केवल 51 देश शामिल थे लेकिन इसके सदस्यों की संख्या अब बढकर 193 हो गई है।

परिषद का 1963 से 1965 के बीच केवल एक बार विस्तार किया गया था। उस सयम अस्थायी सदस्यों की संख्या 11 से बढाकर 15 करने का प्रस्ताव पारित किया गया था।

स्वरूप ने कहा, यह हमें ऐसा महसूस कराता है कि 2015 की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद 21 सदी नहीं बल्कि 1945 की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं का दर्पण है। उन्होंने कहा कि परिषद में सुधार के बाद ही वह मौजूदा समय की चुनौतियों से सही तरीके से निपटने में सक्षम होगी।

स्वरूप ने कहा, हमारे सामने साइबर सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद की चुनौती है। तीन महाद्वीपों में युद्ध की स्थिति है लेकिन सुरक्षा परिषद उनसे निपटने में सक्षम नहीं है। क्यों? क्योंकि यह उचित प्रतिनिधित्व नहीं करती और साथ ही इसकी वैधता पर भी सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद और महासभा के बीच संबंध निर्धारित करने की भी आवश्यकता है।

 

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