भारत और चीन के बीच हो रही है रक्षा एमओयू के नए प्रारूप पर हस्ताक्षर के लिए वार्ता

चीनी सेना के एक शीर्ष अधिकारी ने गुरुवार को कहा कि भारत और चीन 12 साल पुराने एक रक्षा समझौते को अद्यतन करने और विश्वास बहाली के उपायों के तहत दोनों रक्षा मंत्रालयों के बीच एक ‘‘हॉटलाइन’’ स्थापित करने के लिए बातचीत कर रहे हैं.

भारत और चीन के बीच हो रही है रक्षा एमओयू के नए प्रारूप पर हस्ताक्षर के लिए वार्ता
फाइल फोटो

बीजिंग: चीनी सेना के एक शीर्ष अधिकारी ने गुरुवार को कहा कि भारत और चीन 12 साल पुराने एक रक्षा समझौते को अद्यतन करने और विश्वास बहाली के उपायों के तहत दोनों रक्षा मंत्रालयों के बीच एक ‘‘हॉटलाइन’’ स्थापित करने के लिए बातचीत कर रहे हैं. रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल वु कियान ने बताया कि पिछले सप्ताह नई दिल्ली में चीनी रक्षा मंत्री जनरल वेई फेंग की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ हुई बैठक में दोनों देशों ने मोदी और चीन के राष्ट्रपति के बीच बनी अहम सहमति को आगे क्रियान्वित करने के तरीके पर गहन चर्चा की थी. 

पीएम नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति में बनी थी सहमति
डोकलाम गतिरोध की पृष्ठभूमि के मद्देनजर दोनों देशों की सेनाओं सहित भारत-चीन के संबंधों के विभिन्न पहलुओं के प्रबंधन के लिए मोदी और शी की वुहान में अप्रैल में हुई अनौपचारिक बैठक में एक सहमति बनी थी. दोनों सेनाओं (थल सेना और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के बीच हॉटलाइन को विश्वास बहाली के एक बड़े उपाय के तौर पर देखा जा रहा है. यह दोनों सेनाओं के मुख्यालयों को सीमा पर गश्त के दौरान तनाव दूर करने और डोकलाम जैसे गतिरोध को टालने के लिए बातचीत में तेजी लाने में सक्षम बनाएगा.

डोकलाम को लेकर 73 दिनों तक चला था गतिरोध
दरअसल, भूटान के पास डोकलाम में दोनों देशों की सेनाओं के बीच 73 दिनों तक रहे गतिरोध के चलते तनाव अपने चरम पर पहुंच गया था. इलाके में चीन द्वारा सड़क निर्माण किए जाने को लेकर गतिरोध की स्थिति बनी थी. दोनों देशों के अपनी-अपनी सेनाएं हटाने के लिए सहमत होने पर यह गतिरोध खत्म हुआ था. वु ने कहा कि दोनों देश रक्षा मंत्रालयों के बीच एक नये सहमति पत्र (एमओयू) पर काम करने के लिए मशविरा कर रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘‘2006 में भारत और चीन ने रक्षा आदान-प्रदान और सहयोग संबंधी एक एमओयू पर हस्ताक्षर किया था. भारत ने एमओयू के एक नये प्रारूप पर हस्ताक्षर करने की अपनी इच्छा से अवगत कराया है. चीन इसके प्रति एक सकारात्मक रूख रखता है और दोनों देश एक दूसरे के संपर्क में हैं.’’ 

भारत और चीन के संबंध सहज रहने से दोनों को होगा फायदा- चीन
वु ने कहा कि यदि चीन और भारत के बीच संबंध सहज रहते हैं, तो इसका दोनों को फायदा होगा और यह एशिया को समृद्धि की राह पर बढ़ने में मदद करेगा. यदि वे एक दूसरे से लड़ेंगे, तो इससे दोनों में से किसी को फायदा नहीं होगा, बल्कि अन्य को फायदा पहुंचेगा. वु ने कहा कि वह संचार और समन्वय बढ़ाने, परस्पर लाभकारी सहयोग मजबूत करने, अपने मतभेदों को उपयुक्त रूप से दूर करने और अपने सैन्य संबंधों को स्वस्थ्य एवं क्रमिक रूप से आगे बढ़ाने के लिए मोदी और शी के बीच बनी सहमति को क्रियान्वित करने के लिए भारत के साथ मिल कर काम करने को इच्छुक हैं. 

आपसी संबंधों में आएगी मजबूती
उन्होंने बताया कि वेई ने सीतारमण को चीन की यात्रा के लिए एक आधिकारिक आमंत्रण दिया है. वु ने वेई की भारत यात्रा के प्रमुख पहलुओं का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय नेताओं के साथ चीनी रक्षा मंत्री वेई की वार्ता सुरक्षा एवं सैन्य आदान प्रदान और सहयोग मजबूत करने तथा रक्षा विश्वास बहाली उपायों को मजबूत करने पर केंद्रित रहेगी. यह पूछे जाने पर कि चीन वेई की भारत यात्रा के नतीजे को किस तरह से देखता है, इस पर प्रवक्ता ने कहा कि उन्होंने सैन्य कमानों के बीच सीमा मुद्दों पर एक हॉटलाइन स्थापित करने के बारे में भी वार्ता की. 

रक्षा मंत्रालयों और क्षेत्रीय सैन्य इकाइयों के बीच स्थापित होगी हॉटलाइन
वु ने बताया कि दोनों देशों के बीच चर्चा में दोनों रक्षा मंत्रालयों और क्षेत्रीय सैन्य इकाइयों के बीच एक सीधा फोन लाइन स्थापित करना शामिल है. दोनों सैन्य मुख्यालयों के बीच एक सीधा हॉटलाइन स्थापित करने में देर होने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि दोनों देश विषय विशेष के बारे में बातचीत कर रहे हैं. अगले चरण में एक दूसरे से इस बारे में संपर्क और समन्वय को जारी रखा जाएगा. दोनों देशों के बीच अच्छे संबंधों की जरूरत पर जोर देते हुए वु ने कहा कि चीन और भारत एशिया में बहुत महत्वपूर्ण देश हैं और क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता कायम रखने में इनकी अहम जिम्मेदारियां हैं.

(इनपुट भाषा से)