मालदीव में और गहराया राजनीतिक संकट, भारत ने जताई चिंता

आपातकाल की घोषणा के साथ ही सभी संवैधानिक अधिकार खत्म कर दिए गए थे. सेना ने सरकार विरोधियों की धरपकड़ शुरू कर दी थी. 

मालदीव में और गहराया राजनीतिक संकट, भारत ने जताई चिंता
मालदीव में राजनीतिक संकट गहराता जा रहा है. भारत ने हालात पर चिंता जाहिर की है

नई दिल्ली : सोमवार को मालदीव के हालात उस समय और बिगड़ गए जब राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने पूरे देश में 15 दिनों के आपातकाल की घोषणा कर दी थी. आपातकाल की घोषणा के साथ ही सभी संवैधानिक अधिकार खत्म कर दिए गए थे. सेना ने सरकार विरोधियों की धरपकड़ शुरू कर दी थी. सेना ने सुप्रीम कोर्ट ने दरवाजे भी तोड़ दिए और चीफ जस्टिस अली हमीद और न्यायिक प्रशासन विभाग के प्रशासक अब्दुल्ला सईद को गिरफ्तार कर लिया. इनके अलावा पूर्व राष्ट्रपति मौमून अब्दुल गयूम को भी हिरासत में ले लिया गया.

भारत ने जताई चिंता
राजधानी माले समेत पूरे देश में सरकार विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं. भारत मालदीव की स्थिति पर गहराई से नजर रखे हुए है. भारत ने मालदीव संकट पर चिंता प्रकट करते हुए कहा कि भारत माले की हर स्थिति पर नजर रखे हुए हैं. भारतीय पर्यटकों को मालदीव नहीं जाने की हिदायत दी गई है. विदेश मंत्रालय मालदीव में रह रहे भारतीयों से भी संपर्क बनाए हुए है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि हम देश में आपातकाल लगने, सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं करने और संवैधानिक अधिकारों को खत्म करने से चिंतित हैं. विदेश मंत्रालय ने मालदीव में भारतीय प्रवासियों को सतर्क रहने को कहा है. मंत्रालय ने कहा कि सावधानी बरतें और सर्वजनिक समारोह में जाने से बचें.  

टीवी पर कहा, नहीं मानते सुप्रीम कोर्ट का आदेश
यामीन सरकार ने अब तक संसद को भंग करने और अदालती आदेश के अनुपालन के अंतरराष्ट्रीय आह्वान को खारिज किया है. रविवार को राष्ट्रीय टेलीविजन पर दिये गये अपने संदेश में अटॉर्नी जनरल मोहम्मद अनिल ने कहा कि सरकार इसे नहीं मानती. अनिल ने कहा, 'राष्ट्रपति को गिरफ्तार करने का सुप्रीम कोर्ट का कोई भी फैसला असंवैधानिक और अवैध होगा. इसलिये मैंने पुलिस और सेना से कहा है कि किसी भी असंवैधानिक आदेश का अनुपालन न करें.'

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संसद में सशस्त्र बल तैनात 
राष्ट्रीय संसद ‘पीपुल्स मजलिस' के अंदर पिछले साल मार्च से सशस्त्र बल तैनात हैं जब यामीन ने उन्हें अंसतुष्ट सांसदों को निकालने का आदेश दिया था. असंतुष्टों के खिलाफ राष्ट्रपति की कार्रवाई से इस छोटे से पर्यटक द्वीपसमूह की छवि को खासा नुकसान पहुंचा है. संयुक्त राष्ट्र और कई देशों ने अनुभवहीन लोकतंत्र में विधि के शासन को बहाल करने की अपील की थी.

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चीन की चाल
पिछले सितंबर में मालदीव ने चीन के साथ मुक्‍त व्‍यापार समझौता किया. मालदीव ने हालिया दौर में चीन के साथ मैरीटाइम सिल्‍क रूट से जुड़े एमओयू पर हस्‍ताक्षर किए. उसके इस कदमों को भारत से बढ़ती दूरी के रूप में देखा जा रहा है. दरअसल हिंद महासागर में मालदीव की भौगोलिक स्थिति सामरिक दृष्टि के लिहाज से चीन के लिए बेहद उपयोगी है. इसलिए वह मालदीव के साथ संबंध मजबूत करने का इच्‍छुक है. कूटनीतिक दांवपेंच के इस खेल में अब भारत के रुख पर सबकी निगाहें हैं.

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भारत की भूमिका
मो. नशीद जब मालदीव के लोकतांत्रिक ढंग से चुने गए पहले राष्‍ट्रपति बने तो भारत ने उनका स्‍वागत किया था. उनके दौर में भारत और मालदीव के संबंध मजबूत हुए. लेकिन नशीद की जब लोकतांत्रिक सरकार को अपदस्‍थ किया गया तो कई आलोचकों का कहना है कि भारत ने अपेक्षित रूप से उनका समर्थन नहीं किया. हालांकि ब्रिटेन में निर्वासन का जीवन व्‍यतीत कर रहे नशीद को पिछले साल भारत ने एक सेमिनार के सिलसिले में भारत बुलाया था. उसके बाद मालदीव के राष्‍ट्रपति अब्‍दुल्‍ला यमीन ने भी भारत की कुछ समय पहले यात्रा की थी. 

दरअसल, अब्‍दुल्‍ला यमीन को यह अहसास थोड़ा बाद में हुआ कि हिंद महासागर में भारत की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. हालांकि उसके पहले वह चीन के करीबी होने की कोशिशों में लगे थे. पीएम मोदी ने भी सत्‍ता संभालने के बाद अब तक कई एशियाई देशों की यात्राएं की हैं लेकिन मालदीव नहीं गए हैं. इसको दोनों देशों के बीच आई दूरी के रूप में देखा जा रहा है.