भारत को 2015 के उत्तरार्ध में मिलेगा कनाडा से यूरेनियम

भारत को यूरेनियम की आपूर्ति करने के लिए समझौता करने वाली कनाडाई कंपनी कैमिको इस साल के उत्तरार्ध में उसकी आपूर्ति शुरू कर देगी और उसके इस्तेमाल पर कड़ी नजर रखी जाएगी। कंपनी इस समझौते को लेकर उत्साहित है और उसने कहा है कि यह दोनों देशों के बीच नये रिश्ते की शुरुआत है।

ओटावा : भारत को यूरेनियम की आपूर्ति करने के लिए समझौता करने वाली कनाडाई कंपनी कैमिको इस साल के उत्तरार्ध में उसकी आपूर्ति शुरू कर देगी और उसके इस्तेमाल पर कड़ी नजर रखी जाएगी। कंपनी इस समझौते को लेकर उत्साहित है और उसने कहा है कि यह दोनों देशों के बीच नये रिश्ते की शुरुआत है।

कैमिको के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी एस गित्जेल ने कहा कि कंपनी निर्धारित समयानुसार इस साल के उत्तरार्ध में यूरेनियम की आपूर्ति शुरू कर देगी। कैमिको और परमाणु उर्जा विभाग ने दो दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के दौरान इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत कनाडाई कंपनी अगले पांच साल तक 35 करोड़ कनाडाई डॉलर के मूल्य पर यूरेनियम की आपूर्ति करेगी।

गित्जेल ने कहा, हमने एक बाध्यकारी अनुबंध किया है जिसके तहत कैमिको भारत को उसके परमाणु संयंत्रों से बिजली उत्पादन के लिए अगले पांच साल के लिए 70 करोड़ पाउंड यूरेनियम देगी। यह हमारे लिया पहला अवसर है और यह उत्साहजनक है। कनाडा ऐसा तीसरा देश है जो भारत को यूरेनियम प्रदान करेगा। अन्य दो देश रूस और कजाखस्तान हैं।

कनाडा ने 1970 के दशक में भारत को यूरेनियम एवं परमाणु हार्डवेयर की आपूर्ति रोक दी थी क्योंकि उस वक्त आरोप लगा था कि भारत ने परमाणु बम बनाने के लिए कनाडाई प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया था। कनाडा-भारत परमाणु सहयोग समझौता 2013 में असतित्व में आया। परमाणु मुद्दे को लेकर भारत के प्रति कनाडा में लंबे वक्त तक आशंका के बारे में पूछे जाने पर गित्जेल ने कहा कि यह इतिहास है।

उन्होंने कहा, भारत और कनाडा असैन्य परमाणु क्षेत्र में किसी समझौते के लिए पिछले पांच साल से मिलकर काम कर रहे थे जिसमें साफ तौर पर संबंधों की शतों का उल्लेख है -जैसे कौन क्या कर सकता है, यदि हम परमाणु सामग्री की आपूर्ति करेंगे तो, उसका किस बात के लिए उपयोग किया जा सकता है, निगरानी प्रणाली क्या होगी।

उन्होंने कहा, लिहाजा, यह एक नया दिन है जिसने हमें (भारत के) परमाणु उर्जा विभाग को यूरेनियम बेचने की इजाजत दी। जब गित्जेल से पूछा गया कि क्या उसके अंतिम उपयोग की निगरानी की जाएगी तो उन्होंने कहा कि यह सामग्री शांतिपूर्ण, असैन्य उद्देश्यों के लिए है और उस पर नजर रखी जा सकती है। उन्होंने कहा, यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण उपबंध है।

गित्जेल ने कहा कि भारत और कनाडा दोनों देशों की सरकार आपूर्ति पर निगरानी के लिए मिलकर काम करेंगे। जब उनसे पूछा गया कि क्या अंतरराष्ट्रीय परमाणु उर्जा एजेंसी (आईएईए) निगरानी करेगी तो उन्होंने कहा कि इस संस्था की तो हमेशा ही भूमिका रही है लेकिन यह खास समझौता भारत और कनाडा के बीच है एवं इसी विषय पर हम काम कर रहे हैं।

कैमिको और परमाणु उर्जा विभाग के बीच रिश्ते में अगले कदम क्या हो सकते हैं, तो उन्होंने कहा, मुझे पूरा विश्वास है कि यह रिश्ता बहुत अच्छी तरह आगे बढ़ेगा। उन्होंने मोदी के इस बयान का जिक्र किया कि यूरेनियम उनके लिए महज धातु नहीं बल्कि कनाडा का विश्वास है और कहा, विश्वास रिश्ता बनाने का आधार है। मोदी ने कहा है कि यह समझौता द्विपक्षीय संबंध में नये युग का प्रतीक है।